पंजाब के अमृतसर जिले के नशीले पदार्थों की तस्करी (NDPS) के एक मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी मनप्रीत सिंह उर्फ मनी की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने साफ किया है कि यदि किसी आरोपी के खिलाफ लगातार कई आपर
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ऐसे मामलों में NDPS एक्ट की सख्त धारा 37 की शर्तें पूरी न होने के कारण जमानत नहीं दी जा सकती। ऐसे में अब उसे जेल में ही रहना पड़ेगा। हालांकि याची के वकीलों ने कई तर्क दिए। उन्होंने पंजाब और तमिलनाडू की दलीलें भी दीं, लेकिन अदालत में यह टिक नहीं पाई है। अब सारे मामले को3 प्वाइंट में जानिए
1.नाके पर सुरजीत को हेरोइन समेत पकड़ा
अमृतसर के थाना कंबोज में 5 नवंबर 2025 को एनडीपीएस एक्ट की धारा 21-सी और 29 के तहत FIR नंबर 206 दर्ज की गई थी। पुलिस ने सबसे पहले सुरजीत सिंह को 1 किलो 3 ग्राम हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान सुरजीत सिंह ने पुलिस को बताया कि बरामद हेरोइन में से 400 ग्राम उसने मनप्रीत सिंह उर्फ मनी को बेची थी। सुरजीत सिंह के इस बयान के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 7 नवंबर 2025 को मनप्रीत सिंह उर्फ मनी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
2. हाईकोर्ट में पेश की तीन दलीलें
1. पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याची से कोई नशीला पदार्थ या हेरोइन सीधे तौर पर बरामद नहीं हुई है। उसका नाम केवल सह-आरोपी सुरजीत सिंह के कबूलनामे/बयान के आधार पर मामले में शामिल किया गया है, जिसका कानून की नजर में अकेले कोई मजबूत साक्ष्य मूल्य नहीं है।
2. बचाव पक्ष ने तूफान सिंह बनाम तमिलनाडु राज्य (2020), राकेश कुमार सिंगला बनाम यूआई (2021) और विक्रांत सिंह बनाम पंजाब राज्य सहित कई न्यायिक फैसलों का हवाला दिया। इनमें कहा गया था कि यदि सह-आरोपी के बयान के अलावा कोई अन्य संपुष्ट करने योग्य साक्ष्य न हो, तो जमानत दी जा सकती है।
3. आरोपी 7 नवंबर 2025 से लगभग 10 महीने से लगातार जेल में बंद है और अभियोजन पक्ष के 13 गवाहों में से अभी तक एक भी गवाह से पूछताछ नहीं हुई है।

3. अदालत ने यह बात अव्यवहारिक
1. अदालत ने स्पष्ट कहा कि 8 वर्षों से अधिक समय या लंबी अवधि के दौरान यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ लगातार कई FIR दर्ज होती हैं, तो यह मानना अव्यावहारिक और लगभग असंभव है कि जांच एजेंसियां अपनी मनमर्जी से किसी व्यक्ति को बार-बार झूठे मामलों में फंसाती रहेंगी।
2.NDPS एक्ट की धारा 37 के तहत किसी आरोपी को जमानत देने के लिए अदालत को यह विश्वास होना चाहिए कि आरोपी ने अपराध नहीं किया है और वह जमानत पर बाहर आने के बाद दोबारा अपराध नहीं करेगा। कोर्ट ने माना कि जिस व्यक्ति पर पहले से 3 नशीले पदार्थों की तस्करी/खरीद-बिक्री के मुकदमे चल रहे हों, उसके मामले में धारा 37 की इन दोनों शर्तों की संतुष्टि नहीं हो सकती। कोर्ट ने कहा कि कानूनी तौर पर आदतन अपराधी अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि के कारण सामान्य जमानत प्रावधानों के तहत भी जमानत पाने का हकदार नहीं होता।

