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नाथद्वारा में गणेशोत्सव को लेकर शहर में भक्ति और उत्साह का माहौल है। कुम्हारवाड़ा स्थित गणपति पंडाल में श्री बजरंग मित्रमंडल ने बाजार से प्रतिमा खरीदने के बजाय खुद गणेश प्रतिमा तैयार की। मंडल के सदस्यों ने करीब एक माह तक मिट्टी से प्रतिमा बनाने में मेहनत की। प्रतिमा में गंगा-यमुना के जल का प्रयोग किया गया और सजावट में इको फ्रेंडली रंग इस्तेमाल किए गए। मंडल पिछले 26 साल से गणपति स्थापना की परंपरा निभा रहा है। सदस्यों ने खुद तैयार की गणेश प्रतिमा नाथद्वारा के कुम्हारवाड़ा स्थित गणपति पंडाल में श्री बजरंग मित्रमंडल ने अनूठी पहल करते हुए अपने हाथों से इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमा तैयार की है। मंडल के सदस्यों ने बाजार से प्रतिमा खरीदने के बजाय करीब एक माह तक मेहनत कर मिट्टी से गणपति का स्वरूप तैयार किया। मूर्तिकार ने सिखाई प्रतिमा बनाने की कला प्रतिमा निर्माण की कला मूर्तिकार मुकेश प्रजापत ने मंडल के सदस्यों को सिखाई। उन्होंने प्रतिमा तैयार करने के साथ ही मिट्टी से गणेश प्रतिमा बनाने की बारीकियां भी बताईं। प्रतिमा के आधारभूत ढांचे में तालाब की चिकनी मिट्टी और बांस का उपयोग किया गया। इसके बाद मुकेश प्रजापत ने प्रतिमा को अंतिम फिनिशिंग दी। प्रतिमा की सजावट में इको फ्रेंडली रंगों का इस्तेमाल किया गया है। गंगा-यमुना के जल का भी किया प्रयोग मंडल के अनुसार प्रतिमा निर्माण में गंगा और यमुना के जल का भी प्रयोग किया गया। फिनिशिंग के लिए विशेष वैक्स मुंबई से मंगवाया गया। मंडल के सदस्यों का कहना है कि प्रतिमा में उनकी सामूहिक आस्था, श्रम और भक्ति समाहित है। 26 साल से गणपति स्थापना की परंपरा श्री बजरंग मित्रमंडल पिछले 26 वर्षों से गणपति स्थापना की परंपरा निभा रहा है। इस बार प्रतिमा निर्माण के जरिए मंडल ने भक्ति के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया है।
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नाथद्वारा में मिट्टी से इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमा बनाई:पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश, अभिषेक से शुरू होंगे पांच दिवसीय आयोजन
