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बीते वीरवार को चंडीगढ़ प्रशासक गुलाब चंद कटारिया नगर निगम के कार्यक्रम नशा मुक्त चंडीगढ़ में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने शहर को 30 सितंबर तक नशा मुक्त बनाने की बात कही थी। इसके बाद चंडीगढ़ पुलिस एक्शन मोड में नजर आ रही है। घोड़ों से गश्त हो रही है और सभी थानों के थाना प्रभारी व एरिया डीएसपी खुद रात के समय भी फील्ड में नजर आ रहे हैं। यही नहीं, चंडीगढ़ पुलिस शहर में जहां भी कार्रवाई कर रही है, उसकी वीडियो बनाकर मीडिया तक भी पहुंचाई जा रही है। यह सब कुछ सिर्फ चार दिन में हुआ है, यानी चंडीगढ़ प्रशासक गुलाब चंद कटारिया के बोलने के बाद पुलिस ने नशे के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। पुलिस एक्शन ले तो खत्म हो सकता है नशा इससे पहले भी जब प्रशासक कटारिया नगर निगम हाउस की मीटिंग में पहुंचे थे, उस दौरान उन्होंने नशे को लेकर कहा था कि पुलिस एक्शन ले तो नशा खत्म हो सकता है। उन्होंने एरिया पार्षदों को भी अपने-अपने क्षेत्रों में नशे को रोकने के लिए आगे आने को कहा था। मगर इसके बाद सिर्फ एक पार्षद, जो नगर निगम की डिप्टी मेयर भी हैं, सुमन देवी ने पुलिस को पब्लिक मीटिंग में बताया था कि उनके एरिया में नशा खुलेआम बिक रहा है। उस दौरान डीएसपी और आईटी पार्क थाना प्रभारी मीनी भारद्वाज भी वहीं मौजूद थीं। सुमन देवी ने तीन अलग-अलग वीडियो भी दिखाए थे, जिनमें तीन युवक नशे की हालत में झूम रहे थे। इसके अलावा दो दिन पहले ही न्यू इंदिरा कॉलोनी निवासी समीर को पार्क में पांच युवकों ने चाकू मारे थे। समीर के पिता ने आरोप लगाया कि सभी युवक नशा करते हैं। उन्होंने पुलिस को कई बार बताया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके भाई पवन, जिसकी थार से टक्कर मारकर हत्या कर दी गई थी, उसकी मौत भी नशे के मुद्दे से जुड़ी थी, क्योंकि उन्होंने नशे के खिलाफ आवाज उठाई थी ताकि युवा पीढ़ी को बचाया जा सके। वहीं, सेक्टर-49 में ऑटो चालक राजकुमार पर फायरिंग के मामले में भी राजकुमार ने आरोप लगाया था कि उनके एरिया में नशा बिकता है। उन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी, जिसके बाद उन पर फायरिंग कर दी गई। 82 पर प्रिवेंटिव एक्शन 16 एफआईआर दर्ज चंडीगढ़ प्रशासक गुलाब चंद कटारिया की ओर से शहर को 30 सितंबर तक ड्रग्स फ्री करने की डेडलाइन तय करने के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने 82 लोगों के खिलाफ प्रिवेंटिव एक्शन लेते हुए उन्हें जेल भेजा है। वहीं, एनडीपीएस एक्ट के तहत 16 एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिनमें ड्रग्स की रिकवरी भी हुई है। पुलिस ने ग्राउंड लेवल पर आक्रामक अभियान शुरू कर दिया है। इस मुहिम में केवल थाना प्रभारी और एरिया डीएसपी ही नहीं, बल्कि सीआरपीएफ की टीम भी साथ है। वहीं, सीआईडी विंग को भी पूरी तरह एक्टिव किया गया है। सीआईडी की टीम कॉलोनियों में अपने मुखबिरों के जरिए ड्रग सप्लायरों और पैडलरों की सूची तैयार कर रही है। एंटी नारकोटिक टास्क फोर्स (एएनटीएफ) के साथ-साथ अब स्थानीय पुलिस सीआरपीएफ के हथियारबंद जवानों को साथ लेकर अलसुबह और देर रात सरप्राइज चेकिंग व रेड कर रही है। शहर में सप्लाई चेन को ध्वस्त करने के लिए दो या उससे अधिक एनडीपीएस केस वाले अपराधियों को पिट-एनडीपीएस के तहत एक साल के लिए डिटेन करने की रूपरेखा तैयार की गई है। जंगल और खंडहरों में सर्च अभियान जंगल एरिया, खंडहरों और श्मशान घाट के पास बनाए गए नशेड़ियों के अड्डों पर माउंटेड पुलिस की मदद से सर्च ऑपरेशन चलाया गया। जंगल क्षेत्र से लोगों को पकड़ा गया, जिनके पास से 10 रुपये के नोट, फॉइल पर लगा चिट्टा, लाइटर और गर्म करने वाले चम्मच बरामद हुए। पुलिस ने छापेमारी के दौरान सरकारी कैमरामैन और पुलिसकर्मियों के मोबाइल से हर गतिविधि की वीडियोग्राफी की, ताकि कोर्ट में केस साबित हो सके।
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चंडीगढ़ ड्रग्स फ्री डेडलाइन के बाद पुलिस दिखी एक्शन में:16 FIR, 82 जेल भेजे, घोड़ों से गश्त-रात में रेड, 30 सितंबर तक डेडलाइन
