![]()
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सोमवार दोपहर बाद दिल्ली रवाना होंगे। मुख्यमंत्री मंगलवार को नई दिल्ली में किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर होने वाले महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) हस्ताक्षर समारोह में शामिल होंगे। ऊपरी यमुना बेसिन की इस बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट को लेकर हिमाचल समेत छह राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद आज दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होने MoU होगा। समझौता ज्ञापन पर हिमाचल के अलावा उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के प्रतिनिधि साइन करेंगे। किशाऊ परियोजना को लेकर जून में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्यों के बीच मुख्य विवाद सुलझा था। तय व्यवस्था के अनुसार परियोजना के जल घटक की 90 फीसदी लागत केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के रूप में वहन करेगी, जबकि शेष 10 फीसदी राशि छह राज्यों के बीच साझा होगी। हिमाचल के हिस्से का पानी दिल्ली और राजस्थान को मिलेगा इस समझौते में हिमाचल के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि राज्य के हिस्से के पानी को दिल्ली और राजस्थान को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बदले दिल्ली और राजस्थान हिमाचल के हिस्से के बिजली घटक की लागत में योगदान करेंगे। यानी हिमाचल को अपने आवंटित पानी के बदले परियोजना के बिजली हिस्से में आर्थिक भागीदारी का लाभ मिलेगा। 660 मेगावाट बिजली, 1324 एमसीएम पानी का भंडारण किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना टौंस नदी पर प्रस्तावित है। टौंस यमुना की प्रमुख सहायक नदी है और परियोजना स्थल हिमाचल प्रदेश के सिरमौर तथा उत्तराखंड के देहरादून क्षेत्र की सीमा पर आता है। परियोजना की स्थापित बिजली क्षमता 660 मेगावाट यानी 165 मेगावाट की चार इकाइयां है। बांध से करीब 1324 मिलियन क्यूबिक मीटर लाइव जल भंडारण की क्षमता विकसित होगी। परियोजना से करीब 97,076 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा और पेयजल/औद्योगिक उपयोग के लिए पानी उपलब्ध कराने की योजना है। परियोजना के तहत करीब 236 मीटर ऊंचे कंक्रीट ग्रेविटी बांध का निर्माण प्रस्तावित है। इससे सालाना करीब 1379 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान है। हिमाचल और उत्तराखंड का बड़ा क्षेत्र डूब क्षेत्र में किशाऊ परियोजना का हिमाचल पर सीधा प्रभाव भी पड़ेगा। उपलब्ध परियोजना विवरण के अनुसार हिमाचल में करीब 1,498 हेक्टेयर और उत्तराखंड में 1,452 हेक्टेयर क्षेत्र पानी में डूब जाएगा। दोनों राज्यों में कुल 17 गांव प्रभावित होने और करीब 5,500 लोगों के पुनर्वास की आवश्यकता का अनुमान परियोजना दस्तावेजों में दिया गया है। हिमाचल में आठ गांव और करीब 2,092 लोगों के प्रभावित होने का अनुमान है। परियोजना के लिए हिमाचल और उत्तराखंड ने पहले ही संयुक्त उपक्रम बनाया हुआ है। किशाऊ कॉरपोरेशन लिमिटेड का गठन जनवरी 2017 में किया गया था। अब छह राज्यों के बीच होने वाला MoU परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। 17 साल से अटकी परियोजना को अब आगे बढ़ने की उम्मीद किशाऊ परियोजना को वर्ष 2008 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था। इसके बावजूद पानी के बंटवारे, लागत वहन और राज्यों के बीच सहमति जैसे मुद्दों के कारण यह लंबे समय से आगे नहीं बढ़ पाई। जून 2026 में केंद्र की पहल पर छह राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद MoU का रास्ता साफ हुआ। MoU पर हस्ताक्षर के बाद परियोजना को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाना है। परियोजना का उद्देश्य केवल बिजली उत्पादन नहीं, बल्कि ऊपरी यमुना बेसिन में पानी का भंडारण, सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और यमुना में स्वच्छ पानी का प्रवाह बढ़ाना भी है। केंद्र के अनुसार इससे यमुना के पुनर्जीवन की दिशा में भी मदद मिलेगी। हिमाचल के लिए आर्थिक और ऊर्जा दोनों लिहाज से अहम MoU के बाद परियोजना के निर्माण की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। हिमाचल के लिए इसका महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि राज्य को परियोजना में बिजली से जुड़ा लाभ मिलेगा, जबकि उसके हिस्से के पानी का उपयोग दिल्ली और राजस्थान में किया जाएगा। इसके अलावा जल घटक की लागत में केंद्र की 90 फीसदी सहायता का प्रावधान परियोजना के वित्तीय बोझ को कम करने वाला अहम फैसला है। किशाऊ परियोजना पूरी होने के बाद दिल्ली समेत ऊपरी यमुना बेसिन के राज्यों को पेयजल और सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल उपलब्ध होगा। वहीं 660 मेगावाट की जलविद्युत क्षमता हिमाचल और उत्तराखंड के लिए ऊर्जा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
Source link
किशाऊ बांध पर कल 6 राज्यों में MOU:सीएम सुक्खू आज दिल्ली जाएंगे, हरियाणा-UP, दिल्ली व राजस्थान को मिलेगा बिजली-पानी, 660 मेगावाट का प्रोजेक्ट
