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सोनू कुमार | गढ़वा जिले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से बिना वैध पंजीकरण के करीब 360 अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इनमें से कई का निबंधन महज क्लीनिक के नाम पर है, जबकि अनेक अस्पताल बिना किसी कागजात के धड़ल्ले से चल रहे हैं। विडंबना यह है कि इन अवैध सेंटरों में ओपीडी के साथ-साथ प्रसव और गंभीर ऑपरेशन भी कराए जा रहे हैं। अस्पतालों के बोर्ड पर बड़े-बड़े एमबीबीएस डॉक्टरों के नाम लिखे होते हैं, लेकिन मौके पर मरीजों का इलाज झोलाछाप डॉक्टर ही करते हैं। बता दें कि जिले में करीब 500 क्लीनिक व नर्सिंग होम संचालित है। फर्जीवाड़े के तहत बाहरी एमबीबीएस डॉक्टरों के प्रमाण पत्रों का उपयोग कर मोटी रकम के बदले पंजीकरण करा लिया जाता है। जिले में अवैध अस्पतालों के संचालन का मुद्दा कई राजनीतिक दल भी उठा चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग से सवाल किए गए कि बिना लाइसेंस और अनुभवी डॉक्टरों के ये अस्पताल कैसे चल रहे हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नियम: निबंधन के लिए अस्पताल में अनुभवी विशेषज्ञ डॉक्टर की उपस्थिति अनिवार्य है। सिजेरियन और अन्य ऑपरेशन के लिए सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, एनेस्थेसिया विशेषज्ञ, ए-ग्रेड नर्स और ओटी सहायक का होना जरूरी है। पारदर्शिता: पंजीयन से सभी अस्पतालों की फीस, डॉक्टरों की उपलब्धता, सुविधाएं और फोन नंबर ऑनलाइन उपलब्ध होंगे। इससे मरीजों को पारदर्शी और बेहतर इलाज मिल सकेगा।लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। -अवैध नर्सिंग होम के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग लगातार छापेमारी कर रहा है। हाल ही में कांडी में दो, रंका में चार, भवनाथपुर में दो, बंशीधर नगर में एक और गढ़वा में एक क्लीनिक को सील किया गया है। बिना लाइसेंस अस्पताल चलाने वाले संचालक इसे स्वयं बंद कर लें, अन्यथा सख्त कार्रवाई होगी। – डॉ. जॉन एफ. कैनेडी, सिविल सर्जन, गढ़वा जानिए… नियम क्या कहते हैं और पंजीयन क्यों है जरूरी
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जिले के 360 अस्पतालों में झोलाझाप डॉक्टर, कराते हैं ऑपरेशन और प्रसव
