![]()
रायपुर में देवकीनंदन ठाकुर ने श्रीमद्भागवत कथा पर तीर्थों की पवित्रता और धार्मिक मर्यादा का मैसेज दिया। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि आज लोग तीर्थों को घूमने-फिरने की जगह समझने लगे हैं, जबकि तीर्थ आस्था, साधना और आत्मशुद्धि के केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि तीर्थों को पिकनिक स्पॉट नहीं बनाना चाहिए। वहां की पवित्रता, अनुशासन और धार्मिक परंपराओं का सम्मान करना हर श्रद्धालु की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि जब तीर्थों की मर्यादा टूटती है तो उनकी दिव्यता भी धीरे-धीरे कम होने लगती है। यदि श्रद्धालु श्रद्धा, स्वच्छता और अच्छे आचरण के साथ तीर्थ यात्रा करेंगे, तभी तीर्थों की पहचान और आध्यात्मिक महत्व बना रहेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि तीर्थ स्थलों पर ऐसा कोई व्यवहार न करें जिससे उनकी गरिमा प्रभावित हो।
गोवर्धन परिक्रमा महोत्सव भी मनाया
कथा में गोवर्धन परिक्रमा महोत्सव भी मनाया गया। श्रद्धालुओं ने मानसिक रूप से गोवर्धन की परिक्रमा कर गिरिराज महाराज का स्मरण किया। कथा पंडाल में भजन-कीर्तन और जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने परिक्रमा में भाग लेकर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
पूतना प्रसंग का उल्लेख अपने प्रवचन में देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि भगवान को दिखावा नहीं, बल्कि सच्चे मन की भक्ति प्रिय है। उन्होंने पूतना प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान भाव देखते हैं। जो व्यक्ति अहंकार और स्वार्थ छोड़कर सच्चे मन से उनकी शरण में आता है, भगवान उसका कल्याण करते हैं। उन्होंने माता-पिता के सम्मान को हर संतान का पहला धर्म बताया और कहा कि बच्चों का नाम भगवान के नाम पर रखने से घर में बार-बार प्रभु का स्मरण होता है। कथा संयोजक योगेश अग्रवाल ने बताया कि कथा में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। स्टेडियम की सीढ़ियों तक लोग बैठकर कथा सुन रहे हैं। कथा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उनकी पत्नी कौशल्या साय, सांसद बृजमोहन अग्रवाल और मंत्री टंकराम वर्मा भी पहुंचे और व्यासपीठ का आशीर्वाद लेकर कथा श्रवण किया। कथा स्थल पर “नो तिलक, नो एंट्री” के नियम का श्रद्धालुओं ने अनुशासन के साथ पालन किया।
Source link
