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फर्जी काल सेंटरों के निशाने पर थे अमेरिकी नागरिक:चंडीगढ़ का मकान बना था कंट्रोल रूम, पटियाला में कॉल सेंटर चलते मिले




प्रवर्तन निदेशालय (ED) के हैदराबाद क्षेत्रीय कार्यालय की जांच में पता चला है कि फर्जी कॉल सेंटरों की आड मे अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है। ईडी की जांच में यह भी बात सामने आए चंडीगढ़ में बना कॉल सेंटर कंट्रोल रूम बना हुआ था। यहां से कुल 66 मोबाइल, 13 लैपटॉप समेत डिजिटल उपकरण जब्त किए गए है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 17 के तहत की गई। अब जानिए अब तक की जांच में क्या मिला ईडी को :- 3 लाइव कॉल सेंटर मिले, 220 लोग काम करते मिले
ED की तलाशी में 3 कॉल सेंटर चलते हुए मिले। इनमें 2 पटियाला और 1 पुणे में था। तलाशी के दौरान इन सेंटरों में करीब 220 लोग काम करते मिले। उनके काम, पहचान और किसे रिपोर्ट करते थे, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। कॉल सेंटरों में बड़ी संख्या में कंप्यूटर, हेडसेट, मोबाइल फोन और नेटवर्किंग उपकरण लगे थे। ED के अनुसार, इन सेंटरों से अमेरिकी नागरिकों को फोन कर झूठे बहाने बनाए जाते थे और उनसे पैसे देने के लिए कहा जाता था। मोबाइल और लैपटॉप से ठगी का तरीका मिला
पटियाला के कॉल सेंटरों से मिले मोबाइल फोन और एक लैपटॉप में सिंडिकेट के काम करने के तरीके और ठगी से मिले पैसों के बंटवारे से जुड़ा डेटा मिला है। पुणे के कॉल सेंटर में भी अमेरिकी नागरिकों को ठगने का इसी तरह का तरीका अपनाए जाने की बात सामने आई। चंडीगढ़ का मकान बना था कंट्रोल सेंटर
ED के मुताबिक, चंडीगढ़ में जिस आवासीय परिसर की तलाशी ली गई, उसका इस्तेमाल पटियाला में चल रहे फर्जी कॉल सेंटरों के संचालन और नियंत्रण के लिए किया जा रहा था। यहां से कॉल सेंटरों के कामकाज से जुड़ा डेटा रखने वाले कई डिजिटल उपकरण मिले। ED ने बताया कि यहां एक व्यक्ति अमेरिकी डॉलर को भारतीय रुपए में बदलने से जुड़े काम में कथित तौर पर शामिल मिला। उसकी भूमिका और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है। 66 मोबाइल, 13 लैपटॉप समेत डिजिटल उपकरण जब्त
तलाशी के दौरान ED ने 66 मोबाइल फोन, 13 लैपटॉप, हार्ड डिस्क, अन्य संचार उपकरण, नकदी और रिकॉर्ड जब्त किए हैं। अब ED कॉलिंग अभियानों, स्क्रिप्ट, डायलर, VoIP सिस्टम, पीड़ितों के डेटा, भुगतान के माध्यम, कॉल सेंटर चलाने वालों और ठगी से हासिल रकम के लेनदेन की जांच कर रही है। डिजिटल सबूतों के जरिए पूरे नेटवर्क, इसमें शामिल लोगों और ठगी की रकम का पता लगाया जा रहा है।



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