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जबलपुर से करीब 40 साल पहले बरगी बांध परियोजना के लिए घर-बार छोड़ने वाले दुर्गानगर के ग्रामीण अब अपने गांव की सड़क के लिए खुद फावड़ा-तसला उठा रहे हैं। सरकारी फाइलों में सड़क का काम अटका रहा तो ग्रामीणों का सब्र जवाब दे गया। 100 से ज्यादा महिलाएं, पुरुष, बच्चे और दिव्यांग रोज श्रमदान कर करीब 2 किलोमीटर सड़क सुधार रहे हैं। ग्रामीण अपने खर्च से मुरम और पत्थर लाकर बारिश में चलने लायक रास्ता तैयार कर रहे हैं। जबलपुर मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर शहपुरा जनपद के दुर्गानगर में 100 से ज्यादा परिवार और करीब 1,500 की आबादी है। ग्रामीणों के मुताबिक बारिश में गांव की मुख्य सड़क कीचड़ में तब्दील हो जाती है। कई दिनों तक गांव का संपर्क प्रभावित रहता है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों और मरीजों को होती है। एंबुलेंस नहीं पहुंचती, डिलीवरी के लिए दूसरे गांव जाना पड़ता है सड़क की बदहाली का सबसे गंभीर असर स्वास्थ्य सेवाओं पर है। ग्रामीणों का कहना है कि कच्चे और कीचड़ भरे रास्ते के कारण एंबुलेंस और 108 वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते। प्रसव का समय नजदीक आने पर गर्भवती महिलाओं को मजबूरी में दूसरे गांव जाकर रहना पड़ता है। दुर्गानगर निवासी सोनू राजपूत ने बताया कि बारिश में दो किलोमीटर का रास्ता इतना खराब हो जाता है कि निकलना मुश्किल हो जाता है। स्कूल जाने वाले बच्चे सबसे ज्यादा परेशान होते हैं। कई बार प्रशासन को आवेदन देने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए ग्रामीणों ने खुद सड़क सुधारने का फैसला किया। मजदूरी पर जाने से पहले 2-3 घंटे श्रमदान ग्रामीण भीमा बाई ने बताया कि सड़क की जरूरत इतनी ज्यादा है कि अब उन्हें लगता है कि इसे खुद ही बनाना पड़ेगा। गांव के लोग मजदूरी पर जाने से पहले रोज 2 से 3 घंटे श्रमदान कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार अधिकारियों को आवेदन दिए, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। जिला पंचायत में 3-4 बार उठा मुद्दा जिला पंचायत सदस्य रामकुमार सैयाम ने बताया कि उन्होंने जिला पंचायत की बैठकों में दुर्गानगर की सड़क का मुद्दा 3 से 4 बार उठाया। जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत को लिखित प्रस्ताव भी दिया गया, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। विधायक बोले- अधिकारियों से चर्चा कर बजट का प्रावधान करेंगे मामले में बरगी विधायक नीरज सिंह ने ग्रामीणों की परेशानी को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों से चर्चा कर सड़क निर्माण के लिए बजट का प्रावधान किया जाएगा। जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत ने भी मामला संज्ञान में आने की बात कही। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए जल्द सड़क बनाने का प्रयास किया जाएगा।
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जबलपुर में विस्थापितों ने खुद उठाया फावड़ा:बरगी बांध के विस्थापित 40 साल बाद खुद बना रहे 2 किमी सड़क; ग्रामीण बोले-मरने को छोड़ दिया
