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नई दिल्ली6 घंटे पहले
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एयर इंडिया एक्सप्रेस के बेड़े में 100 से ज्यादा विमान हैं। – फाइल फोटो
एअर इंडिया एक्सप्रेस ने दुबई-अमृतसर फ्लाइट के 8 क्रू मेंबर्स को तीन महीने के लिए सस्पेंड किया है। इनमें चार पायलट शामिल हैं। यह कार्रवाई अनिवार्य पोस्ट-फ्लाइट ब्रीथ एनालाइजर (अल्कोहल) टेस्ट में देरी पर हुई।
मामला 2 अगस्त की दुबई-अमृतसर फ्लाइट का है। क्रू को अमृतसर के श्री गुरु राम दास जी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंडिंग के बाद 2 घंटे में ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट कराना था।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, क्रू पहले होटल चला गया था। बाद में एयरपोर्ट लौटकर 2 घंटे 35 मिनट बाद टेस्ट कराया। सभी 8 सदस्यों का टेस्ट नेगेटिव आया यानी उनके शरीर में अल्कोहल नहीं मिला। इसके बावजूद तय समयसीमा में टेस्ट न कराने को नियमों का उल्लंघन माना गया।
एयरलाइन ने मामले की जानकारी एविएशन सेफ्टी बॉडी डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) को दी और सभी 8 सदस्यों को ड्यूटी से हटा दिया।

एअर इंडिया सभी पायलटों की स्क्रीनिंग करेगी
एयरलाइंस के पायलट के टेस्ट 4 अगस्त की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट के अचानक 300 फीट नीचे आने की घटना के बाद शुरू हुए थे। इस विमान के मुख्य पायलट का टेस्ट पॉजिटिव आया था।
एयर इंडिया अब अपने सभी पायलटों की प्रतिबंधित पदार्थों और दवाओं के लिए अतिरिक्त जांच कर रही है। यह स्क्रीनिंग ट्रेनिंग और पोस्ट-फ्लाइट के बाद की जाती है।
एअर इंडिया एक्सप्रेस ने पायलटों और अन्य कर्मचारियों से साइकोएक्टिव पदार्थों के इस्तेमाल या निर्भरता की जानकारी स्वेच्छा से देने की अपील की है।
एयरलाइन के मुताबिक, ऐसी जानकारी गोपनीय रखी जाएगी और जरूरत के अनुसार मेडिकल, HR और फ्लाइट सेफ्टी अधिकारियों के साथ साझा की जाएगी।
पायलट उड़ान से 12 घंटे पहले तक किसी भी तरह का नशा नहीं कर सकता
पायलट्स के लिए अल्कोहल को लेकर डीजीसीए (DGCA) के नियम बेहद सख्त हैं। एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937 के नियम 24 के तहत, किसी भी पायलट या क्रू मेंबर को उड़ान से 12 घंटे पहले तक किसी भी तरह के मादक पदार्थ या अल्कोहल का सेवन करने की मनाही है। उड़ान के दौरान भी इसका सेवन पूरी तरह प्रतिबंधित है।

एविएशन सेक्टर में पायलटों के लिए अनिवार्य मेडिकल टेस्ट
क्लास 2 मेडिकल: यह स्टूडेंट पायलट लाइसेंस (SPL) के लिए जरूरी है और फ्लाइट ट्रेनिंग शुरू करने से पहले अनिवार्य है।क्लास 1 मेडिकल: यह कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) और एयरलाइन पायलटों के लिए जरूरी है। इसमें शारीरिक, मानसिक, विजन, हियरिंग और हार्ट से जुड़ी जांच की जाती है।
ब्रीथ-एनालाइजर टेस्ट: फ्लाइट से पहले और लैंडिंग के बाद पायलटों का ब्रीथ-एनालाइजर टेस्ट किया जाता है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि पायलट के शरीर में अल्कोहल (शराब) का लेवल जीरो हो, क्योंकि एविएशन सेक्टर में इसे लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाती है।
साइकोएक्टिव सब्सटेंस (ड्रग) टेस्ट: पायलटों के लिए नशीले पदार्थों या साइकोएक्टिव सब्सटेंस की जांच भी अनिवार्य है। इसके तहत रैंडम ड्रग टेस्टिंग की जाती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पायलट किसी भी प्रतिबंधित दवा या नशीले पदार्थ के प्रभाव में नहीं हैं।
ड्रग टेस्ट पॉजिटिव होने पर पायलट के खिलाफ कार्रवाई
- टेस्ट और एक्शन: नमूने को दो हिस्सों में बांटा जाता है। स्क्रीनिंग टेस्ट ‘नॉन-नेगेटिव’ आने पर पायलट को तुरंत ड्यूटी से हटा दिया जाता है और दूसरे नमूने की पुष्टि के लिए लैब में जांच होती है
- पहली बार पॉजिटिव: कन्फर्मेटरी टेस्ट में पहली बार पॉजिटिव आने पर पायलट को रिहैब भेजा जाता है। दोबारा टेस्ट नेगेटिव और मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट मिलने तक वह उड़ान नहीं भर सकता।
- बार-बार उल्लंघन: दूसरी बार पॉजिटिव पाए जाने पर लाइसेंस 3 साल तक निलंबित किया जा सकता है। तीसरी बार पॉजिटिव होने पर लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
- नौकरी से बर्खास्तगी: लाइसेंस रद्द होना रेगुलेटरी एक्शन है, जबकि नौकरी से बर्खास्तगी एयरलाइन की पॉलिसी पर निर्भर करता है।

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