राष्ट्रीय राजमार्ग-44। (फाइल फोटो)
राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के पानीपत-करनाल स्ट्रेच पर डिवाइडर में एंटी-ग्लेयर मीडियन प्लांटेशन को लेकर सवाल उठे हैं। पानीपत सीए ब्रांच के पूर्व चेयरमैन एवं अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के सदस्य सीए जगदीश धमीजा ने RTI से मिले दस्तावेजों के आधार पर NHAI और कंस
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धमीजा के अनुसार, उन्होंने 9 अगस्त 2026 को RTI लगाई थी। RTI दस्तावेजों के मुताबिक, मैसर्स हरयाली को 28 जुलाई 2025 को लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस जारी किया गया था। उनका दावा है कि एक साल से अधिक समय बीतने के बाद भी चेनेज के अनुसार कई किलोमीटर में मीडियन प्लांटेशन का काम पूरा नहीं हुआ था।
धमीजा का आरोप है कि RTI दाखिल होने के बाद अगस्त में कुछ स्थानों पर पौधे लगाकर उनकी तस्वीरें ली गईं। हालांकि, NHAI की ओर से इस आरोप पर कोई पक्ष उपलब्ध नहीं कराया गया है।
10 किमी का ही दुर्घटना डेटा मिलने का दावा
धमीजा ने RTI जवाब में पूरे करीब 40 किमी के बजाय केवल पानीपत एलिवेटेड कॉरिडोर के किमी 86 से 96 तक के 10 किमी हिस्से का दुर्घटना डेटा दिए जाने पर सवाल उठाया है। उनके अनुसार, जनवरी 2023 से अगस्त 2026 के बीच इस हिस्से में 29 लोगों की मौत और 26 लोगों के गंभीर घायल होने की जानकारी दी गई।
उनका आरोप है कि शेष करीब 30 किमी के हादसों का डेटा और पौधरोपण की स्थिति से जुड़ी पूरी जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने सेफ्टी ऑडिट और दैनिक निरीक्षण रिपोर्ट भी मांगी थी, लेकिन उनके अनुसार संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।

CA जगदीश धमीजा।
पौधों के बीच गैप से हाई-बीम का खतरा
धमीजा का कहना है कि ग्रीन हाईवे पॉलिसी के तहत डिवाइडर पर ऐसी हरित पट्टी होनी चाहिए, जो सामने से आने वाले वाहनों की हाई-बीम रोके। उनका दावा है कि कुछ हिस्सों में पौधे छोटे और दूर-दूर हैं। इससे रात में सामने से आने वाली तेज रोशनी सीधे वाहन चालकों की आंखों तक पहुंच सकती है।
उन्होंने इसे दुर्घटना का संभावित कारण बताते हुए पूरे स्ट्रेच का सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की है।
प्रशासन से तत्काल निरीक्षण की मांग
धमीजा ने पानीपत और करनाल के उपायुक्त तथा पुलिस प्रशासन से NH-44 के पूरे स्ट्रेच का निरीक्षण कराने की मांग की है। उन्होंने लंबित हिस्सों में सघन पौधरोपण या अस्थायी एंटी-ग्लेयर स्क्रीन लगाने, जिम्मेदार अधिकारियों और कंसेशनायर की भूमिका की जांच करने तथा RTI से जुड़ी जानकारी की समीक्षा कराने की मांग रखी है।
उन्होंने कहा कि हाईवे पर रात के समय दृश्यता और वाहन चालकों की सुरक्षा को देखते हुए इन व्यवस्थाओं की जांच जरूरी है।
