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ग्वालियर में फर्जी पासपोर्ट केस में सरकारी कनेक्शन:सेवा केंद्र के 3 से 5 लोगों के नाम आए सामने, नसीम की सांठगांठ का दावा




ग्वालियर में फर्जी पासपोर्ट मामले की जांच अब पासपोर्ट सेवा केंद्र तक पहुंच गई है। भोपाल से गिरफ्तार एजेंट नसीम अख्तर ने एसटीएफ की पूछताछ में वर्ष 2022 में भोपाल पासपोर्ट सेवा केंद्र में पदस्थ अधिकारी-कर्मचारियों से सांठगांठ की बात कबूल की है। पूछताछ में सामने आया कि अधूरे या संदिग्ध दस्तावेजों के बावजूद आवेदन आगे बढ़ाकर पासपोर्ट बनवाए जाते थे। इसके बदले संबंधित लोगों को 25 से 30% तक कमीशन दिए जाने की बात सामने आई है। पासपोर्ट सेवा केंद्र से जुड़े करीब 3 से 5 लोगों के नाम सामने आने की बात कही जा रही है। एसटीएफ अब इनकी भूमिका की पड़ताल कर रही है। दो दिन की रिमांड, 18 और 19 सितंबर को पूछताछ नसीम अख्तर दो दिन की रिमांड पर है। एसटीएफ 18 और 19 सितंबर को उससे पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे और संदिग्ध दस्तावेज पासपोर्ट प्रक्रिया में किस तरह मंजूर होते रहे। ग्वालियर एसटीएफ यूनिट की एसपी सुनीता रावत ने बताया कि फर्जी पासपोर्ट केस में कई नाम सामने आए हैं। उनकी पड़ताल की जा रही है। एसटीएफ की टीमें ग्वालियर, भोपाल, बैतूल सहित अलग-अलग जिलों में दबिश देकर पूरे नेटवर्क का पता लगा रही हैं। 2016 से ट्रेवल्स का काम, कमाई बढ़ाने फर्जी पासपोर्ट के धंधे में आया पूछताछ में नसीम ने बताया कि वह 2016 से भोपाल के एमपी नगर में टूर एंड ट्रेवल्स का काम करता था। ट्रेवल्स के काम से कमाई कम थी, इसलिए उसने फर्जी पासपोर्ट बनाने का धंधा शुरू किया। इसमें उसे ज्यादा पैसा मिलने लगा। इसी दौरान पासपोर्ट कार्यालय से जुड़े लोगों से उसके संपर्क बने। भोपाल पासपोर्ट कार्यालय के बाहर उसकी मुलाकात मित्यानंद भिक्षु उर्फ रेयाल चौधरी से हुई। इसके बाद दोनों संपर्क में रहे। रेयाल के खातों में लाखों का लेन-देन, रकम की कड़ियां तलाश रही STF एसटीएफ ने रेयाल चौधरी के बैंक खातों की जानकारी जुटाई है। जांच में खातों में लाखों रुपए के लेन-देन का पता चला है। अब एजेंसी यह पता लगा रही है कि इनमें से कितनी रकम कथित फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क से जुड़ी है और पैसा किन-किन लोगों तक पहुंचा। एसटीएफ एसपी राजेश सिंह भदौरिया के मुताबिक, नसीम अख्तर दो दिन की रिमांड पर है। उससे फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों के बारे में पूछताछ की जा रही है। डबरा के बौद्ध मठ पर अब ताला, तीन नामों वाला भिक्षु गायब डबरा के जिस बौद्ध विहार के पते से 17 संदिग्ध भारतीय पासपोर्ट बने, वहां रहने वाले भिक्षु के तीन अलग-अलग नाम सामने आए थे। पड़ताल में आधार कार्ड पर नाम रामेश्वर जाटव, वोटर आईडी में भंते संघप्रिय और मठ की दीवार पर रांघप्रिय महाथेरो लिखा मिला था। खबर प्रकाशित होने के बाद अब मठ में ताला लगा है और भिक्षु वहां नहीं मिला। एसटीएफ की टीम जांच के लिए पहुंची तो मठ बंद मिला। भिक्षु के दस्तावेजों की पड़ताल जारी है। मठों में आने-जाने वालों का रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में जांच में बौद्ध मठों में आने-जाने और ठहरने वालों का व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं मिलने की बात सामने आई है। कौन व्यक्ति कहां से आया, कितने दिन रुका और कब वापस गया, इसका पूरा हिसाब उपलब्ध नहीं है। एसटीएफ अब मठों से जुड़े पुराने रिकॉर्ड और वहां आने-जाने वालों की जानकारी खंगाल रही है। एजेंसी यह भी पड़ताल कर रही है कि कहीं संदिग्ध लोगों ने मठों में ठहरने के बाद स्थानीय पते के आधार पर भारतीय पहचान से जुड़े दस्तावेज तो तैयार नहीं कराए।



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