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इंस्पायरिंग:डर कर मौके न छोड़ें, आगे बढ़ें और जो आपका है, उसे पाने की कोशिश करें – रश्मिका मंदाना




एक्ट्रेस रश्मिका अब गायिका एमएस सुब्बुलक्ष्मी की बायोपिक में मुख्य भूमिका निभाएंगी। इतने कम वक्त में सफलता-असफलता के फेर से उन्होंने आखिर कैसे खुद को बाहर किया, उन्हीं की जुबानी… लोगों को शायद मैं बहुत घुलने-मिलने वाली लड़की लगती हूं। वो मुझे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में देखते हैं, तो उन्हें लगता है मैं काफी मिलनसार हूं। लेकिन सच यह है कि मैं दिल से इंट्रोवर्ट हूं। जैसे ही काम खत्म होता है, मैं घर लौटना पसंद करती हूं। मुझे अपने कुछ खास लोगों के साथ रहना अच्छा लगता है। ऐसे लोग, जो मुझे सच में जानते हैं और मेरे दिल की बात बिना कहे समझते हैं। जिंदगी में ऊर्जा बहुत मायने रखती है। हम अक्सर ऐसे लोगों की तरफ खिंचते हैं, जिन्होंने हमारी तरह दर्द झेला है, किसी जख्म से गुजरे हैं और अब खुद को संभालकर ठीक करने की कोशिश कर रहे हों। शायद ऐसे ही रिश्तों में हम एक-दूसरे को समझते हैं, साथ बढ़ते हैं और धीरे-धीरे खुद को पूरी तरह महसूस करने लगते हैं।
मेरी परवरिश और उसके बाद होस्टल की जिंदगी ने मुझे बहुत मजबूत बनाया है। मैंने वहां से खुद को संभालना, मुश्किलों का सामना करना और हालात के साथ आगे बढ़ना सीखा। पीछे मुड़कर देखती हूं, तो लगता है जिंदगी ने बहुत सिखाया है। मुझे फिल्मों में काम करते हुए नौ साल हो गए हैं। सच कहूं तो मैंने कभी अवसरों के पीछे भागकर उन्हें हासिल करने की कोशिश नहीं की। मौके खुद मेरे पास आए और मैंने उन्हें अपनाया। मैं इसे नेमत मानती हूं।
मैंने कभी अपनी जीत का जश्न नहीं मनाया। शायद इसलिए भी कि आज तक मैं खुद को पूरी तरह सफल मानने का मतलब नहीं समझ पाई हूं। सफलता आखिर है क्या? मेरे लिए परिवार और मेरे खास लोग ज्यादा जरूरी हैं। जहां तक सफलता की बात है, तो यह सिर्फ मेरी नहीं है। मेरे साथ काम करने वाली पूरी टीम ने इसमें मेहनत की है। मैं अपने लोगों पर बहुत गर्व करती हूं। पर्दे पर चेहरा भले मेरा नजर आता हो, लेकिन उसके पीछे बहुत लोगों का वक्त, भरोसा और मेहनत होती है। मैंने जिंदगी में एक बात हमेशा याद रखी है… कुछ भी हमेशा के लिए नहीं रहता। आज आपके पास सब कुछ हो सकता है और अगले ही दिन हालात बदल सकते हैं। यही सोच मुझे जमीन से जोड़कर रखती है। सफलता मिले तो उसे खुशी के साथ स्वीकार करें, लेकिन घमंड में न बहें। मन में आता है कि जब जिंदगी का आखिरी वक्त आएगा, तब मेरे साथ मेरी दौलत, शोहरत या काम नहीं, मेरे अपने लोग होंगे। वही मायने रखेंगे।
वही करें, जिससे दिल को सच्ची खुशी मिले। जो लोग डरते हैं या किसी मौके को सिर्फ इसलिए छोड़ देते हैं कि पता नहीं आगे क्या होगा, उनसे कहना चाहूंगी… आगे बढ़ें। जो आपका है, उसे पाने की कोशिश करें। हो सकता है, आने वाले वक्त में आप अपने आज के फैसले के लिए खुद को शुक्रिया कहें।
अपनी खुशी, अपने सुकून का भी ख्याल रखें
हर काम में अपना सौ फीसदी दें। मेहनत में कोई कमी न रखें। लेकिन हर किसी को खुश करने का बोझ अपने सिर पर न लें। दूसरों की राय सुनें। अच्छी सलाह से सीखें। अपनी खुशी, अपने सुकून और अपनी सेहत का भी ख्याल रखें।
(तमाम इंटरव्यू में )



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