![]()
हिंदू आख्यान शास्त्रों में कुछ प्राणी भगवान स्वरूप होते हैं तो वहीं कई प्राणी देवताओं के ‘वाहन’ के रूप में जाने जाते हैं। हिंदू धर्म में प्राणियों की कितनी महत्वपूर्ण भूमिका है, इसकी चर्चा हमने पिछले सप्ताह इसी कॉलम में की थी। आज पिछले सप्ताह की चर्चा को आगे बढ़ाते हुए हिंदू आख्यानों में वर्णित कुछ और प्राणियों के बारे में जानेंगे। कामदेव मधुमक्खियों और तितलियों से संबंधित माने जाते हैं, जिनसे उनके धनुष की प्रत्यंचा बनी है। कामदेव का वाहन शुक नामक तोता है। शुक की लाल चोंच अतृप्त इच्छा का प्रतीक है, जिसे हम वर्षा शुरू होने से पहले सूखी धरती में देखते हैं। शुक के हरे पंख उस तृप्त इच्छा के प्रतीक हैं, जो हमें वर्षा के बाद हरी-भरी धरती में दिखाई देती है। दक्षिण भारत की कई देवियां, जैसे कामाक्षी और मीनाक्षी, हाथ में शुक धारण करती हैं। इससे वे सभी को याद दिलाती हैं कि सभी देवियों ने शिव को तपस्वी से गृहस्थ के रूप में सफलतापूर्वक परिवर्तित किया है। नंदी बैल शिव का वाहन है। शिव भौतिक विश्व का त्याग करते हैं। फिर देवी उन्हें सांसारिक विश्व तक खींच लाती हैं। देवी का सौम्य, पोषक रूप गौरी कहलाता है। लेकिन देवी शेर पर सवार काली के रूप में युद्ध करती हैं। उनका सबसे भयानक रूप चंडी का है। चंडी का वाहन वेताल या भूत है। दुर्गा के रूप में देवी शेर या बाघ पर सवार होकर हमारी रक्षा करती हैं। गज धन की देवी लक्ष्मी का वाहन है। क्षीरसागर से उभरा यह गज श्वेत रंग का है। गज शक्ति और समृद्धि का प्रतीक है और स्वर्ग के राजा इंद्र से भी जुड़ा है। वह वर्षा के बादल और जल का प्रतीक है। लक्ष्मी उलूक या उल्लू से भी जुड़ी हैं, जो कलह की देवी और लक्ष्मी की बहन अलक्ष्मी का प्रतीक है। प्रत्येक श्रद्धालु को यह स्मरण कराया जाता है कि उल्लू को महत्व दिए बिना यदि लक्ष्मी का स्वागत करेंगे तो घर में अलक्ष्मी भी प्रवेश करेंगी। लक्ष्मी विष्णु की पत्नी हैं, जो पक्षियों के राजा और सूर्य से जुड़े गरुड़ पर सवार होते हैं। सूर्य को सात श्वेत अश्वों द्वारा खींचे गए रथ पर सवार दिखाया जाता है। उनका पुत्र रेवंत शिकार का देवता है और वह भी श्वेत अश्व पर सवार होता है। राजस्थान-गुजरात के रामदेवजी और आंध्र प्रदेश के मल्लाना जैसे कई लोक देवता श्वेत अश्व पर सवार दिखाए जाते हैं और उनके पीछे शिकारी श्वान होता है। सामान्यतः हिंदू धर्म में श्वान को अशुभ माना जाता है। उन्हें शिव के उग्र रूप भैरव से जोड़ा जाता है, जो श्मशानों में भटकते हैं। श्वान न केवल इधर-उधर पड़ा भोजन खाते हैं, बल्कि हमेशा अपने स्वामी के साथ लगे रहने के कारण आसक्ति के प्रतीक भी हैं। फलस्वरूप, उन्हें तुच्छ माना जाता है। बिल्लों और विशेषतः बिल्लियों को स्वायत्तता का प्रतीक माना जाता है, जो अपने बच्चों की देखभाल करती हैं। इसलिए उन्हें देवी से जोड़ा जाता है, जो एक शेर को वश में करके उस पर सवार होती हैं। वानर-देवता हनुमान हिंदू धर्म में अत्यंत पूजित देवता हैं। वानर चंचल मन का प्रतीक होता है। इसलिए शक्तिशाली हनुमान के माध्यम से हमें समझाया जाता है कि मन को अनुशासित करने से हम कितना कुछ हासिल कर सकते हैं। रामायण में कई वन्य जीवों ने राम की मदद की। जटायु नामक गिद्ध ने रावण से लड़कर सीता के अपहरण को रोकने का प्रयास किया। जटायु के भाई सम्पाति ने अपनी तीक्ष्ण दृष्टि से जाना कि सीता समुद्र के पार स्थित लंका में बंदी बनाई गई थीं। सुग्रीव और उनके वानरों तथा जाम्बवन और अन्य भालुओं ने युद्ध में राम की सहायता की। नन्ही गिलहरी ने भी राम सेतु के निर्माण में मदद की। जब राम ने उसे दुलारा, तब वे उसकी पीठ पर निशान छोड़ गए। शनि देव का वाहन भी एक गिद्ध है, हालांकि कुछ लोग मानते हैं कि वे कौवे पर सवार होते हैं। यद्यपि कौवे मृतकों से जुड़े हैं, लेकिन मृत्यु के देवता यमदेव का वाहन महिष है।
Source link
रसरंग में मायथोलॉजी:हिंदू आख्यानों में वर्णित प्राणियों से मिलता है जीवन का संदेश
