Headlines

RSS Alok Kumar Statement | Forgotten History & 1971 War Victory Legacy


रविवार को प्रताप गौरव केन्द्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ के पद्मिनी सभागार में दिवेर विजय महोत्सव के तहत आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि इतिहास के जिन पन्नों को दबा दिया गया, उन्हें प्रमाण के साथ समाज के सामने लाना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सह सरकार्यवाह आलोक कुमार ने इतिहास के उन प्रसंगों और शौर्य को जन-जन तक पहुंचाने की जरूरत बताई, जिन्हें वे विस्मृत मानते हैं। उन्होंने 1971 के युद्ध में भारत की जीत का जिक्र करते हुए कहा कि इसे भी इतिहास की किताबों में

.

आलोक कुमार ने कहा कि किसी भी देश का गौरव केवल आज की उपलब्धियों से नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों के बलिदान और शौर्य को याद रखने से बनता है।

RSS के सह सरकार्यवाह आलोक कुमार रविवार को प्रताप गौरव केन्द्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ के पद्मिनी सभागार में दिवेर विजय महोत्सव के तहत आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि इतिहास के जिन पन्नों को दबा दिया गया, उन्हें प्रमाण के साथ समाज के सामने लाना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।

राष्ट्रहित में किया गया छोटा प्रयास भी ला सकता है बड़ा बदलाव

आलोक कुमार ने 1971 के भारत-पाक युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय सेना ने तब 90 हजार पाकिस्तानी सैनिकों से आत्मसमर्पण कराया था। इतनी बड़ी सैन्य विजय के बाद भी इस गौरवशाली गाथा को देश के सामान्य विमर्श और स्कूली पाठ्यक्रमों में वह स्थान नहीं मिला, जो मिलना चाहिए था। पूर्व सैनिक सेवा परिषद के लंबे संघर्ष के बाद आज इसे विजय दिवस के रूप में पहचान मिली है। यह दिखाता है कि राष्ट्रहित में किया गया छोटा प्रयास भी बड़ा बदलाव ला सकता है।

आलोक कुमार ने 1971 के भारत-पाक युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय सेना ने तब 90 हजार पाकिस्तानी सैनिकों से आत्मसमर्पण कराया था।

आलोक कुमार ने 1971 के भारत-पाक युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय सेना ने तब 90 हजार पाकिस्तानी सैनिकों से आत्मसमर्पण कराया था।

महाराणा प्रताप और अहिल्याबाई होल्कर का योगदान

आलोक कुमार ने कहा कि दिवेर का युद्ध भारतीय इतिहास का वह गौरवशाली अध्याय है, जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना बेहद जरूरी है। महाराणा प्रताप का संघर्ष केवल मेवाड़ के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के स्वाभिमान के लिए था।

इसी तरह देवी अहिल्याबाई होल्कर ने अपने संसाधनों का उपयोग देश के 40 से अधिक प्रमुख तीर्थों के पुनरुद्धार और जनकल्याण के लिए किया। उनके इस योगदान को भी व्यापक रूप से सामने लाने की आवश्यकता है।

1857 की क्रांति केवल ‘सैनिक विद्रोह’ नहीं था

आलोक कुमार ने कहा कि अंग्रेजों ने अपने दस्तावेजों में 1857 के संघर्ष को केवल एक ‘सैनिक विद्रोह’ के रूप में पेश किया। जबकि सच यह है कि इसके पीछे देश की जनता का बड़ा आक्रोश और आजादी की भावना थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में पूर्वोत्तर भारत और जनजातीय समाज के योगदान को भी इतिहास में सही जगह मिलनी चाहिए।

होटलों से नहीं, शौर्य से है उदयपुर की असली पहचान

उन्होंने कहा कि उदयपुर में आज बड़ी-बड़ी होटलें और पर्यटन स्थल है, लेकिन इसकी असली पहचान महाराणा प्रताप के शौर्य और यहां की संस्कृति से है। प्रताप गौरव केन्द्र इस इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने का बेहतरीन काम कर रहा है।

आलोक कुमार ने कहा कि उदयपुर में आज बड़ी-बड़ी होटलें और पर्यटन स्थल हैं, लेकिन इसकी असली पहचान महाराणा प्रताप के शौर्य और यहां की संस्कृति से है।

आलोक कुमार ने कहा कि उदयपुर में आज बड़ी-बड़ी होटलें और पर्यटन स्थल हैं, लेकिन इसकी असली पहचान महाराणा प्रताप के शौर्य और यहां की संस्कृति से है।

फतहसागर के बाद आज सेक्टर-4 में नुक्कड़ नाटक

निदेशक अनुराग सक्सेना ने बताया कि दिवेर विजय पर आधारित नुक्कड़ नाटक ‘दिवेर का रणघोष’ का मंचन रविवार को फतहसागर के झरने वाले छोर पर किया गया। सोमवार शाम 5 से 6 बजे के बीच इस नाटक का मंचन हिरणमगरी सेक्टर-4 चौराहे पर किया जाएगा।

26 सितंबर तक राष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला, आज विशेष सत्र

कार्यशाला संयोजक प्रो. रामसिंह भाटी ने बताया कि प्रताप गौरव केन्द्र में 19 से 26 सितंबर 2026 तक राष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इसका विषय “मेवाड़ का सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक परिदृश्य” है। यह आयोजन उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र (पटियाला) और प्रताप गौरव केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में संस्कार भारती उदयपुर के सहयोग से हो रहा है।

इसके तहत 21 सितंबर को सुबह 10:00 से 11:30 बजे एक विशेष सत्र होगा। इसमें जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध चित्रकार अंकुश कुमार लाइव आर्ट डिमॉन्स्ट्रेशन (लाइव पेंटिंग) देंगे और कला संवाद करेंगे।

मुख्य कार्यक्रम में ये अतिथि रहे मौजूद

पद्मिनी सभागार में रविवार को वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के अध्यक्ष प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा, दिवेर विजय महोत्सव के संयोजक रमन सूद, सह संयोजक हरीश राजानी डॉ. देवेन्द्र श्रीमाली और डॉ. विवेक भटनागर मौजूद रहे।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *