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पंजाबी में होंगे पंजाब के दो कानून…:सरकारी कामकाज में अंग्रेजी के भारी-भरकम शब्दों से मिलेगी मुक्ति



जवानों, शिक्षकों और कर्मचारियों को अब सरकारी, प्रशासनिक और अदालती कामकाज के लिए अंग्रेजी के भारी भरकम शब्दों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। पंजाब सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ लीगल एंड लेजिस्लेटिव अफेयर्स ने नोटिफिकेशन जारी कर दो प्रमुख कानूनों 79 साल पुराने ‘पंजाब होम गार्ड्स एक्ट’ 1947 और ‘67 साल पुराने पंजाब लोकल अथॉरिटीज (एडेड स्कूल्स) एक्ट’ 1959 के पंजाबी अनुवाद को आधिकारिक कानूनी मान्यता दे दी है। कुल 13 पन्नों में जारी यह ऑथॉरिटेटिव टेक्स्ट (अधिकृत पाठ) अब जनता, अदालतों और विभागों के लिए पूरी प्रामाणिकता के साथ उपलब्ध होगा। इसके मोहर लगने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली मजबूत होगी। फैसले से होम गार्ड्स के हजारों जवानों, एडेड स्कूलों के शिक्षकों व कर्मचारियों, कानूनी विशेषज्ञों और आम नागरिकों को सीधा फायदा होगा। उन्हें अपनी बात रखने या कानून को समझने के लिए आसानी होगी। उच्च शिक्षा और भाषा विभाग ने इन कानूनों के पंजाबी अनुवाद और इसके उपयोग का नीतिगत फैसला लिया। अंग्रेजों के दौर से चली आ रही अंग्रेजी की निर्भरता होगी खत्म : अंग्रेजों के जमाने का 1947 का होम गार्ड्स एक्ट और 1959 का एडेड स्कूल एक्ट दशकों से लागू तो थे, लेकिन इनकी कानूनी बारीकियों को समझने के लिए हमेशा इंग्लिश टेक्स्ट का ही सहारा लेना पड़ता था। पंजाब ऑफिशियल लैंग्वेज एक्ट, 1967 के सेक्शन 6-ए के तहत पंजाब सरकार ने अब इन दोनों कानूनों के पंजाबी अनुवाद को गजट में पब्लिश कर दिया है। ऐसे में अब पंजाबी में लिखा कानून सिर्फ एक मामूली ट्रांसलेशन नहीं रहेगा, बल्कि इसे कानूनी तौर पर मूल कानून जितना ही ऑथेंटिक और ऑथॉरिटेटिव दर्जा हासिल होगा। पहले क्या था : अब तक ये दोनों कानून लागू तो थे, लेकिन इनका कोई गजट नोटिफाइड ऑथॉरिटेटिव पंजाबी वर्जन नहीं था। कानूनी या अदालती संदर्भों के लिए केवल इंग्लिश टेक्स्ट ही मान्य होता था, जिससे पंजाबी में कामकाज करने वालों को काफी परेशानी आती थी। अब क्या होगा: सरकार के इस फैसले से गजट में पब्लिश हुआ पंजाबी टेक्स्ट अब हर सरकारी रिकॉर्ड, अदालत और विभाग में आधिकारिक माना जाएगा। हालांकि, सरकार ने मूल कानून की धाराओं, सजा, अधिकारों या भर्ती नियमों में कोई बदलाव नहीं किया है। किसे होगा फायदा: फैसले से होम गार्ड्स के हजारों जवानों, एडेड स्कूलों के शिक्षकों व कर्मचारियों, कानूनी विशेषज्ञों और आम नागरिकों को सीधा फायदा होगा। अब उन्हें अपनी बात रखने या कानून को समझने के लिए अंग्रेजी के भारी-भरकम शब्दों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, बल्कि वे अपनी मातृभाषा में उपलब्ध ऑथॉरिटेटिव टेक्स्ट का इस्तेमाल कर सकेंगे।



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