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छत्तीसगढ़ में ‘एग्रीस्टैक किसान रजिस्ट्री’ के जरिए पुश्तैनी और संयुक्त जमीन खातों की वास्तविक स्थिति सामने आ रही है। प्रदेश में पहले 41,06,694 किसानों का रिकॉर्ड दर्ज था। इसी आधार पर पंजीयन का लक्ष्य रखा था। संयुक्त खाते के प्रत्येक हिस्सेदार (सह-खातेदार) का अलग पंजीयन होने से 17 जिलों में किसानों की संख्या तय लक्ष्य से 3,89,617 अधिक हो गई है। धान बिक्री व योजनाओं के लाभ के लिए पंजीयन अनिवार्य है, जिसकी अंतिम तिथि 31 अक्टूबर निर्धारित है। संयुक्त परिवारों में पुश्तैनी जमीन के एक ही खाते में कई सदस्यों के नाम होते हैं। खेती अलग-अलग करने पर भी अब तक सरकारी सिस्टम में अलग पहचान नहीं थी। ये नया: सह-खातेदारों की डिजिटल पहचान; रजिस्ट्रेशन नहीं, तो उपज खरीदी नहीं एग्रीस्टैक में सह-खातेदारों के पंजीयन से संयुक्त, पुश्तैनी जमीनों में प्रत्येक हिस्सेदार की अलग डिजिटल पहचान तैयार होगी। इससे स्पष्ट हो सकेगा कि किस खाते और खसरे में कितने हिस्सेदार हैं। एकीकृत डिजिटल डेटाबेस बनने से दोहरे पंजीयन और सरकारी योजनाओं में एक ही जमीन के आधार पर लाभ लेने जैसी गड़बड़ियों की पहचान हो सकेगी। एक और फायदा ये होगा कि सह-खातेदार रिकॉर्ड पर आ सकेगा। इससे खेती की उपज बेचने में उसकी सहमति का महत्व होगा। यानी पारिवारिक मुखिया को अपने भाई, बहन या अन्य सह-खातेदार को विश्वास में लेना होगा। अगर किसी सह-खातेदार का पंजीयन नहीं होगा, तो उसके हिस्से वाली जमीन की उपज सरकारी खरीद में शामिल नहीं होगी। सह खातेदार यदि नाबालिग है तो उसका पंजीयन नहीं होगा। सह खातेदार के नाबालिग होनेपर उसके संरक्षक का पंजीयन होगा। क्या है एग्रीस्टैक?
ये किसानों का डिजिटल डेटाबेस है। किसान की पहचान को उसके जमीन के रिकॉर्ड से जोड़कर यूनिक फार्मर आईडी बनाई जाती है। सरकारी कृषि योजनाओं का लाभ सही पात्र तक पहुंचाने में मदद मिलती है। विवाद हो तो किसान धान बेचने से वंचित न हो सह-खातेदारों का पंजीयन अच्छी पहल है। इससे उनमें उत्साह भी है। लेकिन सह-खातेदारों के बीच किसी तरह का विवाद होने की स्थिति में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसान धान बेचने से वंचित न हो। -माधो सिंह ठाकुर, प्रदेश अध्यक्ष, भारतीय किसान संघ, छत्तीसगढ़ शीर्ष लंबित जिले
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एग्रीस्टैक में ‘रजिस्ट्री’ के बाद बदलाव:जमीन में जितने सह-खातेदार, उतने किसानों का धान बेचने के लिए होगा पंजीयन
