Headlines

किताब पढ़ने से घटता है तनाव:सेहत दुरुस्त रखने में मददगार हैं किताबें; फिक्शन पढ़ने से दूसरों के नजरिए समझने में मिलती है मदद




मोबाइल स्क्रीन के युग में दुनिया भर में लोगों का किताबों से यह रिश्ता कमजोर हो रहा है। लेकिन साइकोलॉजिकल मेडिसिन में प्रकाशित एक नई रिसर्च से पता चलता है कि मनोरंजन के लिए मनपसंद किताब पढ़ने से आपके दिमाग और सेहत पर फायदेमंद असर होते हैं। जब हम अपनी पसंद की कहानी में पूरी तरह डूब जाते हैं, तो कुछ समय के लिए दुनिया के दूसरे तनावों से ध्यान हट जाता है। इसके अलावा दिमाग में कई ऐसे फायदेमंद हॉर्मोन की रिसाव होता है जो सेहत दुरुस्त रखने में मददगार होते हैं। किताब, खासकर सामाजिक रिश्तों और किरदारों वाली फिक्शन कहानियां पढ़ने से हमें दूसरे व्यक्ति के नजरिये से चीजों को देखने में मदद मिलती है। न्यूरोइमेजिंग स्टडीज में ऐसे हिस्सों की सक्रियता देखी गई है, जो सामाजिक समझ और दूसरे के दृष्टिकोण को समझने से जुड़े हैं। कई लोगों ने बताया कि पढ़ने के बाद उन्हें कम अकेलापन महसूस हुआ और दूसरों से जुड़ाव और सहानुभूति में बढ़ोतरी हुई। वैज्ञानिकों का कहना है कि किताब में पूरी तरह डूबने से फोकस बढ़ता है। इससे कुछ समय के लिए व्यक्ति अपनी परेशानियों के बारे में लगातार सोचने से दूर हो सकता है। स्टडी से जुड़े वैज्ञानिकों के मुताबिक किताब पढ़ने के लिए किसी खास उम्र या किसी खास तरह की किताब की जरूरत नहीं है। लंबे समय बाद पढ़ना शुरू कर रहे हैं तो भी सीधे कोई भारी-भरकम क्लासिक नॉवेल उठाने की जरूरत नहीं। विशेषज्ञों की सलाह है कि शुरुआत अपनी दिलचस्पी या शौक से जुड़ी किताब या मैगजीन से की जा सकती है।ताइवान में बुजुर्गों पर की गई एक स्टडी में 64 साल से ज्यादा उम्र के लोगों पर 14 वर्षों तक नजर रखी गई। इस स्टडी में पाया गयाकि जो लोग सप्ताह में केवल एक बार पढ़ते थे, उनमें भी बुढ़ापे में होने वाली भूलने की बीमारी जैसी दिमागी परेशानियों का जोखिम काफी कम हो गया। सबसे खास बात ये है कि इसका उनकी पढ़ाई या डिग्री से कोई संबंध नहीं था। बचपन से लेकर बुढ़ापे तक किताबें पढ़ना हमेशा फायदेमंद रिसर्च की लेखिका और ब्रिटेन की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में क्लिनिकल न्यूरोसाइकोलॉजी की एमेरिटस प्रोफेसर बारबरा सहाकियन कहती हैं कि पढ़ने का प्रभाव बहुत कम उम्र से ही शुरू हो जाता है। उन्होंने अमेरिका में करीब 10,000 बच्चों पर की गई एक स्टडी में पाया कि जिन बच्चों ने कम उम्र में ही शौकिया तौर पर पढ़ना शुरू कर दिया था, बड़े होने पर उन्हें दूसरों से जुड़ने और समाज में आगे बढ़ने में अन्य बच्चों की तुलना में ज्यादा आसानी हुई। पुस्तक पढ़ने वाले बच्चों ने स्क्रीन पर कम समय बिताया, ज्यादा और बेहतर नींद ली और स्कूल में अच्छा प्रदर्शन किया। लेकिन बारबरा का कहना है कि मनोरंजन के लिए पढ़ना बचपन तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। बड़े होने पर और खासकर बुढ़ापे के दौरान भी पुस्तकें पढ़ते रहने से कई तरह के फायदे मिलते हैं।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *