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राजधानी शिमला के समिट्री और ढींगू बावड़ी क्षेत्र में टनल निर्माण के कारण मकानों में आई दरारों का मामला अब सरकार तक पहुंच गया है। प्रभावित लोग स्थानीय पार्षद विनय शर्मा की अगुआई में मंगलवार को पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह से मिले और अपने घरों को टनल के कारण पैदा हुए खतरे से अवगत कराया। अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि टनल निर्माण से 13 से 14 इमारतों में बड़ी दरारें आ चुकी हैं, ये मकान कभी भी गिर सकते हैं। उन्होंने कहा कि टनल का निर्माण कार्य सब-स्टैंडर्ड किया जा रहा है। इससे पहले भी एक पांच से छह मंजिला मकान गिर चुका है। इसी तरह भट्टाकुफर चौक पर सड़क में बने गड्डे में एक बच्ची गिर चुकी है। फिर भी एनएचएआई अधिकारी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे। अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि इसी मामले में जल्द एक प्रतिनिधिमंडल सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू से भी मुलाकात करेगा। मंत्री ने सुझाव दिया कि इस मामले की जांच के लिए रिटायर जज की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की जानी चाहिए, ताकि निष्पक्ष जांच हो और नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जा सके। सीएम से मिलेंगे प्रभावित लोग: अनिरुद्ध इसी मामले में डीसी स्थिति का जायजा लेने के बाद निर्माण कार्य पर रोक लगा चुके है। स्थानीय पार्षद पार्षद विनय ने बताया कि पंचायतीराज मंत्री ने डीसी शिमला को निर्माण में इस्तेमाल हो रही मशीनरी को सीज करने के निर्देश दिए हैं। प्रभावित लोगों का आरोप है कि निर्माण कंपनी बड़ी मशीनरी का इस्तेमाल कर टनल का काम कर रही है। इससे जमीन के भीतर कंपन हो रहा है और आसपास के मकानों में निरंतर दरारें आ रही है। कई घरों की दीवारों, फर्श और अन्य हिस्सों में दरारें आने की शिकायत है। लोगों का कहना है कि वे इस स्थिति को लेकर दहशत में हैं और रात में भी घरों में सोने से डर रहे हैं। पुराने सर्वे के आधार पर काम करने की मांग प्रभावित लोगों ने मंत्री के सामने टनल निर्माण को लेकर कई मांगें रखीं। उनका कहना है कि यदि संभव हो तो फोरलेन का निर्माण पहले किए गए सर्वे के आधार पर तय एलाइनमेंट से किया जाए। यदि मौजूदा एलाइनमेंट में निर्माण करना जरूरी है तो वैज्ञानिक तरीके से कटिंग और अन्य निर्माण कार्य किए जाएं, ताकि आसपास के मकानों को नुकसान न पहुंचे। लोगों की मांग है कि टनल के ऊपर स्थित सभी मकानों की स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी जांच कराई जाए। निर्माण शुरू करने से पहले मकान मालिकों को इसकी रिपोर्ट दी जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भवन निर्माण कार्य के लिए सुरक्षित हैं। नुकसान हुआ तो निर्माण एजेंसी की जिम्मेदारी तय करने की मांग प्रभावित लोगों ने यह भी मांग रखी है कि यदि टनल निर्माण के दौरान किसी मकान को नुकसान पहुंचता है तो इसकी जिम्मेदारी निर्माण एजेंसी की तय की जाए। लोगों का कहना है कि उनकी उम्रभर की कमाई मकानों में लगी है और किसी भी तकनीकी लापरवाही की कीमत उन्हें नहीं चुकानी चाहिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि टनल के ऊपर और आसपास कई मकान बने हुए हैं। इसलिए केवल मौजूदा दरारों वाले घरों की निगरानी पर्याप्त नहीं है। पूरे क्षेत्र का तकनीकी और भूवैज्ञानिक सर्वे कराया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में संभावित नुकसान का भी आकलन हो सके।
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शिमला में टनल निर्माण से 13 मकानों में दरारें:मंत्री अनिरुद्ध से मिले प्रभावित लोग; DC को कंपनी की मशीनरी सीज करने को कहा
