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रांची-खूंटी सहित 16 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट:बंगाल की खाड़ी में बने लो प्रेशर एरिया का झारखंड में दिख रहा असर




बंगाल की खाड़ी में बना लो प्रेशर एरिया उत्तरी आंध्रप्रदेश और दक्षिण ओडिशा तट को पार कर गया है। इससे असर झारखंड में दिख रहा है। बुधवार को पूरे राज्य में बारिश हो रही है। पिछले 24 घंटे में सबसे ज्यादा 50.2 एमएम बारिश चांडिल में हुई तो रांची में 35 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई। मौसम विभाग ने रांची, गुमला, खूंटी सहित 16 जिलों में गुरुवार को भारी बारिश होने की संभावना जताई है। पांच जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट और 11 जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 40 से 50 किमी की रफ्तार से हवा चलने और वज्रपात की भी संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के मुताबिक 27 सितंबर तक राज्यभर में बादल छाए रहेंगे। बारिश भी होगी। इससे तापमान में तीन से पांच डिग्री तक की गिरावट आने की संभावना है। रांची में सामान्य से 9% ज्यादा बारिश रांची में अब तक 1084.9 एमएम बारिश हो चुकी है, जो सामान्य बारिश 995.9 से नौ प्रतिशत ज्यादा है। वहीं राज्य में 900.1 एमएम बारिश हुई है, जो सामान्य बारिश 977.3 से आठ प्रतिशत कम है। कहां कितनी बारिश वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है आज इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट: रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा और पश्चिम सिंहभूम में भारी बारिश होने की संभावना है। यहां यलो अलर्ट: पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला खरसावां, लोहरदगा, रामगढ़, हजारीबाग, रामगढ़, कोडरमा, बोकारो, चतरा, पलामू और गढ़वा। आगे क्या… 25 सितंबर केा हजारीबाग, कोडरमा, गिरिडीह, चतरा, पलामू ओर गढ़वा में भारी बारिश होने की संभावना है। 25 सितंबर के बाद बारिश की तीव्रता कम होगी, लेकिन 26-27 सितंबर को भी हल्की व मध्यम बारिश हो सकती है। वज्रपात की भी संभावना है। बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम से हो रही बारिश बंगाल की खाड़ी में बने लो प्रेशर सिस्टम के प्रभाव से झारखंड में नमी बढ़ने के साथ मानसूनी गतिविधियां तेज हुई है। 24 सितंबर को इसका असर सबसे ज्यादा दिखेगा। रांची समेत दक्षिणी व मध्य झारखंड में भारी बारिश होगी। 25 सितंबर से बारिश की तीव्रता घटेगी, लेकिन अगले चार दिनों तक छिटपुट बारिश व बादल छाए रहेंगे। अभिषेक आनंद, मौसम वैज्ञानिक धान को फायदा, उड़द-मक्का को नुकसान बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. रमेश कुमार ने कहा​ कि इस बारिश से धान की फसल को फायदा होगा। कई क्षेत्र में धान की बालियां फूट रही हैं। ऐसे में आगे बारिश न भी हो तो धान की पैदावार पर असर नहीं पड़ेगा। लेकिन उड़द-मक्का की फसल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि उपरी भूमि पर जो फसल लगाई गई है, वहां जलजमाव न होने दें। इस बारिश का असर लत्तर वाली सब्जियों पर भी दिख सकता है। डॉ. रमेश कुमार, वैज्ञानिक, बीएयू, कांके



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