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गोरखपुर में शुक्रवार को ऑल इंडिया उलेमा काउंसिल ने अपनी चार मांगों को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने अपनी समस्याएं रखीं और बाद में राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। संगठन का कहना है कि मुस्लिम समाज की कई पिछड़ी जातियों को आज भी आरक्षण का पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा है। काउंसिल की मुख्य मांग है कि SC (अनुसूचित जाति) आरक्षण में जो धार्मिक रोक लगी हुई है, उसे हटाया जाए। प्रदेश युवा अध्यक्ष नूरुल हुदा ने कहा कि अभी मुस्लिम और ईसाई दलित जातियां SC का लाभ नहीं ले पा रही हैं, जबकि उनकी हालत भी बाकी दलितों जैसी ही है। उन्होंने कहा कि सभी को बराबर हक मिलना चाहिए। OBC में शामिल करने की मांग नूरुल हुदा ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 341 के कारण यह समस्या बनी हुई है। उन्होंने मांग की कि इस नियम में बदलाव कर उन सभी जातियों को SC का दर्जा दिया जाए, जो वास्तव में पिछड़ी हैं, चाहे उनका धर्म कोई भी हो। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक SC में शामिल करने का फैसला नहीं होता, तब तक इन जातियों को OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) में शामिल कर आरक्षण दिया जाए, ताकि उन्हें तुरंत कुछ राहत मिल सके। अन्य अहम मांगें भी उठाईं उलेमा काउंसिल ने अरजाल आयोग बनाने की मांग की, जिससे सबसे पिछड़े वर्गों की पहचान हो सके। साथ ही 27% OBC आरक्षण में से 8.44% हिस्सा मुस्लिमों के लिए तय करने और कर्पूरी ठाकुर फार्मूला लागू करने की भी मांग की गई। नूरुल हुदा ने कहा कि मुस्लिम समाज में पवरिया, हलालखोर, माली, गद्दी, फकीर, जोगी, मोची और नाई जैसी कई जातियां आज भी सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर हैं। इसके बावजूद उन्हें सरकारी योजनाओं और आरक्षण का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। सरकार से कार्रवाई की अपील काउंसिल ने केंद्र सरकार से मांग की कि इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाए और जरूरी फैसले लिए जाएं, ताकि सभी वर्गों को बराबरी का अधिकार मिल सके।
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गोरखपुर में उलेमा काउंसिल ने किया प्रदर्शन:SC आरक्षण से धार्मिक रोक हटाने की मांग, बोले-धर्म के आधार पर न हो भेदभाव
