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हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के धर्मशाला के खनियारा में सरकारी जमीन को निजी नाम करने और बेचने के मामले में विजिलेंस व राजस्व विभाग ने कार्रवाई की है। स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो (SVACB) धर्मशाला में FIR दर्ज होने के बाद तहसीलदार ने 34 इंतकालों की समीक्षा शुरू की है। अनियमितताएं मिलने पर इन्हें रद्द किया जा सकता है। विजिलेंस जांच के अनुसार, यह फर्जीवाड़ा 1 जनवरी 2019 से 31 दिसंबर 2021 के बीच हुआ। खनियारा के महाल चकबन, महाल मोहली लहड़ा दी और महाल ठेहड़ में सरकारी जमीन पहले काश्तकारों के नाम दर्ज कराई गई। फिर गिफ्ट डीड व सेल डीड से इसे दूसरों को बेचा गया। आरोप है कि इस प्रक्रिया में राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर हुआ। 42 लोगों को आरोपी बनाया FIR में जमीन खरीदने और बेचने वाले कुल 42 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें राजनीतिक दलों से जुड़े लोग और रसूखदार परिवारों के परिजन व करीबी शामिल हैं। आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। विजिलेंस ने मामले में धोखाधड़ी, दस्तावेजों की जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। जांच में संबंधित राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका सामने आने पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत आवश्यक मंजूरी लेकर कार्रवाई की जा सकती है। जमीन वापस सरकारी खाते में दर्ज हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म्स एक्ट की धारा 104 के उल्लंघन के आरोपों की भी जांच हो रही है। इंतकालों की समीक्षा पूरी होने के बाद सक्षम राजस्व प्राधिकारी नियमों के अनुसार फैसला लेंगे। इससे संबंधित सेल डीड और गिफ्ट डीड की वैधता पर भी असर पड़ सकता है। अभी सभी दस्तावेजों की जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।
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धर्मशाला में 34 इंतकाल रद्द करने की प्रक्रिया शुरू:सरकारी जमीन निजी नाम कराने का मामला, 42 लोगों पर FIR
