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सोलन जिले का कसौली, जो कभी देवदार और चीड़ के घने जंगलों, शांत माहौल और प्राकृतिक सुंदरता के लिए पहचाना जाता था, अब अपनी पहचान खो रहा है। यहां तेजी से निर्माण बढ़ रहा है। कसौली और आसपास के इलाकों में लगातार हो रहे निर्माण से स्थानीय लोग चिंतित हैं। उनका कहना है कि पहाड़ी क्षेत्र में नए भवन और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने से प्राकृतिक हरियाली लगातार कम हो रही है। स्थानीय लोगों के नाम से जमीन खरीद रहे बाहरी लोग स्थानीय निवासी हितेश और पीयूष ने आरोप लगाया है कि बाहरी लोग स्थानीय लोगों के नाम पर जमीन खरीदकर मकान बनवा रहे हैं। बाद में इन मकानों का इस्तेमाल व्यावसायिक कामों के लिए हो रहा है। उनका कहना है कि संबंधित विभागों को ऐसे मामलों में निर्माण की अनुमति और जमीन के असली उपयोग की जांच करनी चाहिए। बिना अनुमति या नियमों के खिलाफ हो रही गतिविधियों पर समय पर कार्रवाई होनी चाहिए। निर्माण गतिविधियां बढ़ने से हरियाली को नुकसान की आशंका कसौली आने वाले पर्यटकों के लिए यहां के जंगल, पहाड़ और प्राकृतिक माहौल सबसे बड़ा आकर्षण हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर इसी तरह निर्माण बढ़ता रहा और पेड़ों व हरियाली को नुकसान पहुंचता रहा, तो आने वाले सालों में कसौली की प्राकृतिक सुंदरता पूरी तरह बदल सकती है। कसौली की पहचान कंक्रीट के भवनों से नहीं, बल्कि उसकी हरियाली और पहाड़ों से है। पर्यटन सीजन के दौरान कसौली में वाहनों की बढ़ती संख्या, पार्किंग की कमी और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं पर पहले से ही दबाव रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर क्षेत्र की क्षमता का आकलन किए बिना लगातार नए निर्माण होते रहे, तो आने वाले समय में नागरिक सुविधाओं पर दबाव और बढ़ जाएगा। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने 2018 में कसौली प्लानिंग एरिया में नए निर्माण को लेकर निर्देश दिए थे। इसमें विकास योजना 2021 के हिसाब से निर्माण करने और निजी भवनों के लिए आमतौर पर दो मंजिल और एक एटिक की सीमा तय करने जैसे कई पर्यावरण सुरक्षा निर्देश शामिल थे। सरकार और एनजीटी से व्यावसायिक निर्माण पर रोक की मांग स्थानीय लोगों ने प्रदेश सरकार और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) से मांग की है कि कसौली की पर्यावरणीय संवेदनशीलता को देखते हुए नए व्यावसायिक निर्माण पर तत्काल सख्ती की जाए। अवैध या नियमों के विपरीत निर्माण की जांच कर कार्रवाई हो और पेड़ों एवं प्राकृतिक हरियाली को बचाने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए। स्थानीय हितेश व पीयूष का कहना है कि विकास के नाम पर अगर पहाड़ और हरियाली ही खत्म हो गई तो कसौली में बचाने के लिए कुछ नहीं रहेगा। अब जरूरत ऐसे विकास की है, जिसमें पर्यटन भी चले और कसौली का पर्यावरण भी सुरक्षित रहे। कसौली प्लानिंग एरिया में नियमों के अनुसार हो रहा निर्माण : प्लानिंग विभाग वहीं, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के सहायक अधिकारी कसौली राज मोहन सिंह ने बताया कि कसौली प्लानिंग एरिया में निर्माण कार्य टीसीपी के निर्धारित नियमों के अनुसार ही किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कसौली से सटे कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जो वर्तमान में टीसीपी के दायरे में नहीं आते। इन क्षेत्रों में अपेक्षाकृत अधिक निर्माण गतिविधियां देखने को मिल रही हैं और वहीं से निर्माण से जुड़ी समस्याएं सामने आ रही हैं। राज मोहन सिंह ने कहा कि भविष्य में कसौली से लगते ऐसे क्षेत्रों में भी टीसीपी के नियम लागू किए जाने की आवश्यकता है, ताकि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों और नियमों के अनुरूप हो सकें। उन्होंने कहा कि नियमों के दायरे में निर्माण होने से क्षेत्र के सुनियोजित विकास के साथ-साथ प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरण संरक्षण को भी बेहतर तरीके से सुनिश्चित किया जा सकेगा। निर्माण कराने से पहले अनुमति लेना जरूरी उन्होंने बताया कि सरकार की अधिसूचना के अनुसार 1000 वर्ग मीटर से अधिक प्लॉट एरिया पर निर्माण के लिए विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य है। यदि कोई व्यक्ति निर्धारित नियमों के अनुरूप निर्माण कार्य नहीं करता है तो विभाग की ओर से नियमानुसार उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि निर्माण शुरू करने से पहले संबंधित नियमों और अनुमति की प्रक्रिया की जानकारी लें, ताकि बाद में किसी तरह की कार्रवाई या परेशानी का सामना न करना पड़े।
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कसौली में बढ़ रही निर्माण गतिविधियां:स्थानीय लोग बोले- प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ रहा; NGT के निर्देश भी नहीं माने जा रहे
