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हिमाचल किसान सभा मंडी जिला का 17वां सम्मेलन सौली खड्ड मंडी में आयोजित किया गया। सम्मेलन का उद्घाटन किसान सभा के राज्य महासचिव एवं पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने किया। सम्मेलन की अध्यक्षता कुशाल भारद्वाज, महेंद्र राणा, जगमेल ठाकुर, प्रेम चौधरी और रीता देवी ने संयुक्त रूप से की। राकेश सिंघा ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकारों की नीतियों के कारण किसानों को लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। किसान-बागवानों को मिलने वाली सहायता कम हो रही है और खेती की लागत बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की किसान-बागवान विरोधी नीतियों के चलते हिमाचल में किसानी करना घाटे का व्यवसाय बन गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की अधिकांश भूमि वन क्षेत्र में आती है। किसान सभा की मांग है कि गरीब किसानों को पांच बीघा जमीन उपलब्ध करवाई जाए और लंबे समय से उनके कब्जे में चली आ रही भूमि को उनके नाम किया जाए। उन्होंने फोरलेन, राष्ट्रीय राजमार्गों और विभिन्न परियोजनाओं के लिए अधिगृहित जमीन का उचित मुआवजा देने तथा परियोजनाओं में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग भी उठाई। राकेश सिंघा ने बंदरों, जंगली जानवरों और आवारा पशुओं की समस्या के स्थायी समाधान के लिए ठोस नीति बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन, पेयजल और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के मामले में भी सरकार को गंभीरता से काम करना चाहिए। निजीकरण के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा जिला प्रधान कुशाल भारद्वाज ने कहा कि स्मार्ट बिजली मीटर लगाने की प्रक्रिया और बिजली क्षेत्र के निजीकरण के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। इसके अलावा दूध उत्पादन बढ़ाने और किसानों को दूध की खरीद के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए भी किसान सभा काम करेगी। राज्य सम्मेलन के लिए 30 प्रतिनिधियों का चयन सम्मेलन में 13-14 अक्टूबर को रामपुर में होने वाले राज्य सम्मेलन के लिए 30 प्रतिनिधियों का चयन किया गया। साथ ही 31 सदस्यीय नई जिला कमेटी का गठन किया गया। इसमें जोगिंदरनगर के कुशाल भारद्वाज को दोबारा जिला प्रधान, धर्मपुर के भूपेंद्र सिंह को सचिव और बल्ह के जोगिंदर वालिया को कोषाध्यक्ष चुना गया।
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पूर्व MLA सिंघा बोले-हिमाचल में खेती घाटे का सौदा:किसान विरोधी नीतियों पर सरकार को घेरा; कहा-एक्वायर जमीन का नहीं मिला मुआवजा
