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- Kidney Test Normal Range; KFT Report Parameters Serum Creatinine EGFR | CKD Signs
1 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
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पिछले दिनों स्वास्थ्य और परिवार कल्याण से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) को लेकर एक सिफारिश की। इसमें 20 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों को हर 6 महीने में KFT कराने की बात कही गई है। यह सुझाव नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज (NP-NCD) के तहत दिया गया है।
यह सिफारिश ऐसे समय में आई है, जब देश में किडनी डिजीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। मेडिकल जर्नल ‘द लैंसेट’ में पब्लिश एक ग्लोबल स्टडी के मुताबिक, भारत में हार्ट डिजीज के बाद क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) दूसरी सबसे बड़ी बीमारी बन चुकी है।
चिंता की बात यह है कि शुरुआती चरण में अक्सर किडनी डिजीज के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। ऐसे में लोगों को इसका पता तब चलता है, जब किडनी काफी हद तक खराब हो चुकी होती है। यही वजह है कि समिति ने इलाज से ज्यादा समय रहते पहचान और बचाव पर जोर दिया है।
इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में KFT यानी किडनी फंक्शन टेस्ट के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- KFT टेस्ट से किडनी के बारे में क्या पता चलता है?
- इसमें कौन-कौन से टेस्ट शामिल होते हैं?
एक्सपर्ट- डॉ. निरंजन कुलकर्णी, कंसल्टेंट, नेफ्रोलॉजी, कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, मुंबई
सवाल- संसदीय समिति ने साल में दो बार किडनी टेस्ट किए जाने की सिफारिश क्यों की है?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- इसका मुख्य उद्देश्य समय रहते क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) की पहचान करना है।
- किडनी डिजीज में अक्सर शुरुआती लक्षण स्पष्ट नहीं होते हैं। लक्षण सामने आने तक किडनी को काफी नुकसान हो चुका होता है।
- इसी वजह से समिति ने 20 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए हर 6 महीने में KFT की सिफारिश की है।
- सिफारिश में कहा गया है कि गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के लिए यह जांच मुफ्त हो।
- वहीं गरीबी रेखा से ऊपर के लोगों के लिए इसे मामूली शुल्क पर उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
- समिति ने डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसे CKD के प्रमुख रिस्क फैक्टर्स वाले लोगों की नियमित स्क्रीनिंग पर विशेष जोर दिया है।
सवाल- क्या भारत में किडनी डिजीज के आंकड़े सचमुच चिंताजनक हैं?
जवाब- हां, आंकड़ों से इसकी गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। हेल्थ जर्नल ‘द लैंसेट’ के मुताबिक, साल 2023 में भारत में लगभग 13.8 करोड़ लोग क्रॉनिक किडनी डिजीज से पीड़ित थे।
वहीं संसदीय समिति के अनुसार, हर साल करीब 2 लाख नए मरीज किडनी डिजीज की आखिरी स्टेज तक पहुंचते हैं, जब डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट के अलावा और कोई विकल्प नहीं रह जाता।
सवाल- KFT यानी किडनी फंक्शन टेस्ट क्या है?
जवाब- इस टेस्ट से किडनी की कार्यक्षमता का आकलन किया जाता है। इसके लिए ब्लड और यूरिन के सैंपल लिए जाते हैं। इसमें सीरम क्रिएटिनिन, एस्टीमेटेड ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट (eGFR) और यूरिन में प्रोटीन व एल्ब्यूमिन जैसी जांचें की जाती हैं।
सवाल- KFT टेस्ट से किडनी के बारे में क्या पता चलता है?
जवाब- इस टेस्ट से किडनी की कार्यक्षमता में कमी, किडनी डैमेज के शुरुआती संकेत और बीमारी की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। किडनी की कार्यक्षमता को समझना इसलिए जरूरी है, क्योंकि यह शरीर में कई अहम काम करती है। इसके डैमेज होने पर कई तरह के गंभीर हेल्थ रिस्क हो सकते हैं। किडनी के मुख्य काम ग्राफिक में देखिए-

सवाल- KFT में कौन-कौन से टेस्ट शामिल होते हैं?
जवाब- इसमें कई टेस्ट शामिल होते हैं, जो किडनी की कार्यक्षमता और उसकी सेहत के अलग-अलग पहलुओं का आकलन करते हैं। इसे पॉइंटर्स से समझिए-
सीरम क्रिएटिनिन
- यह टेस्ट ब्लड में क्रिएटिनिन की मात्रा मापता है।
- क्रिएटिनिन एक अपशिष्ट है, जिसे सामान्य स्थिति में किडनी फिल्टर करके शरीर से बाहर निकाल देती है।
एस्टीमेटेड ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट (eGFR)
- यह किडनी की फिल्टरिंग क्षमता का अनुमान देता है।
- इससे पता चलता है कि किडनी एक मिनट में कितनी मात्रा में ब्लड फिल्टर कर पा रही है।
ब्लड यूरिया
- यह टेस्ट ब्लड में यूरिया की मात्रा मापता है।
- यूरिया प्रोटीन के टूटने से बनता है और किडनी इसे यूरिन के जरिए शरीर से बाहर निकालती है।
यूरिन प्रोटीन या एल्ब्यूमिन
- इससे पता चलता है कि यूरिन में प्रोटीन तो नहीं आ रहा है।
- सामान्य स्थिति में यूरिन में प्रोटीन नहीं होना चाहिए। इसकी मौजूदगी किडनी को हुए नुकसान का शुरुआती संकेत हो सकती है।
सोडियम और पोटेशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स
- ये टेस्ट शरीर में पानी, नमक और इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन की जानकारी देते हैं।
- किडनी इनका लेवल कंट्रोल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
ध्यान रखें, अलग-अलग लैब के KFT पैनल में शामिल जांचें अलग हो सकती हैं।
सवाल- KFT टेस्ट कैसे होता है? क्या इसके लिए कोई खास तैयारी चाहिए?
जवाब- इसमें आमतौर पर ब्लड और यूरिन सैंपल लिए जाते हैं। ज्यादातर मामलों में खास तैयारी की जरूरत नहीं होती। लेकिन कुछ टेस्ट के लिए फास्टिंग या दवाओं से जुड़ी विशेष सलाह दी जा सकती है।
सवाल- KFT में होने वाले सभी टेस्ट्स की सामान्य रेंज क्या है?
जवाब- इसमें शामिल अलग-अलग जांचों की सामान्य रेंज अलग होती है। इसे ग्राफिक से समझिए-

सवाल- किन लोगों को रेगुलर किडनी टेस्ट करवाना चाहिए?
जवाब- कुछ लोगों में CKD का रिस्क ज्यादा होता है, इसलिए उन्हें डॉक्टर की सलाह से हर 6 महीने में किडनी स्क्रीनिंग करवानी चाहिए। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- किडनी डैमेज के शुरुआती संकेत क्या हैं?
जवाब- किडनी डैमेज की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती स्टेज में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखते। हालांकि, किडनी की कार्यक्षमता घटने पर कुछ संकेत दिख सकते हैं। इसे ग्राफिक में देखिए-

सवाल- हमारी किन गलतियों और आदतों के कारण किडनी को नुकसान पहुंचता है?
जवाब- हमारी रोजमर्रा की कुछ गलत आदतें किडनी पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं, जैसेकि-
- बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर लेना।
- जरूरत से ज्यादा नमक खाना।
- पर्याप्त पानी न पीना।
- देर तक यूरिन रोककर रखना।
- फिजिकली एक्टिव न रहना।
- पर्याप्त नींद न लेना।
- शराब, सिगरेट पीना।
- अल्ट्राप्रोसेस्ड/पैकेज्ड फूड ज्यादा खाना।
- डायबिटीज, हाई BP को कंट्रोल न करना।
- नियमित जांच न कराना।

सवाल- अगर KFT रिपोर्ट खराब आए तो क्या करें?
जवाब- सबसे पहले डॉक्टर से सलाह लें, ताकि रिपोर्ट की सही वजह पता चल सके। आप ये कदम उठा सकते हैं-
- सलाह मिलने पर अतिरिक्त जरूरी जांचें कराएं।
- ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखें।
- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं (अगर डॉक्टर ने कोई पाबंदी न लगाई हो)।
- बिना सलाह के पेन किलर या अन्य दवाएं न लें।
- नमक और अल्ट्राप्रोसेस्ड फूड कम खाएं।
- डॉक्टर द्वारा बताए गए फॉलो-अप और इलाज जारी रखें।
ध्यान रखें, KFT में गड़बड़ी का मतलब हमेशा किडनी फेलियर नहीं होता। समय पर जांच और सही इलाज से कई मामलों में स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता है।
सवाल- अगर KFT रिपोर्ट सही हो तो क्या करें?
जवाब- फिलहाल जांच में किडनी की कार्यक्षमता सामान्य है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आगे किडनी की सेहत को लेकर आप पूरी तरह निश्चिंत हो जाएं। अगर कोई ऐसी आदत है, जो किडनी को नुकसान पहुंचा सकती है, तो उसे आज से ही छोड़ें और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं।
सवाल- किडनी को हेल्दी रखने वाली बेस्ट आदतें कौन-सी हैं?
जवाब- किडनी पर दबाव कम करने के लिए हेल्दी आदतें अपनाना जरूरी है। सभी हेल्दी आदतों की लिस्ट ग्राफिक में देखिए-

KFT से जुड़े कॉमन सवाल-जवाब
सवाल- क्या KFT रिपोर्ट खराब आने का मतलब ‘किडनी डैमेज’ होना है?
जवाब- ऐसा जरूरी नहीं। KFT में गड़बड़ी के कई कारण हो सकते हैं। डॉक्टर जरूरत के अनुसार दोबारा जांच और अन्य टेस्ट से कारण की पुष्टि करते हैं।
सवाल- क्या सामान्य KFT रिपोर्ट का मतलब है कि किडनी पूरी तरह स्वस्थ है?
जवाब- जरूरी नहीं। शुरुआती CKD में KFT रिजल्ट सामान्य आ सकता है। जोखिम वाले लोगों में डॉक्टर की सलाह से नियमित स्क्रीनिंग जरूरी है।
सवाल- KFT में कितना खर्च आता है?
जवाब- इसकी कीमत लैब और जांचों की संख्या के अनुसार अलग-अलग होती है। आमतौर पर KFT पैकेज करीब ₹1,000 तक का हो सकता है।
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ग्राफिक्स– विपुल शर्मा
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हमारी आंतें सिर्फ खाना पचाने का काम नहीं करतीं। ये खाने से जरूरी पोषक तत्वों को शरीर में पहुंचाती हैं और कई हानिकारक बैक्टीरिया व टॉक्सिन्स को ब्लड में जाने से रोकती भी हैं। इसके लिए आंतों की अंदरूनी परत एक फिल्टर की तरह काम करती है। पूरी खबर पढ़िए…

