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बठिंडा में जिला कांग्रेस कमेटी ने किया रोष प्रदर्शन:मतदाता सूचियों से नाम काटने और ‘वोट चोरी’के खिलाफ किया प्रदर्शन,पुतले भी फूंके




बठिंडा में देशभर में मतदाता सूचियों (वोटर लिस्ट) से सुनियोजित तरीके से नाम काटे जाने और चुनावों में हुई कथित ‘वोट चोरी’ के विरोध में सोमवार को जिला कांग्रेस कमेटी की तरफ से सोमवार को स्थानीय मिनी सचिवालय के बाहर रोष प्रदर्शन किया गया। जिला कांग्रेस कमेटी के शहरी प्रधान राजन गर्ग व देहाती प्रधान व पूर्व विधायक प्रीतम सिंह कोटभाई की अगुवाई में आयोजित इस प्रदर्शन में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व , मुख्य निर्वाचन आयोग के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। इस दौरान आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयोग ज्ञानश कुमार के पुतले फूंके गए। जिसके बाद राष्ट्रीयपति के नाम पर डीसी बठिंडा को एक ज्ञापन सौंपा गया। उन्होंने मांग कि मुख्य चुनाव आयोग अपने पद से इस्तीफा दे और उनके खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाएं। वोटर लिस्ट से नाम गायब होने पर गहराया रोष
धरने को संबोधित करते हुए जिला प्रधान राजन गर्ग ने कहा कि देश में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराना चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है, लेकिन मौजूदा समय में लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। उन्होंने गंभीर आरोप लगाया कि देश और प्रदेशभर में सुनियोजित साजिश के तहत विरोधी विचारधारा वाले मतदाताओं और आम नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर काटे जा रहे हैं।
जब मतदाता सूची से ही नाम गायब कर दिए जाएंगे, तो आम नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग कैसे करेगा? यह सीधे तौर पर नागरिकों के मौलिक अधिकारों और भारतीय संविधान पर हमला है। बठिंडा में हुए वार्ड चुनावों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर सत्ता पक्ष ने प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर वोट चोरी की सभी हदें पार कर दी हैं। तानाशाही रवैये के खिलाफ सड़क से संसद तक संघर्ष की चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार विरोधी नारे लगाए। कांग्रेसी नेता नरेश गर्ग समेत तमाम कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यदि समय रहते चुनाव आयोग ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया और इस धांधली की निष्पक्ष जांच नहीं करवाई, तो कांग्रेस पार्टी चुप नहीं बैठेगी।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वार्ड चुनावों में उम्मीदवारों को परेशान करने और उनके समर्थकों के वोट काटने के जो मामले सामने आए हैं, वे लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक हैं। प्रशासनिक दुरुपयोग
आरोप लगाया गया कि स्थानीय अधिकारियों ने निष्पक्ष एजेंसी की तरह काम करने के बजाय सत्ताधारी दल के एजेंट के रूप में काम किया, जिससे चुनावों की पारदर्शिता पूरी तरह से तार-तार हो गई। इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में जिला कांग्रेस के पदाधिकारी, युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता और वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे, जिन्होंने इस ‘वोट चोरी’ के खिलाफ एकजुट होकर आर-पार की लड़ाई लड़ने का ऐलान किया।



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