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जबलपुर एयरपोर्ट कनेक्टिविटी पर हाईकोर्ट में सुनवाई:जबलपुर एयरपोर्ट पर 16 से घटकर 5 फ्लाइट, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगे सुझाव




मध्य प्रदेश के चार बड़े एयरपोर्ट में शामिल जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट पर एयर कनेक्टिविटी कम होने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। अधिवक्ता आदित्य संघी ने जनहित याचिका में बताया कि करीब चार साल पहले केंद्रीय उड्डयन विभाग ने लगभग 480 करोड़ रुपए खर्च कर एयरपोर्ट का विस्तार और आधुनिकीकरण किया था। इसका करीब 2000 मीटर लंबा रनवे प्रदेश में सबसे लंबा बताया गया है। जंगल के बीच स्थित होने के कारण एयरपोर्ट की लोकेशन भी खास है। इसके विस्तार के बाद इसे ब्राउनफील्ड एयरपोर्ट की श्रेणी में रखा गया, जिससे उम्मीद थी कि यहां बड़े विमानों के साथ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की कनेक्टिविटी भी विकसित होगी। अधिवक्ता के मुताबिक, एयरपोर्ट के नए रूप में आने के बाद भी कनेक्टिविटी बढ़ने के बजाय लगातार कम हुई है। एक समय जबलपुर से करीब 16 फ्लाइट संचालित होती थीं, लेकिन अब इनकी संख्या घटकर सिर्फ पांच रह गई है। इनमें भी छोटे और पुराने विमानों के संचालन तथा अपेक्षाकृत अधिक किराए का मुद्दा उठाया गया है। याचिका में कहा गया कि जबलपुर से पूर्व और पश्चिम भारत के कई प्रमुख शहरों के लिए सीधी कनेक्टिविटी नहीं है। पुणे जैसे शहर के लिए भी उड़ान नहीं है, जबकि जबलपुर के बड़ी संख्या में विद्यार्थी शिक्षा के लिए पुणे, बेंगलुरु और हैदराबाद जाते हैं। इंदौर से 80 फ्लाइट, जबलपुर में सिर्फ 5 का मुद्दा हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से इंदौर से करीब 80 फ्लाइट संचालित होने और ग्वालियर से भी जबलपुर की तुलना में अधिक कनेक्टिविटी होने का मुद्दा उठाया गया। अधिवक्ता ने कहा कि जबलपुर में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट होने के कारण दिल्ली समेत दूसरे शहरों से बड़ी संख्या में यात्रियों का आना-जाना है। इसके अलावा जबलपुर के आसपास कई टाइगर रिजर्व हैं, जिससे यह क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। पर्याप्त उड़ानें नहीं होने से बड़ी संख्या में पर्यटक और यात्री बेहतर एयर कनेक्टिविटी वाले नागपुर एयरपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं। चुनाव के समय उड़ान शुरू, बाद में बंद होने का आरोप याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान नई उड़ानों की घोषणा और शुरुआत होती है, लेकिन चुनाव के बाद कुछ ही सप्ताह में ये उड़ानें बंद हो जाती हैं। रीवा से शुरू की गई उड़ानों का भी उदाहरण कोर्ट के सामने रखा गया। उनका कहना है कि जबलपुर जैसे महत्वपूर्ण शहर में एयर कनेक्टिविटी को लगातार बनाए रखने की जरूरत है, क्योंकि अब हवाई यात्रा केवल सुविधा नहीं बल्कि शहर के विकास के लिए आवश्यकता बन चुकी है। फ्यूल और पार्किंग चार्ज भी मुद्दा सुनवाई के दौरान इंडिगो की ओर से भी दलीलें रखी गईं। एयरलाइंस की ओर से फ्यूल और पार्किंग चार्ज समेत संचालन से जुड़े खर्चों का मुद्दा उठाया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि मध्य प्रदेश में इन चार्जेस के अधिक होने का असर एयरलाइंस के लिए जबलपुर से उड़ान संचालित करने पर पड़ता है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मामले में सरकार की भूमिका और एयर कनेक्टिविटी बढ़ाने के उपायों पर जोर दिया है। अब मामले की अगली विस्तृत सुनवाई नवंबर में होगी। कोर्ट ने जबलपुर में अधिक से अधिक एयर कनेक्टिविटी कैसे बढ़ाई जा सकती है, इस पर संबंधित पक्षों से सुझाव भी मांगे हैं। क्या है ब्राउनफील्ड एयरपोर्ट पहले से मौजूद एयरपोर्ट का आधुनिकीकरण, विस्तार या पुनर्विकास कर उसकी क्षमता बढ़ाने की प्रक्रिया को ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट कहा जाता है। इसमें मौजूदा रनवे, टर्मिनल और अन्य बुनियादी ढांचे का उपयोग किया जाता है। इसके विपरीत ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट नई और अविकसित जमीन पर पूरी तरह नए सिरे से बनाया जाता है। सामान्य तौर पर ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट में मौजूदा ढांचे के इस्तेमाल के कारण जमीन अधिग्रहण और नए निर्माण की जरूरत कम होती है, हालांकि पुराने एयरपोर्ट के संचालन के साथ विस्तार कार्य करना चुनौतीपूर्ण होता है।



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