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जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के देरी से होने वाले पंजीकरण की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। राजस्थान में नए नियम लागू होने के बाद एक साल से अधिक देरी होने पर मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी होगा और दो साल से अधिक देरी होने पर न्यायिक मजिस्ट्रेट के स्तर से पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी होगी। जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026 के प्रावधान राजस्थान में 1 अक्टूबर 2026 से पूर्णतः प्रभावी होंगे। उदयपुर के अतिरिक्त मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) एवं जिला कलक्टर गौरव अग्रवाल ने बताया कि एक वर्ष से अधिक विलंब से होने वाले जन्म-मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। उन्होंने बताया कि संशोधित प्रावधान के अनुसार, किसी जन्म या मृत्यु की घटना की सूचना घटना के एक वर्ष के बाद, लेकिन दो वर्ष के भीतर रजिस्ट्रार को दी जाती है, तो उसका पंजीकरण संबंधित क्षेत्र के जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट अथवा जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा जन्म या मृत्यु की शुद्धता का सत्यापन किए जाने के बाद जारी आदेश और निर्धारित शुल्क के भुगतान पर ही किया जा सकेगा। दो वर्ष से अधिक विलंब पर प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश वहीं, यदि जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के दो वर्ष के बाद रजिस्ट्रार को दी जाती है, तो पंजीकरण संबंधित क्षेत्राधिकार वाले प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा जन्म या मृत्यु की शुद्धता का सत्यापन किए जाने के बाद जारी आदेश तथा निर्धारित शुल्क के भुगतान पर ही किया जा सकेगा।
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जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के रजिस्ट्रेशन में बदले नियम:अब 1 साल बाद मजिस्ट्रेट, 2 साल बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट से लेनी होगी अनुमति
