1 घंटे पहलेलेखक: अदिति ओझा
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अगर मैं आपसे पूछूं कि लंबी उम्र का सबसे बड़ा राज क्या है तो शायद आपका जवाब होगा- अच्छा खाना, रोज एक्सरसाइज करना और भरपूर नींद लेना। लेकिन स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के न्यूरोसाइंटिस्ट एंड्रयू ह्यूबरमैन कहते हैं कि इस लिस्ट में एक चीज और जोड़े दें– सुबह की धूप। उनके मुताबिक, सुबह की धूप सिर्फ आपको जगाती नहीं, बल्कि शरीर की बायलॉजिकल क्लॉक में भी चाभी भरती है।
दिलचस्प बात यह है कि आज हममें से ज्यादातर लोग सुबह आंख खुलते ही सनलाइट की बजाय मोबाइल स्क्रीन देखते हैं। दिन की शुरुआत नोटिफिकेशन और सोशल मीडिया से होती है। जबकि सुबह की धूप बॉडी क्लॉक को सेट करने और शरीर को पूरे दिन के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाती है।
इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में सुबह की धूप के हेल्थ बेनिफिट्स पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- यह शरीर में कौन-कौन से बदलाव लाती है?
- सनलाइट का एजिंग से क्या कनेक्शन है?
एक्सपर्ट- डॉ. अतुल अरोड़ा, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, धर्मशिला नारायणा हॉस्पिटल, दिल्ली
सवाल- दुनिया भर में सनलाइट (धूप) पर हो रही रिसर्च कहती है कि सूरज की रोशनी से लॉन्जिविटी बढ़ती है। क्या ये बात सही है?
जवाब- हां, ये बात सही है। कई रिसर्च बताती हैं कि जो लोग नियमित रूप से सुबह की धूप लेते हैं, उनके शरीर की कई प्रक्रियाएं बेहतर तरीके से काम करती हैं, जो हेल्दी एजिंग को सपोर्ट करती हैं। लेकिन इसे ऐसे समझना होगा कि धूप कोई जादुई दवा नहीं है, जो सीधे आपकी उम्र बढ़ा देती है। यह हेल्दी लिविंग का हिस्सा है।

सवाल- क्या किसी भी समय धूप में रहना सेहत के लिए अच्छा है?
जवाब- नहीं, सुबह की धूप शरीर को बताती है कि दिन शुरू हो गया है। इससे–
- बॉडी क्लॉक सेट होती है।
- कोर्टिसोल का नेचुरल मॉर्निंग स्पाइक होता है।
- रात में मेलाटोनिन (नींद का हार्माेन) सही समय पर रिलीज होता है।
- वहीं दोपहर की तेज धूप से विटामिन D तो बन सकता है, लेकिन लंबे समय तक इसके एक्सपोजर से सनबर्न और स्किन कैंसर का रिस्क भी बढ़ सकता है।
सवाल- सुबह की धूप से शरीर में क्या बदलाव होता है?
जवाब- सुबह की धूप कई हार्मोन्स की टाइमिंग तय करने में मदद करती है। इसका असर भूख, पाचन, ऊर्जा के इस्तेमाल, मूड और रात की नींद पर पड़ता है। यही वजह है कि जो लोग रेगुलर सुबह धूप लेते हैं, उनमें नींद का पैटर्न, दिनभर की एनर्जी और मेंटल परफॉर्मेंस बेहतर होता है। सुबह की धूप से शरीर में होने वाले सभी बदलाव ग्राफिक में देखिए-

सवाल- सुबह की धूप हमारी बॉडी क्लॉक को कैसे रीसेट करती है?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- ब्रेन, लिवर, हार्ट और डाइजेस्टिव सिस्टम की अपनी-अपनी बॉडी क्लॉक होती है।
- देर रात तक स्क्रीन देखने, अनियमित नींद लेने और नेचुरल लाइट की कमी से इनकी टाइमिंग बिगड़ सकती है।
- सुबह की धूप पूरे शरीर को एक जैसा टाइम सिग्नल देती है।
- इससे शरीर के अलग-अलग अंग एक ही टाइम टेबल के हिसाब से काम करने लगते हैं।
- सोने, जागने, खाने और ऊर्जा इस्तेमाल करने की टाइमिंग बेहतर होती है।
- इसलिए वैज्ञानिक सुबह की धूप को शरीर का ‘नेचुरल रीसेट बटन’ मानते हैं।
सवाल- वो कौन-से संकेत हैं, जो बताते हैं कि बॉडी क्लॉक बिगड़ रही है?
जवाब- इसके संकेत अक्सर धीरे-धीरे दिखते हैं। इसलिए लोग इन्हें सामान्य थकान या खराब दिनचर्या का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। अगर सोने-जागने, भूख लगने या एनर्जी लेवल से जुड़ी दिक्कतें हो रही हैं, तो यह बॉडी क्लॉक के गड़बड़ाने का संकेत हो सकता है। ग्राफिक में ऐसे सभी संकेत देखिए-

सवाल- बॉडी क्लॉक को ठीक करने के लिए क्या करें?
जवाब- शरीर की इंटरनल क्लॉक को रीसेट करने का सबसे असरदार तरीका है कि उसे रोज एक जैसे संकेत मिलें। इसमें सुबह की धूप सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। रेगुलर रूटीन अपनाने से शरीर धीरे-धीरे अपनी प्राकृतिक लय (सर्केडियन रिद्म) में लौट सकता है। ग्राफिक में सभी टिप्स देखिए-

सवाल- सुबह धूप लेने से क्या हेल्थ बेनिफिट्स होते हैं?
जवाब- हेल्थ एक्सपर्ट्स इसे बेहतर नींद, मेंटल हेल्थ, मेटाबॉलिक हेल्थ और हेल्दी एजिंग से जुड़ी जरूरी हैबिट मानते हैं। ग्राफिक में सुबह धूप लेने के सभी फायदे देखिए-

सवाल- सुबह धूप लेने से रात में अच्छी नींद कैसे आती है?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- सुबह की धूप आंखों के जरिए ब्रेन तक पहुंचकर शरीर को बताती है कि दिन शुरू हो गया है।
- शरीर इसी जानकारी के आधार पर रात की नींद का समय तय करता है। यानी अगर शरीर को सुबह सही समय पर तेज प्राकृतिक रोशनी मिल जाती है, तो उसे यह अंदाजा हो जाता है कि रात में कब नींद आनी है।
इसे ऐसे समझिए-
- शरीर को सिर्फ यह नहीं जानना होता कि अभी दिन है, बल्कि यह भी जानना होता है कि दिन शुरू हुए कितने घंटे बीत चुके हैं। सुबह की धूप यह ‘टाइम रेफरेंस’ देती है।
- यही वजह है कि सुबह प्राकृतिक रोशनी लेने वाले लोगों में सोने का समय रेगुलर और स्लीप क्वालिटी बेहतर होती है।
सवाल- सुबह की धूप स्ट्रेस कम करने में कैसे मदद करती है?
जवाब- सुबह की धूप शरीर में कोर्टिसोल के नेचुरल मॉर्निंग पीक को सपोर्ट करती है। कोर्टिसोल को यूं तो ‘स्ट्रेस हार्मोन’ कहा जाता है, लेकिन सही समय पर बढ़ने वाला कोर्टिसोल वास्तव में हमें जगाने, एनर्जी देने और दिन के लिए तैयार करने का काम करता है।
समस्या तब होती है, जब कोर्टिसोल गलत समय पर बढ़ने लगे। ऐसे में बेचैनी, चिड़चिड़ापन, थकान और नींद की समस्याएं बढ़ सकती हैं। सुबह की प्राकृतिक रोशनी कोर्टिसोल के डेली रिदम को व्यवस्थित करती है।
सवाल- सुबह की धूप फोकस और परफार्मेंस बढ़ाने में कैसे मदद करती है?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- सुबह की धूप आंखों में मौजूद खास लाइट सेंसिटिव सेल्स (ipRGCs) को एक्टिव करती है।
- ये सेल्स ब्रेन को मैसेज भेजती हैं कि अब जागने और एक्टिव होने का समय है।
- इसके जवाब में ब्रेन ऐसे केमिकल्स रिलीज करता है, जो फोकस और अलर्टनेस बढ़ाने में मदद करते हैं। इनमें नॉरएड्रेनालिन और डोपामिन प्रमुख हैं।
- नॉरएड्रेनालिन ब्रेन को किसी काम या जानकारी पर फोकस करने में मदद करता है, जबकि डोपामिन मोटिवेशन बनाए रखता है।
सवाल- सनलाइट का एजिंग से क्या कनेक्शन है?
जवाब- अगर नींद, मेटाबॉलिज्म, हार्मोन, इम्यून सिस्टम और हार्ट हेल्थ लंबे समय तक ठीक रहे, तो उम्र बढ़ने के कुछ असर धीमे पड़ सकते हैं।
सुबह की धूप इन सभी सिस्टम्स की टाइमिंग को बेहतर बनाए रखने में मदद करती है। जिन लोगों की सर्केडियन रिद्म (बॉडी क्लॉक) मजबूत रहती है, उनमें उम्र बढ़ने से जुड़ी कई समस्याओं का रिस्क कम होता है।
सवाल- सुबह धूप लेने का सही तरीका क्या है? क्या धूप देखने का मतलब सीधे सूरज को देखना है?
जवाब- नहीं, सुबह धूप लेने का मतलब सीधे सूरज को घूरना नहीं है। ऐसा करना आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है। सुबह की धूप का फायदा लेने के लिए सिर्फ इतना जरूरी है कि प्राकृतिक रोशनी आपकी आंखों तक पहुंचे।
इसके लिए घर से बाहर निकलें और खुले आसमान की ओर देखें। सूरज आपकी नजर के दायरे में हो सकता है, लेकिन उसे सीधे देखने की जरूरत नहीं है। दरअसल, ब्रेन को सिग्नल सूरज की डिस्क से नहीं, बल्कि पूरे आसमान में फैली प्राकृतिक रोशनी से मिलता है।
सवाल- सुबह धूप लेते समय किन बातों का ध्यान रखें?
जवाब- सुबह की धूप का फायदा तभी मिलता है, जब उसे सही तरीके से लिया जाए। इसका मतलब ज्यादा देर धूप में खड़े रहना या सूरज को सीधे देखना नहीं है। मकसद आंखों और शरीर को सुरक्षित तरीके से प्राकृतिक रोशनी देना है। धूप लेने का सही तरीका ग्राफिक में देखिए-

धूप सिर्फ रोशनी नहीं देती, यह मूड भी बेहतर बना सकती है। इसलिए अगली बार जब सूरज बादलों के पीछे से निकलता दिखे, तो कुछ देर के लिए बाहर जरूर जाएं। हो सकता है यह सुनहरी रोशनी आपके मन को भी थोड़ा हल्का और खुश कर दे। ……………………………
ग्राफिक्स- विपुल शर्मा
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