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अकाली दल वारिस पंजाब दे और चुनाव आयोग में विवाद:चुनाव आयोग हमारी पार्टी का रजिस्ट्रेशन जानबूझकर रोक रहा है मनप्रीत सिंह अयाली




अकाली दल वारिस पंजाब दे के रजिस्ट्रेशन को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मनप्रीत सिंह अयाली ने चुनाव आयोग पर पार्टी का रजिस्ट्रेशन जानबूझकर रोकने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने सभी शर्तें पूरी कर ली हैं, लेकिन राजनीतिक दबाव के कारण उन्हें चुनाव चिह्न नहीं दिया जा रहा है। अयाली ने स्पष्ट किया कि चाहे पार्टी को मान्यता मिले या न मिले, उनके उम्मीदवार हर हाल में चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने पंजाब के लोगों, युवाओं और एनआरआई (NRI) से सोशल मीडिया के जरिए चुनाव आयोग पर दबाव बनाने की अपील की है। पार्टी ने इस मामले में हाईकोर्ट का भी रुख किया है और जरूरत पड़ने पर वे सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे। वीडियो में क्या बोले अयाली सभी को फ़तेह बुलाता हूँ, वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फ़तेह। आज मैं आपके सामने अकाली दल वारिस पंजाब दे’ जत्थेबंदी के रजिस्ट्रेशन के मसले को लेकर आया हूँ। पार्टी रजिस्ट्रेशन की हमारी फाइल चुनाव आयोग के पास गई हुई है। चुनाव आयोग का किसी भी पार्टी को रजिस्टर करने का बहुत ही सरल तरीका है। हमने सभी शर्तें पूरी कर दी हैं, इसके बावजूद काफी लंबे समय से हमारी इस प्रक्रिया को रोका गया है। पब्लिकेशन फाइनल स्टेज पर थी, उसके बाद चुनाव चिह्न (सिंबल) मिलना था। लेकिन जानबूझकर चुनाव आयोग द्वारा इस रजिस्ट्रेशन को रोका जा रहा है। चुनाव आयोग पहले ही बहुत सारे विवादों के घेरे में है। खुद उसी दफ्तर के दो चुनाव कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू और विवेक अराय ने बयान दिया था कि अपनी मनमर्जियां की जा रही हैं। हमारी जत्थेबंदी जिसमें पहले से 2 सांसद (MP) और 10 विधायक (MLA) काम कर रहे हैं, और पहले भी हमारे 2 सांसद आजाद जीते हैं। अब ये कह रहे हैं कि इनके रजिस्ट्रेशन से देश की सुरक्षा को खतरा है। जब से ये जत्थेबंदी बनी है, आप कोई भी ऐसी गतिविधि या बयानबाजी दिखा दें जो संविधान के दायरे में नहीं है। असल में आज पार्टी को लोगों का बहुत बड़ा समर्थन मिल रहा है, लोग भारी संख्या में ‘अकाली दल वारिस पंजाब दे’ के साथ जुड़ रहे हैं, जिससे विरोधी पार्टियों को खतरा महसूस हो रहा है। राजनीतिक तौर पर इस बढ़ते जनसमर्थन को रोकने के लिए जानबूझकर रजिस्ट्रेशन में देरी की जा रही है। ठीक है, चुनाव तो हमें लड़ना ही है। पहले भी हमने आजाद चुनाव लड़े हैं और अगर रजिस्ट्रेशन नहीं भी होगा, तो हमारे सारे उम्मीदवार आजाद तौर पर चुनाव लड़ेंगे। लेकिन सरकार जो देरी कर रही है, उसके विरोध में हम हाईकोर्ट गए हैं और आज हमारी हाईकोर्ट में तारीख है। हमें अदालतों पर पूरा भरोसा है कि हाईकोर्ट हमें इसमें इंसाफ देगा। हमारे साथ हमेशा ही भेदभाव हुए हैं। चाहे कांग्रेस की सरकार रही हो या बीजेपी की, पंजाब के मसलों जैसे चंडीगढ़ का मसला, पानी का मसला और बंदी सिंहों की रिहाई को लेकर हमेशा भेदभाव किया गया है। जिस सिख कौम ने देश को आज़ाद कराने के लिए सबसे ज्यादा कुर्बानियां दीं, उसी के साथ ये भेदभाव हो रहे हैं। अमृतपाल सिंह पर बिना वजह एनएसए (NSA) लगाया गया और उन्हें असम की जेल में रखा गया है। इन्हीं सब कारणों से सिखों में केंद्र सरकार के प्रति बहुत बड़ा रोष है। आजकल कोई भी आसानी से पार्टी रजिस्टर करवा सकता है, लेकिन जिस पार्टी के पास 2 सांसद, विधायक और लोगों का इतना बड़ा आधार है, उसे रोका जा रहा है। इस पार्टी का एजेंडा पंजाब से नशा खत्म करना और हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी में आपसी शांति और भाईचारा कायम रखना है। चुनाव आयोग के पास रजिस्ट्रेशन रोकने की कोई ठोस दलील नहीं है।मैं आप सभी से कहना चाहता हूँ कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है। हमें अदालतों पर भरोसा है, चाहे हमें सुप्रीम कोर्ट भी जाना पड़े। चुनाव हम हर हाल में लड़ेंगे, हमारे सभी उम्मीदवार लड़ेंगे। हमारे पास और भी विकल्प हैं, लेकिन इस तरह रोकने से लोगों में गुस्सा और बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में हमारा एक प्रतिनिधिमंडल (डेलिगेशन) चुनाव आयोग से मिलेगा। अगर हमें अपने हकों के लिए धरने भी लगाने पड़े, चाहे दिल्ली में जंतर-मंतर पर या चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर, हम हर तरह की कानूनी और लोकतांत्रिक लड़ाई लड़ेंगे। आप सभी डटकर हमारा सहयोग दें। एनआरआई भाई और नौजवान सोशल मीडिया के जरिए दबाव बनाएं ताकि हमारा मसला जल्द हल हो, हमें चुनाव चिह्न मिले और हम अपने उम्मीदवार जिताकर पंजाब में अपनी सरकार बनाएं। सभी का धन्यवाद, वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फ़तेह।



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