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इजराइल ने दुबई से उड़ान भरने वाले हाईजैक विमान को मार गिराने की तैयारी कर लिए थी। हाईजैक का अलर्ट मिलते ही फाइटर जेट्स रवाना कर दिए थे। विमान में 174 यात्री सवार थे। टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार को आशंका थी कि अगर विमान का कंट्रोल वापस नहीं मिला, तो वह इजराइल तक पहुंच सकता है और 9/11 जैसे हमले को अंजाम दे सकता है। खतरा टालने के लिए विमान को हवा में ही मार गिराना पड़ सकता था। इजराइल के भारत में राजदूत रियूवेन अजार के मुताबिक, हालात नहीं संभलते तो प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को कार्रवाई पर फैसला लेना पड़ सकता था। हालांकि, विमान के क्रू ने दोबारा कंट्रोल हासिल कर लिया और उसे सऊदी अरब के ताबुक में सुरक्षित उतार लिया गया। हाईजैक विमान को गिराने के नियम क्या हैं? 1. पहले विमान को सुरक्षित उतारने की कोशिश होती है अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के शिकागो कन्वेंशन के अनुच्छेद 3 bis के मुताबिक अगर किसी विमान के हाईजैक होने का शक हो, तो सुरक्षा एजेंसियां पहले उससे संपर्क करने और उसे सुरक्षित उतारने की कोशिश करती हैं। जरूरत पड़ने पर लड़ाकू विमान भी उसके पीछे भेजे जा सकते हैं। 2. क्या हाईजैक होने पर विमान को गिरा सकते हैं? सिर्फ हाईजैक होने के कारण विमान को गिराने की अनुमति नहीं मिल जाती। हर मामले में खतरे की गंभीरता और हालात को देखना पड़ता है। विमान में यात्रियों और क्रू की जान भी दांव पर होती है। 3. अंतरराष्ट्रीय कानून क्या कहता है? शिकागो कन्वेंशन के मुताबिक, उड़ान के दौरान नागरिक विमान के खिलाफ हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। विमान को रोकने की कार्रवाई में यात्रियों और क्रू की जान का ध्यान रखना जरूरी है। 4. अगर विमान इमारत से टकराने वाला हो तो? अगर विमान को किसी इमारत या भीड़ पर हमला करने के लिए इस्तेमाल किए जाने का खतरा हो, तो स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है। सुरक्षा एजेंसियां उसे रोकने के विकल्पों पर विचार करती हैं। हालांकि, विमान को गिराने का फैसला अपने आप सही या कानूनी नहीं हो जाता। यह उस समय के हालात और लागू कानूनों पर निर्भर करता है। हाईजैकर्स से बातचीत के लिए भी तैयार था इजराइल इजराइल ने इस आशंका के लिए भी तैयारी की थी कि हाईजैकर्स विमान में सवार यात्रियों को बंधक बनाकर अपनी मांगें रख सकते हैं। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए इजराइल की राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी और बंधक बचाव यूनिट यामाम को अलर्ट किया गया था। योजना थी कि अगर हाईजैकर्स यात्रियों को छोड़ने के बदले कोई मांग रखते हैं, तो उनसे बातचीत और बंधकों को सुरक्षित निकालने की कार्रवाई के लिए यह विशेष यूनिट मोर्चा संभालेगी। विमान दूसरे देश में गिरता तो कमांडो भेजता इजराइल इजराइल ने ऐसी स्थिति के लिए भी तैयारी की थी, जिसमें हाईजैक हुआ विमान उसके बजाय जॉर्डन या सऊदी अरब के इलाके में क्रैश हो जाता। ऐसी नौबत आने पर विमान में फंसे यात्रियों और क्रू को बचाने के लिए इजराइली एयरफोर्स की विशेष कमांडो यूनिट शालदाग को भेजने की योजना बनाई गई थी। इसी यूनिट ने अप्रैल में ईरान में अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल विमान के क्रैश होने के बाद दो अमेरिकी एयरक्रू सदस्यों को बचाने के अभियान में हिस्सा लिया था। 9/11 हमले में करीब 3000 लोग मारे गए थे 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में हुए 9/11 हमले में करीब 3,000 लोगों की मौत हुई थी। आतंकवादी संगठन अल-कायदा के 19 आतंकियों ने चार यात्री विमानों को हाईजैक कर लिया था। इनमें से दो विमानों को न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के टावरों से और एक को अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय पेंटागन से टकरा दिया गया। चौथा विमान यात्रियों के विरोध के बाद एक खेत में गिर गया। ———————- ये खबर भी पढ़ें… इजराइली यात्री ने TV शो देखकर प्लेन उड़ाना सीखा:हमलावर पायलट को पकड़कर हाइजैकिंग रोकी; खून सने कपड़ों में नेतन्याहू से मिलने पहुंचा दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में बुधवार सुबह कॉकपिट के अंदर पायलटों के बीच झगड़ा हो गया। ओमानी पायलट ने भारतीय पायलट स्मित मच्छर पर चाकू से हमला कर दिया। इसके बाद विमान तेजी से नीचे जाने लगा। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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हाईजैक विमान को गिराने की तैयारी में था इजराइल:अलर्ट मिलते ही फाइटर जेट्स भेजे; 9/11 जैसा हमला टालने के लिए हवा में ही मारना पड़ता
