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53 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा
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5 फीट 5 इंच का दुबला-पतला आदमी। सिर पर न के बराबर बाल, आंखों पर गोल चश्मा, तन पर साधारण धोती। न पास में हथियार, न सेना। फिर भी उसने दुनिया की सबसे ताकतवर साम्राज्यवादी ताकतों में से एक ब्रिटिश राज को झुकने पर मजबूर कर दिया। यह शख्स मोहनदास करमचंद गांधी थे, जिन्हें दुनिया महात्मा गांधी के नाम से जानती है।
इस साल महात्मा गांधी की 157वीं जयंती मनाई जा रही है। गांधी जी की बात होते ही अहिंसा, सत्याग्रह और स्वतंत्रता आंदोलन की चर्चा होती है।
लेकिन उनके जीवन का एक ऐसा पहलू भी है, जिस पर कम बात होती है। वह है– गांधीजी की लाइफस्टाइल। वो शुद्ध, सादा खाते थे, रात में जल्दी सोते और सुबह जल्दी उठते थे, सरल जीवन जीते थे और खूब–खूब पैदल चलते थे।
पिछले साल इस स्टोरी में हमने गांधीजी के भोजन के बारे में विस्तार से बात की थी। चलिए इस बार, उनकी उस आदत के बारे में बात करते हैं, जिसके चलते 70 की उम्र में भी उनकी हड्डियों में किसी युवा जितना बल था।
गांधी जी मानते थे कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए नियमित पैदल चलना जरूरी है। एक बार उन्होंने अपने राजनीतिक गुरु गोपाल कृष्ण गोखले को नियमित सैर न करने पर टोका था। गांधी जी ने उनसे कहा, “आप टहलने भी नहीं जाते। फिर हमेशा बीमार रहने पर हैरानी कैसी?” गोखले ने व्यस्तता का हवाला दिया, लेकिन गांधी जी इस तर्क से सहमत नहीं थे। इसकी वजह यह थी कि वे खुद चाहे कितने भी व्यस्त क्यों न हों, अपनी वॉक कभी नहीं छोड़ते थे।
कहा जाता है कि गांधी जी रोज औसतन 18 किलोमीटर पैदल चलते थे। ये सिलसिला 40 साल तक बदस्तूर चलता रहा। 1914 से 1948 के बीच उन्होंने लगभग 79 हजार किलोमीटर की दूरी पैदल तय की। यह पृथ्वी के लगभग दो चक्कर लगाने के बराबर है। 60 साल की उम्र पार करने के बाद भी उन्होंने साबरमती आश्रम से दांडी तक 386 किलोमीटर की ऐतिहासिक यात्रा की थी, जिसने ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी थी।
गांधी जी के लिए पैदल चलना लाइफस्टाइल का हिस्सा था। दिलचस्प बात यह है कि आज विज्ञान भी उनके इस विश्वास का समर्थन करता है। पैदल चलने के फायदों पर दुनिया भर में हजारों रिसर्च हो चुकी हैं।
इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में पैदल चलने के जादुई फायदों पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- रोज पैदल चलने से शरीर में क्या बदलाव होते हैं?
- इससे किन बीमारियों का रिस्क घटता है?
एक्सपर्ट- डॉ. अक्षय चुघ, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, मेट्रो हॉस्पिटल्स एंड हार्ट इंस्टीट्यूट, नोएडा
सवाल- क्या रोज पैदल चलना वास्तव में उपयोगी एक्सरसाइज है?
जवाब- हां, पैदल चलना सबसे आसान और असरदार एक्सरसाइज है। इसके लिए किसी खास उपकरण की भी जरूरत नहीं होती। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, अच्छी हेल्थ के लिए रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी जरूरी है। तेज गति से चलना इसका बेहतर विकल्प है।
सवाल- पैदल चलने के फायदों पर हुई साइंस रिसर्च और स्टडीज क्या कहती हैं?
जवाब- पॉइंटर्स से समझिए-
- अब तक पैदल चलने के फायदों पर हजारों रिसर्च पेपर, सैकड़ों क्लीनिकल स्टडीज, सिस्टेमैटिक रिव्यू और मेटा-एनालिसिस पब्लिश हो चुके हैं।
- वैज्ञानिकों ने अलग-अलग देशों, उम्र और हेल्थ कंडीशंस वाले लाखों लोगों पर इसके प्रभाव को लेकर अध्ययन किए हैं।
- सबका निष्कर्ष यही है कि रेगुलर पैदल चलना हेल्थ के लिए सबसे सेफ और फायदेमंद फिजिकल एक्टिविटीज में से एक है।
- यही वजह है कि WHO, CDC (सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन), NHS (नेशनल हेल्थ सर्विस) समेत दुनिया के लगभग सभी प्रमुख हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन रेगुलर वॉकिंग को हेल्दी लाइफस्टाइल का हिस्सा मानते हैं।

सवाल- रोज सिर्फ 30 मिनट पैदल चलने से क्या हेल्थ बेनिफिट्स होते हैं?
जवाब- इसका शरीर और ब्रेन, दोनों पर पॉजिटिव असर पड़ता है। हालांकि, 30 मिनट एक साथ चलना जरूरी नहीं है। इसे 10-10 मिनट के तीन हिस्सों में भी पूरा किया जा सकता है। ग्राफिक में सभी हेल्थ बेनिफिट्स देखिए-

सवाल- पैदल चलना शुरू करते ही शरीर में सबसे पहले क्या बदलाव होते हैं?
जवाब- जैसे ही हम चलना शुरू करते हैं, शरीर एक्टिव होने लगता है। कुछ ही मिनटों में ब्रेन, हार्ट, लंग्स, मसल्स और कार्डियोवस्कुलर सिस्टम एक-दूसरे के साथ तालमेल बढ़ा लेते हैं, जिससे शरीर को ज्यादा ऑक्सीजन और ऊर्जा मिलने लगती है। सारे बदलाव नीचे ग्राफिक में देखिए-

सवाल- रोज पैदल चलना हार्ट के लिए कितना फायदेमंद है?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- पैदल चलना एक एरोबिक एक्टिविटी है। यानी ऐसी एक्सरसाइज, जो हार्ट को लगातार और नियंत्रित तरीके से काम करने के लिए प्रेरित करती है।
- जब हम रेगुलर वॉक करते हैं, तो हार्ट की पंपिंग क्षमता बेहतर होती है। इसका मतलब है कि हार्ट हर धड़कन के साथ शरीर तक ज्यादा प्रभावी ढंग से ब्लड पहुंचा पाता है।
- रेगुलर वॉकिंग ब्लड वेसल्स को लचीला बनाए रखने में मदद करती है।
- इससे हार्ट पर अनावश्यक दबाव कम होता है और शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने की क्षमता बेहतर होती है।
सवाल- पैदल चलना ब्रेन के लिए कैसे फायदेमंद है?
जवाब- पॉइंटर्स से समझिए-
- जब हम पैदल चलते हैं तो ब्रेन में ब्लड फ्लो बढ़ता है।
- इससे ब्रेन को ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की बेहतर सप्लाई मिलती है, जिससे ब्रेन की कार्यक्षमता बेहतर होती है।
- रेगुलर वॉकिंग से स्ट्रेस कम होने के साथ मूड भी बेहतर होता है।
- यह एकाग्रता, याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता को भी सपोर्ट करती है।
- इससे डिमेंशिया का रिस्क भी कम होता है।
सवाल- रोज पैदल चलने से किन बीमारियों का रिस्क कम होता है?
जवाब- इससे हार्ट, ब्रेन, हड्डियों और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी कई बीमारियों का रिस्क कम होता है। इसे ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या सिर्फ पैदल चलकर वजन कम किया जा सकता है?
जवाब- पैदल चलने से वजन कम करने में मदद मिलती है, क्योंकि इससे कैलोरी बर्न होती है। हालांकि, सिर्फ वॉकिंग के भरोसे वजन नहीं घटता।
वजन कम होना इस बात पर निर्भर करता है कि आप जितनी कैलोरी खा रहे हैं, उससे ज्यादा खर्च कर पा रहे हैं या नहीं। साथ ही वजन कम करने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना भी जरूरी है।
सवाल- घास, मिट्टी या रेत पर चलने से शरीर पर क्या अलग असर पड़ता है?
जवाब- हां, इन सतहों पर शरीर को संतुलन बनाए रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे पैरों और टखनों की छोटी-छोटी मसल्स ज्यादा एक्टिव होती हैं। इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- घास और मिट्टी अपेक्षाकृत नरम सतह होती है। इसलिए इनमें जोड़ों पर पड़ने वाला झटका कुछ हद तक कम होता है।
- रेत पर चलना ज्यादा चैलेंजिंग होता है, क्योंकि पैर बार-बार धंसता है। इससे ऊर्जा खर्च बढ़ता है और पैरों की मसल्स को ज्यादा काम करना पड़ता है।
सवाल- रोज पैदल चलने की आदत कैसे डालें?
जवाब- आदत बनाने को लेकर बिहेवियर साइंस में एक मशहूर विचार है कि ‘किसी काम की शुरूआत सबसे कठिन होती है।’ यही वजह है कि कई लोग वॉकिंग के फायदे जानते हुए भी नियमित रूप से टहलना शुरू नहीं कर पाते। इस चुनौती से निपटने के लिए कुछ एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं-
“अगर वॉक पर जाने का मन नहीं है, तो बस जूते पहन लीजिए।”
विचार यह है कि जब आप जूते पहन लेते हैं, तो पहला कदम उठ चुका होता है और बाहर निकलने की संभावना बढ़ जाती है। ग्राफिक में पैदल चलने की आदत डालने के आसान टिप्स देखिए-

सवाल- क्या पैदल चलने की आदत हमारी पूरी दिनचर्या को भी ज्यादा एक्टिव बना सकती है?
जवाब- हां, वॉकिंग की आदत से पूरे दिन की फिजिकल एक्टिविटी बढ़ जाती है। ऐसे में लोग-
- छोटी दूरी के लिए वाहन का कम इस्तेमाल करते हैं।
- ज्यादा सीढ़ियां चढ़ते हैं।
- लंबे समय तक लगातार बैठने से बचते हैं।
- रोजमर्रा के कामों में भी ज्यादा मूवमेंट शामिल कर लेते हैं।
- यही वजह है कि हेल्थ एक्सपर्ट्स इसे सिडेंटरी लाइफस्टाइल को बदलने का आसान और टिकाऊ उपाय मानते हैं।
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ग्राफिक- अजीत सिंह
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अगर मैं आपसे पूछूं कि लंबी उम्र का सबसे बड़ा राज क्या है तो शायद आपका जवाब होगा- अच्छा खाना, रोज एक्सरसाइज करना और भरपूर नींद लेना। लेकिन स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के न्यूरोसाइंटिस्ट एंड्रयू ह्यूबरमैन कहते हैं कि इस लिस्ट में एक चीज और जोड़े दें– सुबह की धूप। पूरी खबर पढ़ें…

