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पानीपत जिले में बिना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) की NOC के गैर-कानूनी तरीके से चल रहे अवैध बलीच हाउसों और वहां खतरनाक केमिकल्स के बीच काम करने वाले श्रमिकों के मानवाधिकारों के हनन पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। मीडिया रिपोटर्स का स्वतः संज्ञान लेते हुए मानवाधिकार आयोग ने 1 अक्टूबर को पानीपत के जिला मजिस्ट्रेट (DM) को नोटिस भेजकर 2 सप्ताह के भीतर पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। बिना सुरक्षा उपकरणों के काम करने से गल रहे श्रमिकों के हाथ-पैर आयोग ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पानीपत में 100 से अधिक अवैध बलीच हाउस चल रहे हैं, जहां काम करने वाले मजदूरों को जूते, दस्ताने या अन्य कोई सुरक्षा उपकरण नहीं दिए जा रहे हैं। बलीच हाउसों में सोडियम हाइपोक्लोराइट और हाइड्रोक्लोरिक एसिड जैसे खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल होता है। सुरक्षा किट न होने के कारण केमिकल्स के सीधे संपर्क में आने से मजदूरों की त्वचा गल रही है और हाथ-पैरों में गंभीर केमिकल बर्न व घाव हो रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन केमिकल बर्न्स और त्वचा रोगों के कारण प्रतिदिन 10 से 12 पीड़ित मजदूर इलाज के लिए सिविल अस्पताल पहुंच रहे हैं। बिना NOC के चल रही इकाइयां और केमिकल युक्त पानी का रिसाव मानवाधिकार आयोग ने पाया कि पानीपत के सिवाह, कुराड़, बबैल, डिडवाड़ी और सनौली रोड सहित कृषि भूमि पर 50 एकड़ से अधिक क्षेत्र में बिना NOC के अवैध इकाइयां चल रही हैं। केमिकल युक्त जहरीले पानी को डिस्पोज करने की कोई व्यवस्था नहीं है; इसे गड्ढा खोदकर सीधे जमीन में बहाया जा रहा है। मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन, 2 सप्ताह में मांगी रिपोर्ट आयोग ने स्पष्ट कहा कि यदि समाचार रिपोर्ट में दिए गए तथ्य सत्य हैं, तो यह सीधे तौर पर श्रमिकों के मानव अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। इसी के मद्देनजर आयोग ने पानीपत जिला मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर पूरे मामले, अवैध इकाइयों पर की गई कार्रवाई और पीड़ित श्रमिकों के इलाज व सुरक्षा को लेकर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
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मानवाधिकार आयोग ने पानीपत DC को लिखा पत्र:कहा- ब्लीच हाउस पर श्रमिकों के हाथ गल रहे, अवैध रुप से चल रहे उद्योग, रिपोर्ट दें
