Headlines

Monsoon Food Poisoning: 7 Symptoms & 12 Prevention Tips by Doctors


2 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

  • कॉपी लिंक

बारिश के मौसम में वातावरण में नमी बढ़ जाती है। इससे खाने-पीने की चीजों में बैक्टीरिया और वायरस जल्दी पनपते हैं। यही वजह है कि इस मौसम में फूड पॉइजनिंग ज्यादा होती है।

पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स और ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ (FSSAI) के मुताबिक, मानसून के दौरान ई.कोली और सल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं। बढ़ी हुई नमी, जलभराव और दूषित भोजन-पानी इसके मुख्य कारण हैं। इस कारण फूड पॉइजनिंग, डायरिया और हैजा के मामले बढ़ जाते हैं।

हालांकि कुछ बुनियादी सावधानियां अपनाकर इन बीमारियों के रिस्क से बचा जा सकता है।

इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में हम फूड पॉइजनिंग के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • फूड पॉइजनिंग के लक्षण क्या हैं?
  • बारिश में फूड पॉइजनिंग से बचने के लिए क्या करें?

एक्सपर्ट- डॉ. बृज वल्लभ शर्मा, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर

सवाल- फूड पॉइजनिंग क्या है?

जवाब- फूड पॉइजनिंग दूषित भोजन-पानी से होने वाला संक्रमण है। यह बैक्टीरिया, वायरस, पैरासाइट या उनके टॉक्सिन्स के कारण होता है।

सवाल- फूड पॉइजनिंग क्यों होती है?

जवाब- फूड पॉइजनिंग मुख्य रूप से दूषित भोजन और पानी से होती है। इसके सभी कारण ग्राफिक में देखिए-

सवाल- मानसून में फूड पॉइजनिंग के केसेज क्यों बढ़ जाते हैं?

जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-

  • मानसून में वातावरण में नमी बढ़ जाती है। यह बैक्टीरिया, वायरस और फंगस के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बनाता है।
  • इस कारण खाना जल्दी खराब होता है। इसे खाने से फूड पॉइजनिंग का रिस्क बढ़ता है।
  • बारिश के दौरान पानी भी जल्दी दूषित होता है।
  • सब्जियां, फल, स्ट्रीट फूड और खुले में रखा खाना गंदे पानी या मक्खियों के संपर्क में आता है। इससे संक्रमण का रिस्क बढ़ जाता है।
  • मानसून में डाइजेस्टिव सिस्टम भी थोड़ा स्लो होता है। इससे शरीर संक्रमण से मजबूती के साथ नहीं लड़ पाता है।

सवाल- फूड पॉइजनिंग के लक्षण क्या हैं?

जवाब- फूड पॉइजनिंग की शुरुआत में उल्टी और दस्त जैसे लक्षण दिखते हैं। समय पर ध्यान न देने से लक्षण गंभीर हो सकते हैं। सभी लक्षण ग्राफिक में देखिए-

सवाल- फूड पॉइजनिंग के लक्षण कितने समय में दिखते हैं?

जवाब- इसके लक्षण आमतौर पर कुछ घंटों से लेकर 1–2 दिन के भीतर दिखते हैं। हालांकि यह इस बात पर निर्भर करता है कि संक्रमण किस बैक्टीरिया या वायरस से हुआ है।

  • कुछ मामलों में 2-6 घंटे में उल्टी-दस्त शुरू हो सकते हैं।
  • कई बार 12-24 घंटे बाद लक्षण दिखाई देते हैं।
  • कुछ इन्फेक्शन के लक्षण 2-3 दिन बाद भी दिखाई दे सकते हैं।

सवाल- किन लोगों को फूड पॉइजनिंग का रिस्क ज्यादा होता है?

जवाब- इन लोगों को रिस्क ज्यादा होता है-

  • जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है।
  • जिन्हें कोई हेल्थ कंडीशन (डायबिटीज, किडनी डिजीज) है।
  • जो बाहर का खाना या स्ट्रीट फूड ज्यादा खाते हैं।
  • छोटे बच्चे (खासकर 5 साल से कम उम्र)।
  • बुजुर्ग (60 साल से ऊपर)।
  • गर्भवती महिलाएं।

सवाल- बारिश में फूड पॉइजनिंग से बचने के लिए क्या करें?

जवाब- इसके लिए साफ-सफाई, सही भोजन का चुनाव और स्टोरेज का ध्यान रखना सबसे जरूरी है। छोटी-छोटी सावधानियां हमें इस समस्या से बचा सकती हैं। बचाव के सभी जरूरी उपाय ग्राफिक में देखिए-

सवाल- बारिश में फूड पॉइजनिंग से बचाव के लिए खानपान में क्या बदलाव करें?

जवाब- सही खानपान ही फूड पॉइजनिंग से बचाव का आसान तरीका है। नीचे देखें कि इस मौसम में क्या खाएं और क्या न खाएं।

क्या खाएं

  • ताजा, गरम और अच्छी तरह पका हुआ खाना।
  • घर का बना खाना।
  • दाल, खिचड़ी, सूप जैसी हल्की डाइट।
  • उबली या स्टीम की हुई सब्जियां।
  • दही, छाछ जैसे प्रोबायोटिक।
  • उबला/फिल्टर किया हुआ पानी।
  • मौसमी फल (अच्छे से धोकर)।

क्या न खाएं

  • खुले में रखा खाना।
  • स्ट्रीट फूड।
  • बासी खाना।
  • खुले में रखे कटे हुए फल।
  • अधपका मीट, अंडा या सीफूड।
  • ज्यादा तला-भुना और मसालेदार खाना।
  • पैकेज्ड फूड।
  • बिना धुले फल-सब्जियां।

सवाल- अगर बाहर खाना मजबूरी हो तो किन बातों का ध्यान रखें?

जवाब- बाहर ऐसी जगह खाएं, जहां साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता हो। इसके अलावा कुछ बातों का ध्यान रखें-

  • बहुत ज्यादा भीड़भाड़ वाली जगह न जाएं।
  • खाना खाने से पहले हाथ जरूर धोएं।
  • बोतलबंद या पैक्ड पानी ही पिएं।
  • ताजा और गरम खाना ही ऑर्डर करें।
  • खुले में रखा या पहले से बना खाना न लें।
  • कच्चा सलाद, कटे फल और चटनी न लें।
  • खाने का स्वाद अजीब हो तो तुरंत छोड़ दें।
  • बर्फ वाले ड्रिंक्स न पिएं।
  • कच्चा या अधपका नॉनवेज न खाएं।
  • एक्सपायरी डेट देखकर ही पैक्ड फूड खरीदें।

सवाल- मानसून में घर में खाना स्टोर करते समय क्या सावधानियां बरतें?

जवाब- खाना स्टोर करते समय बरतें ये सावधानियां-

  • पका हुआ खाना ठंडा होने के बाद ही फ्रिज में रखें।
  • खाने को एयरटाइट कंटेनर में स्टोर करें।
  • कच्चा और पका खाना अलग-अलग रखें।
  • फ्रिज का तापमान सही रखें (लगभग 4°C)।
  • बासी या स्मेल वाला खाना तुरंत फेंक दें।
  • फ्रिज और किचन की नियमित सफाई करें।
  • बार-बार गर्म करके खाना स्टोर न करें।

सवाल- अगर फूड पॉइजनिंग हो जाए तो क्या करें?

जवाब- ऐसी स्थिति में शरीर को हाइड्रेट रखना और डाइजेस्टिव सिस्टम को आराम देना जरूरी है। हल्के लक्षणों में घर पर देखभाल से सुधार हो सकता है, लेकिन समस्या बढ़ने पर डॉक्टर से कंसल्ट करें।

फूड पॉइजनिंग में इन बातों का ध्यान रखें-

  • ज्यादा से ज्यादा पानी, ORS या नारियल पानी लें।
  • हल्का और सुपाच्य खाना (खिचड़ी, दही, सूप) खाएं।
  • शरीर को पर्याप्त आराम दें।
  • खुद से एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं न लें।

सवाल- फूड पॉइजनिंग का इलाज कैसे होता है?

जवाब- इसका इलाज लक्षणों की गंभीरता पर निर्भर करता है, जैसेकि-

  • डॉक्टर शरीर में पानी की कमी पूरी करने के लिए ORS देते हैं।
  • उल्टी और दस्त कंट्रोल करने के लिए दवाएं देते हैं।
  • बैक्टीरियल इन्फेक्शन में एंटीबायोटिक देते हैं।
  • ज्यादा कमजोरी या डिहाइड्रेशन में ड्रिप (IV फ्लूड) लगाया जा सकता है।

सवाल- डॉक्टर को कब दिखाएं?

जवाब- फूड पॉइजनिंग के इन लक्षणों को इग्नोर न करें, क्योंकि ये गंभीर संक्रमण का संकेत हो सकते हैं। इन स्थितियों में डॉक्टर को जरूर दिखाएं-

  • बार-बार उल्टी हो।
  • दस्त के साथ ब्लीडिंग हो।
  • तेज बुखार (103°F से ज्यादा) हो।
  • डीहाइड्रेशन (चक्कर, सूखा मुंह, कम पेशाब) हो।

……………………

जरूरत की ये खबर भी पढ़िए

जरूरत की खबर- मानसून में बढ़ रहे कीड़े और कॉकरोच: 10 सावधानी रखेंगे तो कीड़े नहीं आएंगे, एक्सपर्ट से जानें भगाने के 7 घरेलू उपाय

गर्मी के बाद बारिश का मौसम राहत लेकर आता है, लेकिन इस मौसम में नमी और सीलन बढ़ती है और जगह-जगह पानी जमा हो जाता है। कीड़ों के पनपने के लिए ये स्थितियां अनुकूल हैं। यही कारण है कि बारिश में घरों में कीड़े, कॉकरोच और मच्छर भी बढ़ जाते हैं। पूरी खबर पढ़िए…

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *