Parenting Tips Lucknow | How To Teach Kids To Choose Right Friends


3 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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सवाल- मैं लखनऊ से हूं। मेरा बेटा 12 साल का है। हाल ही में उसका स्कूल बदला है। उसने वहां कुछ नए दोस्त बनाए हैं और अब उन्हीं के साथ ज्यादा समय बिताता है। एक मां होने के नाते मुझे खुशी है कि वह घुल-मिल रहा है, लेकिन यह चिंता भी रहती है कि कहीं वह गलत संगत में न पड़ जाए। मैं हर दोस्त की जांच-पड़ताल भी नहीं करना चाहती। मेरा सवाल ये है कि बच्चों को कैसे समझाएं कि कौन-सी दोस्ती उनके लिए अच्छी है? किस तरह के लोगों से दूरी बनाना बेहतर है?

एक्सपर्ट- रिद्धि दोषी पटेल, चाइल्ड एंड पेरेंटिंग साइकोलॉजिस्ट, मुंबई

जवाब- सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। आपकी चिंता स्वाभाविक है। जब बच्चा नए स्कूल में जाता है तो नए माहौल में खुद को एडजस्ट करता है और नए दोस्त बनाता है। ऐसे में लगभग हर माता-पिता के मन में यही सवाल आता है कि उसके नए दोस्त कैसे होंगे और उनका उस पर क्या असर पड़ेगा।

  • सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि 12-14 साल की उम्र बच्चों के सोशल डेवलपमेंट की सबसे अहम स्टेज होती है।
  • इस उम्र में बच्चे धीरे-धीरे परिवार से बाहर अपनी पहचान बनाना शुरू करते हैं।
  • वे दोस्तों के साथ ज्यादा समय बिताना चाहते हैं, उनकी राय को महत्व देने लगते हैं और कई बार उनके जैसा बनने की कोशिश भी करते हैं।
  • यही कारण है कि इस उम्र में बच्चे के दोस्त उसके व्यवहार, आत्मविश्वास, पढ़ाई और निर्णय लेने की क्षमता पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं।

ऐसे में पेरेंट्स का लक्ष्य बच्चे के लिए अच्छा दोस्त चुनने की बजाय अपने बच्चे को इतना समझदार बनाना होना चाहिए कि वह खुद अच्छे और बुरे में फर्क कर सके।

बच्चों के जीवन में दोस्ती का प्रभाव

जब बच्चा छोटा होता है, तब उसके लिए माता-पिता सबसे बड़े रोल मॉडल होते हैं। लेकिन जैसे-जैसे वह टीनएज के करीब पहुंचता है, उसकी जिंदगी में दोस्तों की भूमिका बढ़ने लगती है। इस उम्र में बच्चा चाहता है कि-

  • उसे स्वीकार किया जाए।
  • वह किसी ग्रुप का हिस्सा बने।
  • लोग उसे पसंद करें।
  • उसके ढेर सारे दोस्त बनें।

इसी वजह से कई बार बच्चे दोस्तों की आदतें, भाषा, व्यवहार, रुचियों और शौक को अपनाने लगते हैं। यह विकास का सामान्य हिस्सा है। लेकिन समस्या तब होती है, जब बच्चा दोस्ती में बने रहने के लिए अपनी समझ और मूल्यों को नजरअंदाज करने लगता है।

अच्छा दोस्त कैसा होता है?

अक्सर माता-पिता बच्चों को यह बताते हैं कि किससे दोस्ती नहीं करनी चाहिए। लेकिन उससे ज्यादा जरूरी यह बताना है कि अच्छी दोस्ती कैसी होती है। आप बेटे से बातचीत के दौरान पूछ सकती हैं-

  • ‘’क्या दोस्त तुम्हारी इज्जत करता है?‘’
  • ‘’क्या वह तुम्हारी बात सुनता है?‘’
  • ‘’क्या उसके साथ रहने पर तुम्हें अच्छा महसूस होता है?‘’

जब बच्चा इन सवालों पर सोचता है, तो वह धीरे-धीरे दोस्ती की क्वालिटी को समझना शुरू करता है। हमें बच्चों को ये बताना चाहिए कि एक अच्छे दोस्त की पहचान क्या होती है।

दोस्ती में सम्मान और भरोसा जरूरी

कई बच्चे सोचते हैं कि जो उनके साथ सबसे ज्यादा समय बिताता है, वही उनका सबसे अच्छा दोस्त है। लेकिन असल में अच्छी दोस्ती का आधार सम्मान और भरोसा होता है। उसे बताएं कि एक अच्छा दोस्त-

  • “आपका मजाक नहीं उड़ाता।”
  • “आपकी कमजोरियों का फायदा नहीं उठाता।”
  • “आपकी सफलता से जलता नहीं है।”
  • “गलत काम के लिए दबाव नहीं डालता है।”
  • “जरूरत पड़ने पर आपके साथ खड़ा रहता है।”

साथ ही बच्चे को समझाएं कि दोस्ती में डर, दबाव या अपमान की कोई जगह नहीं होती है।

बच्चे के दोस्तों में दिखाएं रुचि

बहुत से माता-पिता बच्चे के दोस्तों में रुचि नहीं दिखाते, जबकि इससे बच्चे को इमोशनल सपाेर्ट मिलता है। आप बच्चे से पूछ सकते हैं-

  • “आज स्कूल में किसके साथ बैठे थे?”
  • “तुम्हें उसमें क्या अच्छा लगता है?”
  • “तुम लोग साथ में क्या करते हो?”

जब बच्चा महसूस करता है कि आप उसकी दोस्ती को समझना चाहते हैं, तब वह खुलकर बातें करता है।

बच्चे की जासूसी न करें

कई बार पेरेंट्स बच्चे के दोस्तों को जानने-समझने के लिए जासूसी करते हैं या हमेशा पूछताछ करते रहते हैं। ये हेल्दी तरीका नहीं है। बच्चे के दोस्त कैसे हैं, उसकी संगत कैसी है, इसे परखने के लिए कुछ आसान तरीके अपना सकते हैं, जैसेकि-

कैसे समझें, बच्चा बुरी संगत में है?

टीनएज में बच्चे दोस्तों से बहुत कुछ सीखते हैं। लेकिन अगर नए दोस्त बनाने के बाद बच्चे के व्यवहार, आदतों या सोच में नकारात्मक बदलाव दिखे तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि बच्चे की संगत ठीक नहीं है। ग्राफिक में सभी वॉर्निंग साइन देखिए-

अगर बच्चे में ये संकेत दिखें तो सतर्क हो जाएं। डांटने की बजाय बच्चे से खुलकर बात करें।

संगत खराब हो तो क्या करें?

पहले स्थिति को समझने की कोशिश करें। आपका उद्देश्य दोस्ती खत्म कराना नहीं, बल्कि बच्चे को सही-गलत समझने में मदद करना होना चाहिए। इसके लिए कुछ कदम उठा सकते हैं-

पेरेंट्स की कॉमन गलतियां

कई बार माता-पिता बच्चे के दोस्तों को बिना जाने-समझे जज कर लेते हैं। इससे बच्चा अपनी साेशल लाइफ छिपाने लगता है और पेरेंट्स से दूर होने लगता है। इसलिए इन गलतियों से बचें-

  • हर दोस्त को बुरा मान लेना।
  • दोस्ती पर पूरी रोक लगा देना।
  • बच्चे की बात सुने बिना फैसला करना।
  • दूसरों बच्चों से तुलना करना।
  • दोस्तों का अपमान करना।
  • हर समय निगरानी रखना।
  • बिना वजह शक करना।
  • दोस्तों के सामने बच्चे को शर्मिंदा करना।
  • अपनी पसंद बच्चे पर थोपना।

अंत में यही कहूंगी कि दोस्ती बच्चे की पर्सनैलिटी को शेप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए माता-पिता का काम हर दोस्त को कंट्रोल करना नहीं, बल्कि बच्चे को अच्छे और बुरे प्रभाव में फर्क करना सिखाना है। जब घर में भरोसे और बातचीत का माहौल होता है, तो बच्चा किसी भी परेशानी या गलत प्रभाव के बारे में खुलकर बात करने में सहज महसूस करता है। यही भरोसा उसे सही दोस्त चुनने और जीवन में बेहतर फैसले लेने में मदद करता है।

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