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जाट समाज का फैसला-मृत्युभोज बंद, रस्म पगड़ी भी रोकी:शादी में बेटियों को बर्तन-गिफ्ट देने पर मनाही; नारनौल में प्रधान बोले-इनके बोझ से रिश्ते नहीं चलते




हरियाणा के नारनौल के नांगल चौधरी क्षेत्र में जाट समाज ने सामाजिक कुरीतियों और अनावश्यक लेन-देन को लेकर कुछ परंपराओं पर रोक लगाने का फैसला लिया है। समाज के अनुसार मृत्यु के बाद होने वाला भोज पूरी तरह बंद रहेगा। दूर से आने वाले रिश्तेदारों के लिए केवल सब्जी-रोटी या दाल-रोटी की व्यवस्था की जाएगी। दिवंगत के घर होने वाली रस्म पगड़ी पर भी रोक रहेगी। वहीं शादी या अन्य खुशी के अवसरों पर बेटियों की ओर से बर्तन बांटने या किसी भी तरह के गिफ्ट देने की रस्म भी नहीं होगी। जाट सभा के प्रधान कुलदीप जेलदार के अनुसार, ये रस्में अब समाज को जोड़ने की जगह बोझ बनती जा रही हैं और इससे रिश्ते नहीं चलते। उन्होंने बताया कि ये फैसला 20 सितंबर को लिया गया था। इसको लेकर आज रविवार को पांच गांवों में कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां इसे आज से लागू कर दिया गया है। 20 सितंबर को फैसले, 26 से जनजागरण अभियान जाट समाज के मुताबिक, इन फैसलों को 20 सितंबर को लिया गया था। इसके बाद 26 सितंबर से शनिवार और रविवार को गांवों में जनजागरण कार्यक्रम शुरू किए गए। अब तक करीब 20 गांवों में कार्यक्रम किए जा चुके हैं। अभियान का उद्देश्य समाज के लोगों को इन फैसलों और उनके पीछे की सोच के बारे में जागरूक करना है। पांच गांवों में ग्रामीणों से संवाद के बाद लागू आज रविवार को पवेरा, नापला, निजामपुर, ढाणी अलगोजियां और दनचोली गांवों में कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें समाज में चल रहे दिखावे, सामाजिक कुरीतियों और अनावश्यक लेन-देन पर चर्चा हुई। जिसके बाद पांचों गांव ने इन फैसलों को लागू करने की बात कही। जाट सभा के प्रधान कुलदीप जेलदार के नेतृत्व में चल रहे अभियान में मुख्य वक्ता सतपाल दहिया ने कहा कि समाज को तय करना होगा कि रिश्तों को प्राथमिकता देनी है या ऐसी रस्मों को, जिनसे परिवारों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। मृत्युभोज से दुखी परिवार पर बढ़ता है सामाजिक दबाव सतपाल दहिया ने कहा कि किसी परिवार में मृत्यु होने के बाद परिजन पहले ही दुख में होते हैं। ऐसे समय में भोज की व्यवस्था करना परिवार पर अतिरिक्त जिम्मेदारी डालता है। उन्होंने समाज में दिखावे और एक-दूसरे से आगे निकलने की सोच पर भी सवाल उठाया और ऐसी परंपराओं पर पुनर्विचार की बात कही। दिवंगत के घर टीका और शादी में बेटियों के लेन-देन पर रोक पूर्व सरपंच रामनिवास कालबा ने मृत्यु के बाद होने वाले टीके के लेन-देन को अनुचित बताया। वहीं नांगल चौधरी के पूर्व एएसआई ओमप्रकाश ने शादी और खुशी के अवसरों पर बेटियों से जुड़े लेन-देन की परंपराओं को गलत बताया। अभियान में तय किया गया है कि बेटियों के परिवार की ओर से शादी समारोहों में बर्तन बांटने या किसी भी तरह के उपहार देने की रस्म नहीं होगी। जाट सरपंचों और ग्रामीणों से मिल रहा समर्थन अभियान से जुड़े लोगों के अनुसार, नांगल चौधरी क्षेत्र के कई जाट बहुल गांवों में इसे समर्थन मिल रहा है। जिन गांवों में जाट समाज के सरपंच हैं, वहां भी सरपंच कार्यक्रमों में साथ दिखाई दे रहे हैं। अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि इसका उद्देश्य केवल फैसले घोषित करना नहीं, बल्कि उन्हें सामाजिक स्तर पर व्यवहार में लाना है। कुलदीप जेलदार के नेतृत्व में दो दर्जन से ज्यादा लोग जुटे जाट सभा के प्रधान कुलदीप जेलदार के नेतृत्व में ये अभियान चल रहा है। अभियान के तहत शनिवार और रविवार को अलग-अलग गांवों में जनजागरण कार्यक्रम किए जा रहे हैं।



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