![]()
आसमानी महंगाई के इस दौर में अनाज मंडियों की धुरी कहे जाने वाले मजदूरों की हालत दयनीय बनी हुई है। दूर-दराज के राज्यों, खासकर बिहार से रोजी-रोटी की तलाश में यहां पहुंचे मजदूर अब सरकार से अपनी मजदूरी की दरें रिवाइज करने की मांग कर रहे हैं। मजदूरों का कहना है कि हर जरूरी चीज के दाम तेजी से बढ़े हैं, लेकिन उनकी हाड़-तोड़ मेहनत के एवज में सरकार की ओर से तय रेट नगण्य हैं। मजदूरों की समस्याओं और मजदूरी दर से जुड़े इस पूरे मामले पर संज्ञान लिया जाएगा। मार्केट कमेटी और संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट लेकर नियमानुसार उचित कदम उठाए जाएंगे। चार-चार काम और मजदूरी सिर्फ 11 रुपए 68 पैसे मंडी में काम करने का पूरा प्रोसीजर काफी जटिल और थका देने वाला है। एक मजदूर को धान की फसल से भरी ट्रॉली को खाली करना होता है, जिसके बाद फसल को बोरियों में भरा जाता है। फिर भारी-भरकम बोरियों को कांटे पर तुलवाया जाता है और अंत में उन्हें गोदामों या तय स्थान पर रखवाया (स्टैकिंग) जाता है। इस पूरी कड़ी मजदूरी के लिए सरकार और मार्केट कमेटी की तरफ से इस साल प्रति बोरी ₹11.68 रुपए का रेट तय किया गया है। पिछले साल यह रेट ₹11.31 प्रति बोरी था। यानी पूरे एक साल में प्रति बोरी मजदूरी में महज 37 पैसे का इजाफा हुआ है। मजदूरों का कहना है कि यह बढ़ोतरी ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। खाली बैठने को मजबूर, महीने की कमाई सिर्फ 8 से 10 हजार बिहार से आए मंडी मजदूरों का कहना है कि फसल सीजन के दौरान भी मंडी में रोजाना एक समान काम नहीं मिलता। कई दिन ऐसे आते हैं जब मंडी में ट्रॉलियों की आवक कम होती है या बिल्कुल नहीं होती, जिससे उन्हें पूरा-पूरा दिन खाली बैठना पड़ता है। अगर पूरे महीने का औसत निकाला जाए, तो एक मजदूर मुश्किल से 8,000 से 10,000 रुपए ही कमा पाता है। इस मामूली रकम में से खुद का खर्च निकालने के बाद वे घर-परिवार के पालन-पोषण के लिए नाममात्र की राशि ही भेज पाते हैं। किसान बोले- मजदूर ही मंडी की रीढ़, सरकार बढ़ाए रेट मजदूरों की इस जायज मांग का स्थानीय किसानों ने भी खुलकर समर्थन किया है। किसानों का कहना है कि मजदूर, किसान और आढ़ती के बीच एक मजबूत कड़ी और रीढ़ की हड्डी का काम करता है। अगर मजदूर को उसकी मेहनत का सही फल नहीं मिलेगा, तो मंडी की पूरी व्यवस्था चरमरा जाएगी। इसलिए सरकार को व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए मजदूरी के रेट तुरंत रिवाइज करने चाहिए।
Source link
पानीपत में महंगाई के दौर में मंडी मजदूरों का दर्द:एक बोरी धान उतारने-भरने-तोलने के मिलते हैं ₹11.68; एक साल में बढ़ी 37 पैसे मजदूरी
