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पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए उन पर तल्ख कमेंट किए हैं। गहलोत ने कहा- सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद पूरा देश ज्ञानेश कुमार से पूछ रहा है कि अब कोई शर्म बची हुई है आपकी? गहलोत पूर्व राज्यसभा सांसद अश्कअली टाक की पहली पुण्यतिथि पर हुए कार्यक्रम से पहले जयपुर के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में मीडिया से बातचीत कर रहे थे। गहलोत ने कहा- इन्होंने आपसी बैठक करके और तीनों सदस्यों को साथ बिठाकर एक प्रेस नोट जारी करने तथा सफाई देने का प्रयास किया। उसमें यह दावा किया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने उनके फैसले को बरकरार रखा है। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि उन्होंने न तो कोई फैसला बरकरार रखा है और न ही इस पर कोई टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट के इस स्पष्टीकरण के बाद अब क्या बच जाता है? अब बच गया है उनका इस्तीफ़ा होना। स्वास्थ्य कारणों से उपराष्ट्रपति का इस्तीफा हो सकता है तो ज्ञानेश का क्यों नहीं? गहलोत ने कहा- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह इस मामले में इंटरवीन क्यों नहीं कर रहे हैं? यदि तत्कालीन उपराष्ट्रपति का अचानक ‘स्वास्थ्य कारणों’ से इस्तीफा कराया जा सकता है जिसके पीछे का सच क्या था, यह तो वे ही जानते होंगे। लोगों को भी उस पर संदेह था तो ज्ञानेश कुमार जी का इस्तीफा स्वास्थ्य कारणों से क्यों नहीं कराया जा सकता? कम से कम एक चैप्टर क्लोज़ तो हो और पक्ष-विपक्ष अपनी भूमिका अदा करना शुरू तो करे। अगर 19 दिन तक हाउस के अंदर प्राइम मिनिस्टर और अमित शाह नहीं आए यह एक बड़ा इश्यू था। इसलिए मैं कहना चाहूंगा कि ज्ञानेश कुमार का तत्काल इस्तीफा होना चाहिए।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल गहलोत ने कहा- एक दौर था जब भारतीय निर्वाचन आयोग की साख न केवल देश में, बल्कि पूरी दुनिया में स्थापित थी। दुनिया के कई देशों में जब चुनाव होते थे, तो भारतीय निर्वाचन आयोग से मार्गदर्शन और सहयोग लिया जाता था। दुर्भाग्य से, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आने के बाद जिस प्रकार मिलीभगत से फैसले लिए गए, उसने आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ज्ञानेश ने कभी विपक्षी दलों का सम्मान नहीं किया गहलोत ने कहा- राहुल गांधी ने बहुत पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वोटों की चोरी हो रही है और SIR गलत हो रहा है लेकिन तब किसी ने ध्यान नहीं दिया। ज्ञानेश कुमार ने जिस भाषा और शैली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की, वैसी उम्मीद देश के मुख्य चुनाव आयुक्त से कदापि नहीं की जा सकती। विपक्षी दलों को सम्मान देना उनकी ड्यूटी है, लेकिन उन्होंने किसी का सम्मान नहीं किया। यह तमाशा देश पिछले लगभग एक साल से देख रहा है। एक-एक कर ज्ञानेश के झूठ पकड़े जा रहे हैं गहलोत ने कहा- अब एक-एक कर उनके झूठ पकड़े जा रहे हैं। हाल ही में जब यह खुलासा हुआ, तो पूरा देश स्तब्ध रह गया। आयोग के ही दो सदस्य यह आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने 14 बार आपत्तियां दर्ज कराईं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई और उन्हें कैबिनेट सचिव को पत्र लिखना पड़ा। हालांकि उन्हें राष्ट्रपति को पत्र लिखना चाहिए था लेकिन देश की शीर्ष निर्वाचन संस्था की यह नौबत आ जाना बेहद चिंताजनक है। गहलोत ने कहा- आज पूरे देश में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और सभी राजनीतिक दल सड़कों पर हैं। पूरे देश में इस स्थिति को लेकर आक्रोश है। यदि निर्वाचन आयोग ही निष्पक्ष नहीं रहेगा, तो लोकतंत्र कहां बचेगा? तो क्या यहां तानाशाही पूर्ण शासन करना चाहते हैं, जैसा कि चीन, उत्तर कोरिया या रूस जैसे देशों में नाममात्र के चुनावों के रूप में देखा जाता है? हमारी चुनाव प्रणाली और लोकतंत्र पर संकट गहलोत ने कहा- हमारी चुनाव प्रणाली और लोकतंत्र पर बने इस संकट से दुनिया भर में भारत का क्या संदेश जा रहा है? जो देश कभी भारत से प्रेरणा लेते थे कि दुनिया में लोकतंत्र के संदेश को फैलाया और मजबूत किया है, आज वही देख रहे हैं कि यहां चुनाव आयोग खुद SIR के नाम पर 12-13 करोड़ मतदाताओं के नाम काट रहा है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के एक जज साहब की यह टिप्पणी भी आई कि “अगली बार वोट दे देंगे।” मैं इसे बहुत खतरनाक संदर्भ मानता हूं। हो सकता है कि जज साहब ने यह बात किस परिप्रेक्ष्य में कही हो, लेकिन जनता में संदेश गलत गया कि जो मतदाता इस बार वोट देने से वंचित रह गए, वे अगली बार दे दें यह तर्कसंगत नहीं है।
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गहलोत बोले- ज्ञानेश कुमार अब शर्म बची है क्या आपकी?:मोदी-शाह हस्तक्षेप करें; उपराष्ट्रपति की तरह स्वास्थ्य कारणों से मुख्य निर्वाचन आयुक्त का करवा दें इस्तीफा
