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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु ने कहा कि पंचायत विभाग के कर्मचारी सरकारी नहीं है और उनके लिए लागू सेवा नियमों में पेशन का प्रावधान नहीं है। ऐसे में उनके पेंशन का दावा करना गलत है। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने पंचायतों के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन देने की मांग करने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। उर्मिला पाणिग्रही समेत अलग-अलग जिलों के कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। इसमें कहा गया कि उन्होंने पंचायत विभाग में लंबे समय तक सेवाएं दी और सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें पेंशन नहीं दी जा रही है। याचिकाकर्ताओं ने पंचायत राज अधिनियम की धारा 131 का हवाला देते हुए कहा था कि पुराने कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और सेवानिवृत्ति लाभ दिया जाना चाहिए। गुंडरदेही और तखतपुर के कर्मचारियों को मिल रहा पेंशन
याचिकाकताओं ने कोर्ट को यह भी बताया था कि बालोद की गुंडरदेही और बिलासपुर जिले के तखतपुर जनपद पंचायत में कुछ कर्मचारियों को पेंशन मिल रही है। लिहाजा, याचिकाकर्ताओं को भी पेंशन योजना का लाभ मिलना चाहिए। शासन का जवाब-स्थानीय स्तर पर बने पेंशन कोष से भुगतान
इस मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने जवाब में बताया कि गुंडरदेही में तीन और तखतपुर में तीन कर्मचारियों को स्थानीय स्तर पर बनाए गए पेंशन कोष से भुगतान हो रहा है। यह राज्य सरकार की किसी वैधानिक पेंशन योजना के तहत नहीं है। इन भुगतानों को लेकर संबंधित अधिकारियों को अगस्त 2026 में कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए हैं। हाईकोर्ट ने कहा- धारा 131 से नया पेंशन अधिकार नहीं बनता
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 131 केवल पहले से मौजूद वेतन, भत्ते, पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों को सुरक्षित रखने वाला प्रावधान है। इससे ऐसा पेंशन अधिकार पैदा नहीं होता, जो कर्मचारी को पहले से सेवा नियमों या किसी वैधानिक योजना के तहत मिला ही नहीं था। हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति के समय सेवानिवृत्ति लाभ भविष्य निधि योजना के तहत थे। उनकी सेवा के दौरान ऐसा कोई बदलाव भी नहीं हुआ, जिससे उन्हें पेंशन का अधिकार मिल गया हो। दूसरी पंचायत में पेंशन मिलने का तर्क भी नहीं माना
हाईकोर्ट ने कहा कि किसी जनपद पंचायत द्वारा अपने स्तर पर पेंशन देने से दूसरे कर्मचारियों के लिए वैधानिक अधिकार पैदा नहीं हो सकता। खासकर तब, जब राज्य सरकार खुद ऐसे भुगतान की वैधानिकता पर सवाल उठा चुकी है। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि न्यायपालिका कानून बनाने या सरकार को किसी विशेष तरीके से कानून बनाने का निर्देश नहीं दे सकती। यदि किसी लाभ का प्रावधान लागू कानून में नहीं है तो कोर्ट केवल इस आधार पर उसे देने का आदेश नहीं दे सकता कि वह लाभ उचित या वांछनीय लगता है। जानिए…किस आधार पर नहीं मिलती पेंशन
पंचायत कर्मचारियों को पेंशन नहीं देने का मुख्य कानूनी आधार छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 का नियम 2(2)(घ) है। इस नियम के अनुसार, अंशदायी भविष्य निधि का लाभ पाने वाले कर्मचारियों पर सिविल सेवा पेंशन नियम लागू नहीं होते। इसके अलावा, छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (भर्ती एवं सेवा की सामान्य शर्तें) नियम, 1999 के तहत पंचायत कर्मचारियों को पेंशन देने का कोई प्रावधान नहीं है।
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पंचायत कर्मियों को पेंशन का अधिकार नहीं:हाईकोर्ट बोला-सरकारी कर्मचारी नहीं हैं, इसलिए पेंशन का दावा गलत, रिटायर्ड कर्मचारियों की 24 याचिकाएं खारिज
