पंजाब के CM ऑफिस में कथित कैश फॉर ट्रांसफर-पोस्टिंग करप्शन केस की CBI जांच के खिलाफ AAP सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। सीनियर एडवोकेट विकास सिंह पंजाब सरकार की तरफ से पेश हुए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मामले की अर्जेंट लिस्टिंग की मांग की।
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CJI सूर्यकांत: आज नहीं
एडवोकेट सिंह: तो कल। चुनाव के समय इस तरह के मामलों को तूल दिया जा रहा है… विजय मदनलाल चौधरी के फैसले में स्पष्ट रूप से कहा गया है… । CJI: हम देखेंगे कि कितने मामले सूचीबद्ध हैं। कुछ नहीं होगा।
एडवोकेट सिंह: यह संघीय ढांचे के उल्लंघन का स्पष्ट मामला है।
CJI: हम कल कोशिश करेंगे। अन्यथा परसों, निश्चित रूप से।
बता दें कि पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कल (5 अक्टूबर) को मामले की सुनवाई करते हुए CBI जांच के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट ने CM के OSD राजबीर सिंह घुम्मन के खिलाफ FIR दर्ज कर 2 महीने में जांच रिपोर्ट मांगी थी।
विकास सिंह ने कोर्ट में क्या कहा…
- सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने कहा कि DGP को यह कम्युनिकेशन जुलाई में किया गया था। उन्होंने विजय मदनलाल चौधरी मामले के पैराग्राफ 151 का हवाला देते हुए कहा कि तभी आगे की कार्रवाई हो सकती है, जब कोई संज्ञेय अपराध बनता हो। उस मामले में भी बड़ी मात्रा में नकदी मिलने की स्थिति थी।
- उन्होंने कहा कि यह ऐसा सामान्य मामला नहीं है, जिसमें ED यह कहे कि FIR दर्ज की जाए। पंजाब सरकार मामले की जांच कर रही थी। ED की ओर से दिए गए दस्तावेज भी स्पष्ट नहीं थे।
- विकास सिंह ने कहा कि हाईकोर्ट ने कल CBI को FIR दर्ज करने का आदेश दिया है, जबकि CBI को FIR दर्ज करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता।
- उन्होंने कहा कि उनकी मांग है कि SLP को आज ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। अगर ऐसा नहीं हो सकता तो कल सुनवाई की जाए।
- विकास सिंह ने कहा- मैं पंजाब सरकार की ओर से पेश हो रहा हूं। ये सभी हमारे अधिकारी हैं। यह मामला ट्रांसफर, पोस्टिंग और इनसे जुड़े आरोपों का है। ऐसा लगता है कि चुनाव के समय इस तरह के मामले उठाए जा रहे हैं।
- उन्होंने कहा कि अगर कोई आपराधिकता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन विजय मदनलाल चौधरी मामले के पैराग्राफ 151 में यह बात स्पष्ट रूप से कही गई है।

अब विस्तार से पढ़िए पूर मामला…
- डीजीपी को पत्र भेजकर FIR की मांग की: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब के डीजीपी गौरव यादव को चिट्ठियां भेजकर कथित भ्रष्टाचार और सरकारी कामकाज में दखल के मामले में FIR दर्ज करने की मांग की है। ED की जांच में ट्रांसफर-पोस्टिंग, सरकारी टेंडर, नीतिगत फैसलों, जमीन के इस्तेमाल में बदलाव और दूसरे सरकारी कामों को प्रभावित करने के आरोप सामने आने की बात कही गई है। जुलाई और अगस्त 2026 में भेजे गए पत्रों को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में भी मामला पहुंचा।
- जांच CM के OSD का नाम सामे आया: ED की कार्रवाई में नितिन गोहल, रियल एस्टेट कारोबारी अजय सहगल, सुरेश कुमार बजाज और अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं। जांच में मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन से जुड़े संपर्कों का भी उल्लेख किया गया है। ED का आरोप है कि कुछ लोग सरकारी अधिकारियों की पोस्टिंग-ट्रांसफर और दूसरे प्रशासनिक फैसलों को प्रभावित करने के लिए बिचौलिये की भूमिका निभा रहे थे।
- ट्रांसफर-पोस्टिंग से लेकर टेंडर तक: ED के मुताबिक, जांच में मिले चैट और अन्य सामग्री में अधिकारियों की पोस्टिंग, तबादलों और सरकारी पदों पर नियुक्ति से जुड़ी बातचीत का उल्लेख है। मार्कफेड के टेंडर, अधिकारियों की पोस्टिंग, लाइसेंस और अन्य सरकारी मंजूरियों को प्रभावित करने के आरोप भी लगाए गए हैं। ED ने भ्रष्टाचार निवारण कानून के साथ-साथ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी धाराओं के तहत अपराध बनने की बात कही है।
- ED को तलाशी में क्या मिला: ED ने मई 2026 में नितिन गोहल, अजय सहगल और अन्य से जुड़े ठिकानों पर तलाशी ली थी। एजेंसी के मुताबिक इस दौरान दस्तावेज और डिजिटल सामग्री मिली। करीब एक करोड़ रुपए नकद बरामद होने का भी दावा किया गया है। ED ने मोबाइल फोन से मिले वॉट्सऐप चैट और कॉल रिकॉर्ड को भी जांच का हिस्सा बनाया है।
- जमीन और रियल एस्टेट का एंगल: मामला एक बड़े चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू) और मनी लॉन्ड्रिंग जांच से भी जुड़ा है। ED की कार्रवाई मूल रूप से करीब 348 करोड़ रुपए के सनटेक सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के दौरान आगे बढ़ी। एजेंसी ने आरोप लगाया कि सरकारी अधिकारियों के जरिए कुछ रियल एस्टेट संस्थाओं को जमीन के इस्तेमाल में बदलाव और दूसरी मंजूरियां दिलाने की कोशिश की गई।
FIR दर्ज न होने पर हाईकोर्ट पहुंची ED
ED के पत्र के बाद पंजाब पुलिस ने मामले को सीधे एफआईआर में बदलने के बजाय ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन से कानूनी राय मांगी। इसी बीच ED ने दोबारा पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की। सितंबर में ED ने हाईकोर्ट को बताया कि पंजाब पुलिस को उसकी ओर से कई पत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन FIR दर्ज नहीं हुई।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अगस्त 2026 में इस मामले पर पंजाब सरकार से जवाब मांगा। कोर्ट ने कहा कि लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और राज्य से सावधानीपूर्वक जवाब अपेक्षित है। ED को डीजीपी को भेजे गए अपने पत्र कोर्ट के सामने रखने को भी कहा गया। सितंबर में मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया गया। इसके बाद अब कोर्ट ने CBI जांच के आदेश किए हैं।
पंजाब में CBI जांच से जुड़ी 2 अहम बातें…
- सीधे किसी केस की जांच नहीं कर सकती CBI: पंजाब सरकार ने 6 नवंबर 2020 को सीबीआई की जनरल कंसेंट वापस ले ली थी। उस वक्त पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुआई वाली कांग्रेस सरकार थी। इसके बाद CBI जांच के लिए आमतौर पर राज्य सरकार की केस-टू-केस मंजूरी की जरूरत होती है। जनरल कंसेंट वापस लेने का आधार दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट एक्ट की धारा 6 है, जिसके तहत राज्य की सहमति जरूरी होती है।
- क्या इस मामले में सरकार से मंजूरी लेनी होगी: नहीं, जिन मामलों में हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट यानी अदालत के आदेश हों या सीबीआई को पहले से वैध अधिकार मिला हो, वहां जांच संभव है। इसलिए इस मामले में CBI जांच कर सकती है। हाईकोर्ट ने भी पुलिस और सरकार को साफ कहा है कि वह CBI को सहयोग करें।
हाईकोर्ट के ऑर्डर की कॉपी…
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