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असम में देश विरोधी गतिविधियों के आरोप में पकड़े गए युवक की पहचान अभिषेक सिंह के रूप में हुई है। वह पूर्वी चंपारण के राजेपुर थाना क्षेत्र के सेवराहा गांव का रहने वाला बताया जा रहा है। अभिषेक के पिता सुरेंद्र सिंह सेना में सूबेदार पद से रिटायर हुए हैं। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने मुजफ्फरपुर के अहियापुर में जमीन खरीदकर घर बना लिया और वहीं रहने लगे। अभिषेक की पहचान सामने आने के बाद दैनिक भास्कर की टीम उसकी हकीकत जानने के लिए मोतिहारी से करीब 60 किलोमीटर दूर सेवराहा गांव पहुंची। गांव में टीम ने उसके चचेरे भाई और अन्य ग्रामीणों से बात की। ग्रामीणों के मुताबिक, अभिषेक का गांव से संपर्क काफी कम रहा है। वह बचपन में गांव आता था, लेकिन पिछले लंबे समय से गांव नहीं आया था। पिता के रिटायर होने के बाद गांव से संपर्क कम हुआ अभिषेक के चचेरे भाई टुनटुन सिंह ने बताया कि उसके पिता सुरेंद्र सिंह पांच भाइयों में तीसरे नंबर पर हैं। करीब 10 साल पहले वे सेना में सूबेदार पद से रिटायर हुए थे। नौकरी के दौरान परिवार का अलग-अलग जगह रहना हुआ। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने मुजफ्फरपुर के अहियापुर में जमीन खरीदी और वहीं घर बनाकर रहने लगे। टुनटुन के अनुसार, रिटायर होने से पहले सुरेंद्र सिंह कभी-कभार गांव आते-जाते थे, लेकिन रिटायरमेंट के बाद उनका गांव आना-जाना काफी कम हो गया। करीब दो साल पहले जमीन को लेकर विवाद भी हुआ था। इसके बाद से उनका गांव आना लगभग बंद हो गया। अभिषेक भी लंबे समय से गांव नहीं आया सेवराहा के ग्रामीणों ने बताया कि अभिषेक का गांव आना-जाना पहले से ही कम था। बचपन में वह गांव आता था, लेकिन बड़े होने के बाद उसका यहां आना लगभग बंद हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले काफी समय से उन्होंने अभिषेक को गांव में नहीं देखा है। अभिषेक के चचेरे भाई के अनुसार, वह तीन भाइयों में बीच वाला है और अभी उसकी शादी नहीं हुई है। बड़ा भाई आर्मी में था, बाद में छोड़ दी नौकरी ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, अभिषेक का बड़ा भाई विवेक सिंह सेना में जवान था। शादी के बाद पत्नी से तलाक हो गया। इसके बाद उसने सेना की नौकरी छोड़ दी और पिता के साथ मुजफ्फरपुर में रहने लगा। परिवार के बारे में गांव में रहने वाले लोगों से बात करने पर यह जानकारी सामने आई कि अभिषेक का अधिकांश समय गांव से बाहर ही बीता है। मेरठ में पिता की पोस्टिंग के दौरान रहा था अभिषेक ग्रामीणों ने बताया कि अभिषेक के पिता सुरेंद्र सिंह की सेना में नौकरी के दौरान मेरठ में पोस्टिंग हुई थी। उस समय अभिषेक भी उनके साथ मेरठ में रहता था। ग्रामीणों का दावा है कि इसी दौरान उसकी कुछ लोगों से मुलाकात हुई और वहीं से उसका संपर्क बना। हालांकि, यह संपर्क किन लोगों से था और उसका असम में सामने आए मामले से कोई संबंध है या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि गांव में नहीं हो सकी है। इस संबंध में जांच एजेंसियों की कार्रवाई और आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। चाचा बोले- हमें तो भास्कर से ही जानकारी मिली दैनिक भास्कर की टीम जब सेवराहा पहुंची तो अभिषेक के चाचा वीरेंद्र सिंह से भी बात हुई। उन्होंने कहा कि उन्हें अभिषेक के पकड़े जाने या उस पर लगे आरोपों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, “हमें इस बारे में कुछ पता नहीं है। आपके माध्यम से ही इसकी जानकारी मिल रही है।” गांव के लोगों का कहना है कि अभिषेक और उसका परिवार लंबे समय से मुजफ्फरपुर में रह रहा है। यही वजह है कि उसके बारे में गांव में भी बहुत कम लोगों को जानकारी है। अब जांच से सामने आएगा असम कनेक्शन अभिषेक के असम में पकड़े जाने के बाद उसके गांव और परिवार से जुड़े पुराने कनेक्शन की जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल गांव से मिली जानकारी के आधार पर इतना सामने आया है कि उसका परिवार मूल रूप से सेवराहा का रहने वाला है, लेकिन उसके पिता के सेना से रिटायर होने के बाद परिवार मुजफ्फरपुर में बस गया था। अभिषेक का मेरठ में रहना और वहां उसके संपर्क बनने की बात ग्रामीणों ने बताई है। हालांकि, इन संपर्कों और असम में सामने आए मामले के बीच क्या संबंध है, यह जांच का विषय है। असम पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियों की आधिकारिक जांच के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ होगी।
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पाकिस्तान से कनेक्शन रखने वाला अभिषेक मोतिहारी का निकला:पिता सेना से सूबेदार रिटायर्ड, 10 साल पहले मुजफ्फरपुर में बस गए; 5 साल से गांव नहीं आया
