25 मिनट पहले
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शनिवार, 10 अक्टूबर को सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या है। आश्विन मास की इस तिथि पर पितृ पक्ष खत्म होता है। इस बार यह तिथि शनिवार को है, इसलिए यह शनिश्चरी अमावस्या है। सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या और शनिवार के संयोग में किए गए धर्म-कर्म अक्षय पुण्य देते हैं, ऐसी मान्यता है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, इस दिन पितरों की तृप्ति के लिए किए गए कर्मों के साथ शनि ग्रह की अनुकूलता के लिए भी शुभ कर्म किए जा सकते हैं। इस अमावस्या पर केवल विधि-विधान से श्राद्ध करना ही नहीं, बल्कि सेवा और दान करना भी जरूरी है। छोटे बच्चों को खाना देना, जरूरतमंद की सहायता करना, रोगियों को दवाएं दान करना जैसे शुभ काम किए जा सकते हैं। दान-पुण्य के साथ ही गाय, कुत्ते और कौए को भोजन कराने की परंपरा भी पितृ कर्म से जुड़ी हुई है। कौए को पितरों का प्रतीक मानकर उसे भोजन कराया जाता है। श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को बाहरी और आंतरिक शुद्धता बनाए रखनी चाहिए। क्रोध से बचना चाहिए, घर में शांति बनाए रखनी चाहिए।
शनि के लिए कर सकते हैं ये शुभ काम
- शनिश्चरी अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद एक कलश में काला तिल, जौ, कच्चा दूध और जल भरें। इसे घर के मंदिर में स्थापित करें और दीपक जलाकर शनि मंत्र ऊँ शं शनैश्चराय नम: का जप करें। मंत्र जप कम से कम 108 बार करना चाहिए। इसके बाद इस जल को किसी पीपल के वृक्ष में अर्पित करना चाहिए। इसी तिथि पर शाम को पीपल के वृक्ष के पास घी का दीपक जलाना चाहिए।
- शनिवार को पीपल के वृक्ष का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। मान्यता है कि इस दिन पीपल में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का वास रहता है और उनकी कृपा से पितरों को बैकुंठ की प्राप्ति हो सकती है। ऐसी मान्यता है। इसलिए पितृ मोक्ष अमावस्या और शनिवार के संयोग में पीपल पूजन करने का विशेष महत्व है।
- शनिवार को किसी शनि मंदिर जाएं और शनि देव का सरसों के तेल से अभिषेक करें। शनिदेव को काले तिल, काली उड़द और काला वस्त्र चढ़ाएं।
- माना जाता है कि शनिवार को हनुमान जी की पूजा करने से कुंडली के शनि से जुड़े दोषों का प्रभाव कम होता है। इसलिए शनिवार को हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए।
- पितृ पक्ष का यह अंतिम दिन रहेगा। इस तिथि पर ज्ञात और अज्ञात पितरों के निमित्त श्राद्ध करना चाहिए। इसके साथ ही इस वर्ष जिन मृत लोगों का श्राद्ध करना भूल गए हैं, उनके लिए इस तिथि पर श्राद्ध कर्म कर सकते हैं। दोपहर में करीब 12 बजे पितरों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण आदि कर्म करना चाहिए। अब जानिए श्राद्ध करने के लिए जरूरी चीजें और श्राद्ध करने की विधि…
जरूरी चीजें- गाय के गोबर से बने कंडे, धूप देने के लिए हवन कुंड या अन्य कोई बर्तन, घी, काले तिल, चावल, गुड़, कर्पूर, जल से भरा तांबे का लोटा, फूल, बैठने के लिए आसन। अगर ये सभी चीजें उपलब्ध न हो, तो जल, तिल, कंडे के अंगारे और गुड़-घी से भी श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण करके धूप-ध्यान किया जा सकता है। आप चाहें तो खीर-पुड़ी भी बना सकते हैं। खीर-पुड़ी से भी धूप दिया जाता है।


