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ट्रेन से युवक के पैर कटे,खून के लिए तड़पता रहा:ब्लड बैंक में 3 घंटे तक कमरा खटखटाता रहा साथी, स्टाफ का अता-पता ही नहीं




अजमेर के जेएलएन हॉस्पिटल में भर्ती घायल खून के लिए तड़पता रहा लेकिन स्टाफ का अता-पता ही नहीं था। घायल 24 साल के युवक के ट्रेन से दोनों पैर कट गए थे, उसे यहां लेकर आया गया था। मंगलवार देर रात उसका साथी 3 घंटे तक वार्ड और ब्लड बैंक के चक्कर काटता रहा लेकिन स्टाफ नहीं मिला। ड्यूटी से संबंधित एक कमरा अंदर से बंद था। उसने कमरे और खाली कॉरिडोर का वीडियो भी बनाया। वहीं मामले में JLN अस्पताल अधीक्षक डॉ. अरविंद खरे ने कहा कि वे फिलहाल बाहर हैं। मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाएगी, जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। ट्रेन से कटे थे दोनों पैर कटने पर हॉस्पिटल लाया गया था जेएलएन हॉस्पिटल में पीसांगन निवासी शिवराज (24) किशनगढ़ से दिल्ली जा रहा था। इस दौरान ट्रेन हादसे में उसके दोनों पैर कट गए। गंभीर हालत में उसे किशनगढ़ से अजमेर के JLN हॉस्पिटल रेफर किया गया था। परिजनों के साथ नहीं होने के कारण उसकी देखभाल की जिम्मेदारी उसके साथ काम करने वाले पीसांगन निवासी सागर उर्फ शंकर लाल ने संभाली। हॉस्पिटल में भी वो उसके साथ था। 3 घंटे तक ब्लड के लिए खटखटाता रहा कमरा घायल के साथी सागर ने बताया कि शिवराज पिछले करीब दो महीने से उसके साथ काम कर रहा था। हादसे की सूचना मिलने पर वह मंगलवार रात करीब 2:30 बजे दिल्ली से सीधे अजमेर हॉस्पिटल पहुंचा। हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने शिवराज की गंभीर हालत को देखते हुए तत्काल खून चढ़ाने की जरूरत बताई थी। डॉक्टरों ने पर्ची देकर ब्लड बैंक भेजा था। रात करीब 3 बजे वह ब्लड बैंक पहुंचा लेकिन वहां कई कमरों पर ताले लगे थे और एक कमरा अंदर से बंद था। सागर ने बताया कि कमरे के अंदर मौजूद स्टाफ को आवाज लगाई और कई बार दरवाजा खटखटाया, लेकिन काफी देर तक कोई बाहर नहीं आया। करीब तीन घंटे तक इंतजार करने के बाद उसने वहां के वीडियो बनाए और हेल्प डेस्क पर शिकायत की। इसके बाद सुबह करीब 6 बजे ब्लड बैंक से स्टाफ बाहर आया और ब्लड उपलब्ध कराया गया। मरीज को कुछ हो जाता तो जिम्मेदारी किसकी होती? सागर ने बताया कि वह रातभर परेशान रहा। उसका कहना है कि वार्ड में मरीज गंभीर हालत में था और डॉक्टरों ने तत्काल ब्लड लाने को कहा था। ऐसे में अगर समय पर ब्लड नहीं मिलता और मरीज की हालत बिगड़ जाती तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती? ब्लड बैंक प्रभारी बोले- मुझे जानकारी नहीं मामले में ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. जीसी मीणा ने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी नहीं है। वहीं JLN अस्पताल अधीक्षक डॉ. अरविंद खरे ने कहा कि नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।



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