गुरुग्राम2 मिनट पहले
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गुरुग्राम में युवराज मर्डर केस के दोनों आरोपियों आन्या वत्स और संयम सचदेवा को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनसेट में मृतक युवराज (पगड़ी में) और दोनों आरोपियों की फोटो।
गुरुग्राम में हाई-प्रोफाइल युवराज सिंह मनचंदा हत्याकांड में शव की शिनाख्त और अंतिम संस्कार में लापरवाही बरतने के मामले में जांच में कोताही बरतने वाले पुलिस अफसरों और कर्मचारियों पर बड़ी विभागीय कार्रवाई की तैयारी है।
दूसरी तरफ पुलिस कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली में बदलाव किए गए हैं। पुलिस रिस्पॉन्स व्हीकल की गश्त और रिस्पॉन्स सिस्टम को पूरी तरह से बदला जा रहा है ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो।
वहीं, युवराज की बहन हरसिमरन मनचंदा ने गुरुग्राम पुलिस की गंभीर लापरवाही के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता अमित प्रसाद के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की, जिसमें गुरुग्राम पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए कि शव बरामद होने के बाद भी पुलिस ने उसकी जानकारी इंटर-स्टेट पुलिस डेटाबेस ‘जिपनेट’ पर अपलोड नहीं की।
इसके चलते परिवार को अपने भाई की पहचान करने का मौका नहीं मिला और पुलिस ने गुपचुप तरीके से शव को ‘अज्ञात’ मानकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया। याचिका में मांग की गई है कि लापता लोगों और अज्ञात शवों की बरामदगी के मामलों से निपटने के लिए एक प्रभावी और कड़ा देशव्यापी कानून/प्रक्रिया (एसओपी) तय की जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए दिल्ली और गुरुग्राम के पुलिस कमिश्नरों से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है।

जानिए पूरे मामले में क्या एक्शन लिया गया…
आईओ सस्पेंड, पांच अधिकारी निशाने पर
इस पूरे मामले में जांच अधिकारी सहायक सब-इंस्पेक्टर साहून खान को पहले ही तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया जा चुका है। साहून खान पर आरोप है कि उन्होंने अज्ञात शव की बरामदगी के बाद उसके शिनाख्त के प्रयासों और कानूनी प्रक्रिया में भारी लापरवाही बरती थी।
यदि उन्होंने समय रहते त्वरित कदम उठाए होते, तो युवराज के हत्यारों तक पुलिस बहुत पहले पहुंच सकती थी। एएसआई के निलंबन के बाद अब एसएचओ बादशाहपुर, कंट्रोल रूम के अधिकारी और फॉरेंसिक टीम के दो अधिकारियों पर गाज गिर सकती है, जिनकी देखरेख में यह पूरी तफ्तीश चल रही थी।
अज्ञात शवों के लिए ACP हेडक्वार्टर स्पेशल नोडल ऑफिसर
युवराज हत्याकांड के बाद पुलिस ने अज्ञात शवों की बरामदगी और उनकी पहचान को लेकर एक बेहद सख्त और नई गाइडलाइन जारी की है। अब जिले में मिलने वाले किसी भी अज्ञात शव के मामले की निगरानी के लिए एसीपी (हेडक्वार्टर) को स्पेशल नोडल ऑफिसर नियुक्त किया गया है।
इसके अलावा क्राइम ब्रांच के एक वरिष्ठ अधिकारी की विशेष ड्यूटी लगाई गई है, जो सीधे डीसीपी (क्राइम) को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। इस नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी अज्ञात शव की सूचना को दबाया या लटकाया नहीं जा सकेगा और सीधे उच्च अधिकारियों की रडार पर ऐसे मामले रहेंगे।
दिल्ली और 5 पड़ोसी जिलों से तुरंत शेयर होगी जानकारी
अज्ञात शव मिलने पर गुरुग्राम कंट्रोल रूम को दिल्ली पुलिस के साथ फरीदाबाद, झज्जर, नूंह, रेवाड़ी और पलवल के कंट्रोल रूम से संपर्क करना होगा। शव की फोटो, हुलिया और उपलब्ध जानकारी तुरंत साझा की जाएगी। इसका उद्देश्य दूसरे जिले या राज्य में दर्ज गुमशुदगी के मामलों से मिलान कर पहचान जल्द करना है।
PCR की गश्त और रिस्पॉन्स सिस्टम में भी बदलाव
पुलिस कंट्रोल रूम की व्यवस्था में भी बदलाव किया जा रहा है। पुलिस रिस्पॉन्स व्हीकल की गश्त और मौके पर पहुंचने के रिस्पॉन्स सिस्टम को नए तरीके से व्यवस्थित किया जा रहा है। पुलिस का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि अज्ञात शव मिलने के बाद सूचना और कार्रवाई किसी एक स्तर पर रुक न जाए।

गुरुग्राम पुलिस को 10 सितंबर को बादशाहपुर के एक नाले से युवराज का शव बरामद हो गया था। पुलिस ने अज्ञात मानकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया था।
लापरवाही और चूक के लिए कार्रवाई
इस संबंध में डीसीपी (साउथ) आयुष यादव का कहना है कि इंस्पेक्टर और फोरेंसिक इकाइयों के अधिकारियों सहित कम से कम पांच अधिकारियों के खिलाफ लापरवाही और चूक के लिए एक या दो दिन के भीतर कार्रवाई की जा सकती है। इस मामले के जांच अधिकारी को पहले ही निलंबित कर दिया गया है।
शव का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर की लापरवाही के लिए हरियाणा स्वास्थ्य विभाग को कार्रवाई हेतु सिफारिशें भेजी जाएगी। डॉक्टर ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अपनी राय दी थी कि मौत का कारण डूबना हो सकता है।

अब पढ़िए क्या था पूरा मामला?
10 सितंबर को मिला था शव, 14 सितंबर को अंतिम संस्कार
31 वर्षीय युवराज सिंह मनचंदा 6 सितंबर को लापता हुए थे। 10 सितंबर को गुरुग्राम पुलिस को उनका शव बादशाहपुर के पास एक नाले से मिला। शव की पहचान नहीं होने पर पुलिस ने उसे अज्ञात माना और 14 सितंबर को अंतिम संस्कार कर दिया। बाद में सामने आया कि शव युवराज का था।
दिल्ली पुलिस ने तकनीकी जांच से हत्यारों तक पहुंच बनाई
बाद में दिल्ली पुलिस की तकनीकी जांच में युवराज की पूर्व सहकर्मी आन्या वत्स और उसके साथी संयम सचदेवा का नाम सामने आया। दोनों को उत्तराखंड से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में दोनों ने पैसों के विवाद में युवराज की गोली मारकर हत्या करने की बात कबूल की।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में डूबने की आशंका जताई गई थी
युवराज के शव का पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर ने रिपोर्ट में मौत का कारण डूबना होने की संभावना जताई थी। अब डॉक्टर की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है। गुरुग्राम पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग को डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई के लिए सिफारिश भेजने की बात कही है।
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गुरुग्राम-मैनेजर मर्डर के लिए कॉन्स्टेबल ने दिया वेपन:महिला सहकर्मी ने यूपी जाकर ₹2 लाख में डील की; 3 महीने प्लानिंग के बाद हत्या
गुरुग्राम में अडानी रियल्टी के सेल्स मैनेजर युवराज सिंह मनचंदा (31) की हत्या में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस की कड़ियां अब उत्तर प्रदेश पुलिस से जुड़ गई हैं। जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी आन्या वत्स ने हत्या को अंजाम देने के लिए यूपी पुलिस के एक सिपाही से दो अवैध देसी पिस्तौल खरीदी थी। पूरी खबर पढ़ें…

