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जयराम ठाकुर बोले- कांग्रेस में अंदरूनी कलह खुलकर सामने:सुक्खू सरकार में नेताओं को सम्मान नहीं मिल रहा, मंडी में रंगोली कार्यक्रम में पहुंचे




हिमाचल के पूर्व CM एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मंडी में गुरुवार को भाजपा महिला मोर्चा द्वारा आयोजित रंगोली कार्यक्रम में भाग लेने के बाद कांग्रेस और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की अंदरूनी बातें अब बाहर आने लगी हैं। पार्टी के भीतर गुटबाजी की स्थिति ऐसी है कि उनकी गिनती करना मुश्किल हो गया है। जयराम ठाकुर ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन हिमाचल प्रदेश उनके योगदान को हमेशा याद करता रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सुक्खू के काम करने के तौर-तरीके में वर्तमान कांग्रेस नेताओं, मंत्रिमंडल के सदस्यों और संगठन से जुड़े नेताओं के मत और योगदान को भी अपेक्षित सम्मान नहीं मिल रहा है। कांग्रेस के नेता खुद कई बार इस बात को उठा चुके हैं। कांग्रेस के भीतर चल रही राजनीति का संकेत
प्रतिभा सिंह द्वारा अनदेखी को लेकर कही गई बातों का जिक्र करते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि वीरभद्र सिंह ने रोहड़ू से पांच बार विधायक के रूप में प्रतिनिधित्व किया और लंबे समय तक हिमाचल के मुख्यमंत्री रहे। ऐसे में उनके क्षेत्र में उनकी स्मृतियों और विकास कार्यों को नजरअंदाज किया जाना कांग्रेस के भीतर चल रही राजनीति का संकेत है। पहले अपनी पार्टी के भीतर झांककर देखे CM
जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री भले ही भाजपा में गुटों की बात करते हों, लेकिन उन्हें पहले अपनी पार्टी के भीतर झांककर देखना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस में अब इतने गुट बन चुके हैं कि उनकी गिनती करना भी मुश्किल है। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री के प्रति कांग्रेस नेताओं के भरोसे में भी कमी आई है। भीतर बैठकर इस मामले पर बातचीत की जाएगी
मंडी सदर के भाजपा विधायक अनिल शर्मा द्वारा कोटली पार्किंग के लिए सांसदों से मदद मांगने और सहयोग नहीं मिलने के बयान पर जयराम ठाकुर ने कहा कि ऐसे विषयों का जवाब मीडिया के माध्यम से देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर बैठकर इस मामले पर बातचीत की जाएगी। सांसदों से 25-25 लाख रुपए की मदद मांगी थी
गौरतलब है कि अनिल शर्मा ने कहा था कि कोटली में पार्किंग निर्माण के लिए उन्होंने सांसदों से 25-25 लाख रुपए की मदद मांगी थी, लेकिन उनके अनुसार सहयोग नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के समक्ष मामला रखा और करीब दो करोड़ रुपए मिलने की बात कही थी।



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