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पलामू के बेतला के जंगल और आसपास के इलाकों से नाना पाटेकर की एक खास कहानी जुड़ी है। 39 साल पहले 1987 में वे फिल्म ‘आज का रॉबिनहुड’ की शूटिंग के लिए यहां आए थे। उस समय वे इतने मशहूर नहीं थे। बेतला फॉरेस्ट रेस्ट हाउस में महान अभिनेता उत्पल दत्त ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। उन्होंने स्थानीय पत्रकारों प्रो. अभिजित चट्टोराज, गौतम सेनगुप्ता और गजाधर बाबू से नाना का परिचय कराते हुए कहा था, ‘यह एक दिन देश का सबसे बड़ा कलाकार बनेगा।’ आने वाले सालों में नाना ने इस भविष्यवाणी को सच साबित किया। ‘अनारकली’ और ‘जूही’ को नाम से पुकारते थे नाना प्रो. चट्टोराज ने बताया कि नाना बेहद सहज और सरल स्वभाव के थे। उन्हें पलामू के जंगल, केचकी संगम और यहां के लोग बहुत पसंद आए थे। तत्कालीन सहायक वन संरक्षक संगम लाहिरी के अनुसार, नाना पाटेकर को बेतला की प्रसिद्ध हथिनी अनारकली और जूही बहुत पसंद थीं। वे उन्हें नाम से पुकारते थे। जिस पलामू को हम आज अपने आसपास देखते हैं बेतला के जंगल, कोयल-औरंगा का संगम, केचकी और रंका का राजगढ़ इन जगहों की सिनेमाई स्मृतियों में नाना पाटेकर की भी एक कहानी दर्ज है। 39 साल पहले नाना पाटेकर फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में पलामू आए थे। आसपास के जंगलों में चल रही थी शूटिंग वर्ष 1987 में जब तपन सिन्हा की फिल्म आज का रॉबिनहुड की शूटिंग गढ़वा के रंका राजगढ़ और आसपास के जंगलों में चल रही थी, तब नाना पाटेकर भी फिल्म की टीम का हिस्सा थे। उस समय वे आज की तरह मशहूर नहीं थे। लेकिन पलामू के जंगलों में ही महान अभिनेता उत्पल दत्त ने उनकी प्रतिभा पहचान ली थी। प्रो चट्टोराज ने उस दौर को याद करते हुए बताया कि उत्पल दत्त और अनिल चटर्जी का इंटरव्यू करने बेतला पहुंचे थे। इसी दौरान दुबले-पतले, सांवले युवक के रूप में नाना वहां आए। दत्त साहब ने उनका परिचय कराया। बाद में वे सभी नाना के कमरे में गए और काफी देर बातचीत हुई। नाना बेहद सहज और सरल थे। हिंदी बोलते थे, जिसमें मराठी का पुट था। उन्होंने पलामू के जंगल और यहां के लोगों की खूब तारीफ की थी। उन्हें केचकी संगम, गढ़वा राज परिवार और गढ़ भी बेहद पसंद आए थे।
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नाना पाटेकर को लेकर उत्पल दत्त की भविष्यवाणी हुई सच:'आज का रॉबिनहुड' की शूटिंग के दौरान बेतला में रुके थे दोनों, की थी पलामू की तारीफ
