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कैप्टन के पूर्व OSD समेत 3 को हाईकोर्ट से राहत:65 लाख के गबन मामले में कार्रवाई पर रोक; सप्लीमेंट्री चालान दाखिल करने के लिए दबाव बनाया




पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के पूर्व OSD संदीप सिंह संधू समेत 3 आरोपियों को हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट ने लुधियाना के गांवों में स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए जारी 65 लाख रुपए के कथित गबन से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में तीनों के खिलाफ आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। जस्टिस संजय वशिष्ठ ने तीनों आरोपियों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अंतरिम आदेश जारी किए। मामले में अगली सुनवाई 16 अक्टूबर 2026 को होगी। यह मामला वर्ष 2021-22 के दौरान लुधियाना के विभिन्न गांवों में स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए निर्धारित 65 लाख रुपए के कथित गबन से जुड़ा है। इस मामले में विजिलेंस ब्यूरो के आर्थिक अपराध शाखा थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई थी। बाद में इसमें धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी धाराएं भी जोड़ी गईं। जज के निर्देशों से जांच एजेंसी पर दबाव बना तीनों याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि मामले की सुनवाई कर रहे स्पेशल जज ने जांच एजेंसी को पत्र लिखकर कुछ आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चालान दाखिल करने के लिए दबाव बनाया। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, ट्रायल कोर्ट ने विजिलेंस ब्यूरो के चीफ डायरेक्टर और सचिव समेत अधिकारियों को पत्र लिखकर विशेष निर्देश दिए थे। आरोपियों ने दलील दी कि अदालत के इस रवैये से जांच एजेंसी की स्वतंत्रता प्रभावित हुई और उनके खिलाफ आरोपों पर पहले ही निष्कर्ष निकालने जैसी स्थिति बन गई। इससे उनके बचाव के अधिकार पर भी असर पड़ा। संधू ने कई आदेशों को दी चुनौती कैप्टन अमरिंदर सिंह के पूर्व ओएसडी संदीप सिंह संधू ने स्पेशल कोर्ट के कई अंतरिम आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी। उनका कहना था कि ट्रायल कोर्ट ने जांच जल्द पूरी करने के निर्देश देते हुए जांच एजेंसी पर उनके खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 173(8) के तहत सप्लीमेंट्री रिपोर्ट दाखिल करने का दबाव बनाया। संधू ने अदालत से संबंधित आदेशों को रद्द करने की मांग की है। गौरव-हरप्रीत ने दाखिल की याचिकाएं आरोपी गौरव शर्मा ने स्पेशल जज के 29 मई 2025 के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उनकी डिस्चार्ज अर्जी खारिज कर दी गई थी। उन्होंने 18 जुलाई 2025 को उनके खिलाफ आरोप तय करने के आदेश को भी चुनौती दी। इसी तरह हरप्रीत सिंह ने भी इन दोनों आदेशों और आरोपपत्र को हाईकोर्ट में चुनौती दी। उनका कहना था कि कुछ आरोपियों के खिलाफ चालान दाखिल नहीं किए जाने का सवाल सबसे पहले ट्रायल कोर्ट ने ही उठाया था। इसके बाद सप्लीमेंट्री चालान दाखिल किया गया। तीनों याचिकाकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि पंजाब में वर्ष 2022 में सरकार बदलने के बाद उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। उन्होंने 23 अप्रैल 2025 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि ट्रायल जज ने अलग-अलग चरणों में विजिलेंस ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर निर्देश दिए थे। उनके अनुसार, इससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं और बचाव का अधिकार प्रभावित होता है। हाईकोर्ट ने आगे की कार्रवाई पर लगाई रोक हाईकोर्ट ने तीनों याचिकाओं पर अंतरिम राहत देते हुए संबंधित FIR और चुनौती दिए गए आदेशों के तहत याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। मामले को 16 अक्टूबर 2026 को तत्काल मामलों की सूची में अंतिम केस के रूप में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। यह हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश है। मामले में आरोपों और याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर अंतिम फैसला अभी होना बाकी है।



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