Headlines

Pithampur Steel Companies High Court Order


पीथमपुर की दो स्टील कंपनियों को प्रदूषण नियंत्रण संबंधी अनिवार्य शर्तों का पालन नहीं करना भारी पड़ गया। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने मुद्रा स्टील इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड और पेंसोल इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड की उन याचिकाओं को खारिज कर द

.

जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की बेंच ने 28 सितंबर को पारित आदेश में स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य के मामलों में प्रदूषण नियंत्रण के निर्धारित मानकों का पालन अनिवार्य है। केवल प्रदूषण नियंत्रण उपकरण स्थापित कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उत्पादन के दौरान उनका प्रभावी ढंग से संचालन भी जरूरी है।

छह महीने में लगाना था विशेष सिस्टम, शर्त पूरी नहीं हुई

दरअसल, 2025 में उद्योगों को संचालन की सहमति देते समय दोनों इंडक्शन भट्टियों पर छह महीने के भीतर धुआं निष्कर्षण प्रणाली स्थापित करने की शर्त रखी गई थी।

निर्धारित समय में इस शर्त का पालन नहीं होने पर संचालन की सहमति के नवीनीकरण से इनकार कर दिया गया। इसके बाद उद्योगों के खिलाफ बंदी की कार्रवाई की गई।

प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था में सुधार के लिए उद्योगों को अस्थायी राहत देते हुए बैंक गारंटी भी ली गई थी। हालांकि, कलेक्टर द्वारा गठित समिति के निरीक्षण में प्रदूषण नियंत्रण उपकरण चालू हालत में नहीं मिले।

निरीक्षण के दौरान सक्शन पाइप के जोड़ भी खुले पाए गए। इन निष्कर्षों के आधार पर प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने बंदी आदेश जारी किया और संचालन की नई सहमति के आवेदन भी अस्वीकार कर दिए।

कंपनियों ने उठाए नोटिस और निरीक्षण रिपोर्ट पर सवाल

याचिकाकर्ता कंपनियों की ओर से दलील दी गई कि बंदी आदेश जारी करने से पहले उन्हें कारण बताओ नोटिस नहीं दिया गया और न ही सुनवाई का पर्याप्त अवसर मिला। उन्होंने मंडल के एक अधिकारी की निरीक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह सवाल भी उठाया कि उपकरणों की स्थापना का उल्लेख होने के बावजूद प्रतिकूल रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई क्यों की गई।

इसके जवाब में शासन और अन्य प्रतिवादियों की ओर से कहा गया कि उद्योगों की संचालन अनुमति 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी थी। इसके बावजूद प्रदूषण नियंत्रण संबंधी आवश्यक शर्तों का पालन नहीं किया गया। निरीक्षण में उपकरण बंद मिलने और पाइप के जोड़ खुले होने से स्पष्ट था कि प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रही थी।

वैध अनुमति के बिना उद्योग चलाने का अधिकार नहीं

बेंच ने प्रदूषण नियंत्रण मंडल की कार्रवाई को वैधानिक मानते हुए उसमें हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने माना कि पर्यावरण की सुरक्षा के लिए प्रदूषण नियंत्रण मंडल आवश्यक कार्रवाई कर सकता है और वैध संचालन अनुमति के बिना उद्योग चलाने का अधिकार नहीं माना जा सकता।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की स्थापना के साथ उनका सही तरीके से काम करना भी जरूरी है। पर्यावरणीय शर्तों की अनदेखी को केवल उपकरण लगाए जाने के आधार पर उचित नहीं ठहराया जा सकता।

शर्तें पूरी करने पर नए आवेदन की छूट

हाई कोर्ट ने दोनों कंपनियों की याचिकाएं खारिज करते हुए बंदी आदेश और संचालन की सहमति से संबंधित आवेदनों को अस्वीकार करने के फैसलों में दखल नहीं दिया।

हालांकि, कंपनियों को यह स्वतंत्रता दी गई है कि वे सभी तकनीकी आवश्यकताओं और प्रदूषण नियंत्रण संबंधी शर्तों का पूर्ण पालन करने के बाद सक्षम प्राधिकारी के समक्ष संचालन की सहमति के लिए नया आवेदन पेश कर सकती हैं। ऐसे आवेदन पर प्रदूषण नियंत्रण मंडल को लागू कानून और पर्यावरणीय नियमों के अनुसार विचार करना होगा।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *