100 से अधिक तालाब दूसरे फेज में संवारे जाएंगे:जलसंकट दूर करने के लिए 150 तालाबों का काम पूरा




धनबाद जिले में जल संकट दूर करने की बड़ी तैयारी चल रही है। इसके दूसरे फेज में 100 से अधिक तालाबों का जीर्णोद्धार किया जाएगा। इनमें छोटे-बड़े सभी आकार के तालाब शामिल हैं। इनमें से सड़क किनारे मौजूद बड़े तालाबों का विशेष सौंदर्यीकरण भी होगा। चारों ओर मेड़ बनाकर पार्क का निर्माण किया जाएगा। उसमें बच्चों के लिए झूले लगेंगे। लोग पूरे परिवार के साथ पिकनिक मनाने भी आ सकेंगे। इन कार्यों के लिए जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) से फंड उपलब्ध कराया जाएगा। दूसरे फेज के काम के लिए सरकार से तकनीकी स्वीकृति मिल चुकी है। गौरतलब है कि जिले में वर्षा जल संरक्षण और भूगर्भ जलस्तर को मेंटेन रखने के लिए 264 तालाबों को संवारने की योजना है। इसके पहले फेज में 150 तालाबों का काम लगभग पूरा हो चुका है। सामग्रियों की नई दरों के आधार पर डीपीआर में होगा संशोधन लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता उमेश प्रसाद महतो ने बताया कि राज्य सरकार से निर्माण सामग्रियों की नई दरों का चार्ट आ गया है। इस कारण पुरानी दरों पर भेजे गए प्रस्ताव वापस ले लिए जाएंगे। उनकी जगह नई दरों के आधार पर 100 से अधिक तालाबों के लिए फिर से डीपीआर तैयार कराई जाएगी। उसे प्रशासनिक स्वीकृति के लिए डीएमएफटी प्रबंध समिति को भेजा जाएगा। बड़े तालाबों पर 1 करोड़ तक होंगे खर्च… 9 प्रखंडों में 8-10 तालाब : गोविंदपुर को छोड़कर अन्य 9 प्रखंडों में से हरेक में जीर्णोद्धार के लिए 8-10 तालाबों का चयन किया गया है। उनमें निरसा का 44 एकड़ का दरिया और 22 एकड़ का राजा तालाब, टुंडी का 40 एकड़ का धधकीटांड़ और बलियापुर के सुरुंगा व परसबनिया तालाब शामिल हैं। बड़े तालाबों के सौंदर्यीकरण पर 90 लाख रुपए से एक करोड़ के बीच खर्च होने का अनुमान है। गोविंदपुर में एक भी नहीं : लघु सिंचाई विभाग के अनुसार, गोविंदपुर प्रखंड में नीति आयोग के मद से करीब 300 तालाबों का जीर्णोद्धार किया गया है। इसलिए डीएमएफटी से काम कराने के लिए यहां एक भी तालाब चयनित नहीं है। जीर्णोद्धार के ये मुख्य उद्देश्य जलस्तर मेंटेन रखना : बरसात बाद मिट्टी व जलकुंभी से धीरे-धीरे तालाब सूखते हैं। जीर्णोद्धार से उनमें सालभर पानी रहेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट नहीं होगा। सिंचाई व व्यवसाय : किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। वे समूह में सिंघाड़े की खेती व मत्स्य पालन जैसे काम कर सकेंगे। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।



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