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धर्मेंद्र कश्यप की अखिलेश यादव से मुलाकात:बदायूं की सियासत में हलचल, दातागंज और शेखूपुर के समीकरणों पर असर




आंवला से सांसद रहे धर्मेंद्र कश्यप की भाजपा से दूरी और रविवार को सपा मुखिया अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद बदायूं की सियासत में भी हलचल तेज हो गई है। कश्यप के अगले राजनीतिक कदम को लेकर चर्चाओं के बीच दातागंज और शेखूपुर विधानसभा क्षेत्रों के समीकरणों पर नजरें टिक गई हैं। दातागंज में भाजपा के मौजूदा विधायक राजीव कुमार सिंह उर्फ बब्बू भैया के सामने राजनीतिक चुनौती बढ़ने की अटकलें हैं, तो शेखूपुर से सपा विधायक हिमांशु यादव के लिए संभावित सियासी लाभ की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, धर्मेंद्र कश्यप ने अभी तक सपा की सदस्यता नहीं ली है। ऐसे में फिलहाल इसे संभावित राजनीतिक बदलाव के तौर पर ही देखा जा रहा है। दरअसल, भाजपा में रहते हुए भी धर्मेंद्र कश्यप और दातागंज विधायक राजीव कुमार सिंह के बीच राजनीतिक तालमेल को लेकर सवाल उठते रहे हैं। एचपीसीएल में दोहरे हत्याकांड के बाद धर्मेंद्र कश्यप ने सार्वजनिक रूप से विधायक को कठघरे में खड़ा किया था। हालांकि, पुलिस की तफ्तीश और एसआईटी की जांच में विधायक के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं हुई। इस घटनाक्रम ने दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक दूरी को चर्चा में ला दिया था। अब अगर धर्मेंद्र कश्यप भाजपा से अलग होकर सपा के साथ आते हैं, तो दातागंज में इसका असर देखने को मिल सकता है। कश्यप का अपने सजातीय मतदाताओं के साथ दूसरे वर्गों में भी प्रभाव माना जाता है। ऐसे में उनके सपा के साथ जाने की स्थिति में भाजपा के मौजूदा विधायक के सामने अपने समर्थक आधार को मजबूत बनाए रखने की चुनौती बढ़ सकती है। राजीव कुमार सिंह भी दातागंज में सक्रिय हालांकि, किसी नेता के साथ व्यक्तिगत समर्थन का पूरा वोट में तब्दील होना तय नहीं है। इसका वास्तविक असर चुनाव के समय ही स्पष्ट होगा। दूसरी ओर, राजीव कुमार सिंह भी दातागंज में अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखने के लिए लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। क्षेत्र में संगोष्ठियों के आयोजन से लेकर आम लोगों के बीच पहुंचकर संवाद करने तक, उनकी गतिविधियां जारी हैं। ऐसे में धर्मेंद्र कश्यप के संभावित राजनीतिक रुख के बीच विधायक की क्षेत्रीय सक्रियता भी अहम मानी जा रही है। हिमांशु को मजबूती मिलने के आसार
उधर, शेखूपुर विधानसभा क्षेत्र में सपा विधायक हिमांशु यादव का अपना राजनीतिक आधार है। यदि धर्मेंद्र कश्यप सपा में शामिल होते हैं और उनका समर्थक वर्ग भी पार्टी के साथ जुड़ता है, तो इससे सपा के वोटबैंक को मजबूती मिलने की संभावना बन सकती है। हालांकि, धर्मेंद्र कश्यप का प्रभाव किन क्षेत्रों में और कितना है, यह उनके अगले कदम और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर निर्भर करेगा। अगले राजनैतिक कदम पर नजर
फिलहाल धर्मेंद्र कश्यप और अखिलेश यादव की मुलाकात ने बदायूं की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। इसका असर केवल किसी एक विधानसभा सीट तक सीमित रहेगा या जिले के दूसरे क्षेत्रों के समीकरण भी प्रभावित होंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है। फिलहाल सबकी निगाहें धर्मेंद्र कश्यप के अगले राजनीतिक कदम पर हैं।



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