Headlines

सलूंबर में 'हम भारत के लोग' थीम पर सांस्कृतिक संगम:गवरी, रस्साकसी, शौर्य प्रदर्शन और जनजातीय नृत्य ने बांधा समां, लोकमंथन यात्रा का किया स्वागत




भारतीय संस्कृति, लोकजीवन और समृद्ध परंपराओं की झलक सोमवार को सलूंबर में देखने को मिली। ‘लोकमंथन यात्रा 2026’ का नगर में भव्य स्वागत किया गया। ‘हम भारत के लोग’ विषय पर आयोजित इस यात्रा में लोक कला, पारंपरिक खेल, लोकनृत्य, शौर्य प्रदर्शन और वैचारिक विमर्श के जरिए भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश दिया गया। औदिच्य समाज भवन, दीनदयाल कॉलोनी में आयोजित कार्यक्रम में मेवाड़ की लोकसंस्कृति और जनजातीय परंपराओं की मनमोहक प्रस्तुतियों ने आयोजन को विशेष स्वरूप दिया। वेघनाथ की धूणी से शुरू हुआ यात्रा का सफर
लोकमंथन यात्रा के तहत वेघनाथ की धूणी पर कार्यकर्ता एकत्र हुए। इसके बाद वाहन रैली के माध्यम से यात्रा आगे बढ़ी। सूयो का कुआं और डाल चौराहा पर शोभायात्रा का स्वागत किया गया। यहां से यात्रा औदिच्य समाज भवन पहुंची, जहां विभिन्न सांस्कृतिक,पारंपरिक और वैचारिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। गवरी और गैर नृत्य में दिखी मेवाड़ की सांस्कृतिक पहचान
कार्यक्रम में मेवाड़ की समृद्ध लोकपरंपराओं को लोकनृत्यों के माध्यम से जीवंत किया गया। गैर नृत्य और गवरी से जुड़ी प्रस्तुतियों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। लोकगीतों और पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से क्षेत्र की लोकजीवन शैली, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सामने रखा गया। शौर्य प्रदर्शन से जुड़ी गतिविधियों ने भी कार्यक्रम में उत्साह का माहौल बनाया। ‘जंगल-जमीन हमारा’ नृत्य से दिया संदेश
कार्यक्रम में जनजातीय बालिका छात्रावास की बालिकाओं ने ‘जंगल-जमीन हमारा’ विषय पर आधारित नृत्य प्रस्तुत किया। प्रस्तुति के माध्यम से जनजातीय समाज के जीवन, प्रकृति से जुड़ाव और सांस्कृतिक पहचान को अभिव्यक्त किया गया। बालिकाओं की प्रस्तुति आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रही। मांडना, हस्तनिर्मित कलाकृतियां और पारंपरिक खेल बने आकर्षण
लोकमंथन यात्रा में केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियां ही नहीं, बल्कि पारंपरिक कला और पुरानी जीवनशैली की झलक भी देखने को मिली। मांडना कला, हाथों से तैयार की गई कलाकृतियों और पारंपरिक वस्तुओं की प्रदर्शनी के माध्यम से लोककला एवं विरासत को प्रदर्शित किया गया। रस्साकसी जैसे पारंपरिक खेलों ने आयोजन में सहभागिता और उत्साह का रंग भरा। इन गतिविधियों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और पारंपरिक जीवनशैली से जोड़ने का प्रयास किया गया। प्रतिभाओं का सम्मान, विचार संगोष्ठी में ‘हम भारत के लोग’ पर विमर्श
आयोजन के दौरान प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम भी रखा गया, जिसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाली प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना रहा। इसके साथ ही ‘हम भारत के लोग’ विषय पर विचार संगोष्ठी की गई। यात्रा के साथ पहुंचे प्रबुद्ध चिंतकों और विचारकों ने भारतीय समाज, संस्कृति, लोकजीवन और सामाजिक सहभागिता से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखे। लोकसंस्कृति और सामाजिक सहभागिता का मंच बनी यात्रा
लोकमंथन यात्रा 2026 के माध्यम से सलूंबर में भारतीय लोकपरंपराओं, सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक सहभागिता को एक मंच पर प्रस्तुत किया गया। लोकनृत्य, पारंपरिक कलाओं, जनजातीय प्रस्तुतियों, खेलों और विचार संगोष्ठी के जरिए आयोजन ने संस्कृति और समाज के बीच संवाद को प्रमुखता दी।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *